आचार संहिता की भेंट चढ़ी राजधानी की सफाई व्यवस्था

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/04/13 08:52

जयपुर। राजधानी की सफाई व्यवस्था आचार संहिता की भेंट चढ़ गई है। आचार सहिंता के नाम पर निगम के अधिकारी और जनप्रतिनिधि कोई जनहित का काम ही नहीं करना चाह रहे हैं। इसका नुकसान शहर को और शहर के लाेगों को हो रहा है। मौजूदा समय में राजधानी की सफाई व्यवस्था अपने सबसे बुरे दौर में है। एक रिपोर्ट:

हाल ही में जारी हुए स्वच्छता सर्वेक्षण में शर्मनाक प्रदर्शन से भी जयपुर नगर निगम ने सबक नहीं लिया है। शहर में सफाई की स्थति अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गई है। दूर दराज और अंदर की कॉलोनियों की बात तो छोडि़ये, शहर के वीआईपी इलाकों में भी सफाई व्यवस्था बहुत दयनीय है। शहर में हर तरफ कचरे के ढ़ेर ओर गंदगी का अंबार ही नजर आ रहा है। निगम के आयुक्त वीपी सिंह ने बीते दिनों में कई बार सफाई व्यवस्था को देखने के लिए निरीक्षण भी किया है, लेकिन यह सिर्फ खानापूर्ति बन कर ही रह गया है। निगम में हर रोज गंदगी और कचरे को लेकर बहुत सी शिकायतें भी आ रही है। पार्षदों और मेयर को भी गंदगी को लेकर काफी शिकयतें मिल रही है, लेकिन चाहे अधिकारी हों या जनप्रतिनिधि सभी आचार सहिंता का बहाना कर इन शिकायतों से पल्ला झाड़ रहे है। 

शहर में सफाई की व्यवस्था बेटरी होने का सबसे बड़ा कारण है डोर टू डोर कचरा संग्रहण का काम करने वाली बीबीजी कंपनी का खराम काम। असल में अब इस कंपनी ने निगम के अनुबंध से खुद को अलग कराने का मन बना लिया है। यही कारण है कि कंपनी ने धीरे धीरे शहर से अपने संसाधन कम करना शुरु कर दिए है। पहले जहां घर से कचरा लेने के लिए हर रोज इस कंपनी की गाड़ी पहुंचती थी। वहां अब हालत यह है कि आधे से अधिक शहर में सप्ताह में एक बार भी गाड़ी बमुशकिल आ रही है। हैरानी की बात तो यह है कि मेयर बनने के पहले और मेयर बनने के बाद विष्णु लाटा इस कंपनी पर रोज कार्रवाई का दावा करते थे, लेकिन अब मेयर लाटा कंपनी पर कार्रवाई के निर्देश तक नहीं दे पा रहे हैं। 

खुद की और निगम के अधिकारियों की नाकामी को छिपाने के लिए मेयर लाटा ने अब एक नया नाटक किया है। लाटा ने जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजकर शहर की सफाई व्यवस्था जायजा लेने की अनुमति मांगी है, असल में आचार संहिता के समय मेयर शहर का निरीक्षण नहीं कर सकते है। मेयर ने यह पत्र भेजकर यह मैसेज देने की कोशिश की है कि शहर का निरीक्षण नहीं करने के कारण ही सफाई की व्यवस्था इतनी खराब हुई है, लेकिन मेयर साहब को कौन समझााए कि सिर्फ दौरे करने से ही शहर में सफाई को ठीक नहीं किया जा सकता है। अगर ऐसा होता तो निगम के आयुक्त वीपी सिंह तो बीते दिनों में कई बार शहर का दौरा कर चुके है। शहर में सफाई व्यवस्था को ठीक करने के लिए दौरों की नहीं, मजबूत इच्छाशक्ति और कठिन फैसलों की जरूरत है। 

शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था के कारण:

1-बीबीजी सफाई कंपनी की नाकामी शहर में गंदगी का बड़ा कारण है। निगम कंपनी पर कार्रवाई नहीं कर पा रहा है,,इसलिए कंपनी हर रोज लापरवाही कर रही है। 
2-मेयर को खुद शहर की सफाई की चिंता नहीं है, मेयर इन दिनों चुनावों में प्रचार और आईपीएल के पास बांटने में बिजी है। 
3-निगम के आयुक्त वीपी सिंह की कार्यप्रणाली भी शहर मेें गंदगी और कचरे का बड़ा कारण हैं। कई दौरों के बाद भी आयुक्त सफाई व्यवस्था को पटरी पर नहीं ला पा रहे हैं। 
4-जोन उपायुक्तों ने खुद को शहर में सफाई व्यवस्था से अलग कर लिया है, उपायुक्त दूसरे कामों में व्यस्त है और हर जोन में सफाई व्यवस्था बदहाल है। 
5-सफाई कर्मियों का सही उपायोग निगम नहीं कर पा रहा है। कुछ महीने पहले करीब 5 हजार सफाईकर्मियों की भर्ती हुई लेकिन कोई अच्छा परिणाम नहीं आया। 

मेयर बनने के बाद विष्णु लाटा ने शहर की सफाई व्यवस्था को ठीक करना अपनी पहली प्राथमिकता बताया था, लेकिन मेयर के काम करने के तरीके को देखकर लग रहा है कि सफाई उनकी प्राथमिकता में कहीं है ही नहीं। अगर खुद की राजनैतिक महत्वाकांक्षा को परे रखकर मेयर ने जल्द ही शहर के लिए नहीं सोचा तो बहुत देर हो जाएगी। 

... शिवेन्द्र सिंह परमार की रिपोर्ट

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in