VIDEO: आरएसएस की पुष्कर में समन्वय बैठक संपन्न, एनआरसी, कश्मीर सहित कई मुद्दों पर हुई चर्चा 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/09 08:31

जयपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के 100 दिन के फैसलों को लेकर संतुष्ट है. अब आगामी दिनों में आरएसएस से जुड़े विभिन्न संगठन राष्ट्र सेवा के तहत सीमा क्षेत्रों में चल रहे कार्यों में तेजी तो लाएंगे ही, साथ ही महिला सशक्तिकरण व आदिवासियों के कल्याण के लिए चल रहे कार्यों को बढ़ाया जाएगा. 

दरअसल पुष्कर में चल रही तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक का आज समापन हो गया. दुनिया भर में प्रसिद्ध जगतपिता ब्रह्मा की तीर्थनगरी पुष्कर आरएसएस व उनसे जुड़े संगठनों के लोगों ने आपसी चर्चा में जो फैसले किये, उस दिशा में वर्षभर कार्य किये जायेंगे. आरएसएस की समन्वय बैठक पर खास रिपोर्ट:

195 अखिल भारतीय स्तर के पदाधिकारियों की मौजूदगी:
आरएसएस की और से सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होंसबोले का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय समन्वय बैठक हर साल सितंबर महीने में होती है. इस बैठक में इस बार 210 प्रमुख अखिल भारतीय स्तर के पदाधिकारियों को बुलाया गया था, जिनमें से 195 अखिल भारतीय स्तर के पदाधिकारियों की मौजूदगी रही. आरएसएस का कहना है कि समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले तमाम स्वयंसेवकों की मौजूदगी रही, जिसमें राष्ट्र सेविका समिति की भी पदाधिकारी मौजूद रहीं. 

संपन्न राष्ट्र बनाने पर फोकस:
समन्वय बैठक में तमाम विभिन्न संगठनों के कार्य के विस्तार को लेकर चर्चा हुई. जिनमें हर एक संगठन के वर्ष भर के अनुभवों पर चर्चा की गई. आरएसएस का कहना है कि लंबे समय तक गुलामी में रहने के कारण समाज में जो कमियां आई है, उन कमियों को दूर करना होगा. हमें अपने पैरों पर खड़े रहना होगा और संपन्न राष्ट्र बनाने पर फोकस करना होगा. इसी कड़ी में आने वाली समस्याओं के निराकरण को लेकर संबंध में बैठक में चर्चा हुई है.

पुरानी शिक्षा नीति को लेकर असंतुष्ट:
देश की पुरानी शिक्षा नीति को लेकर भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संतुष्ट नहीं है. यही कारण है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ही अपने विचार रखता है. आरएसएस का मानना है आधुनिकता के साथ क्वालिटी एजुकेशन हो और भारत में शिक्षा उसी स्तर पर पहुंचे जिस स्तर में एक समय में भारत का नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालयों के दौरान दुनिया में नाम था. 

बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं पर चिंता:
बैठक में  पिछले कई वर्षों में महिलाओं में जो असुरक्षा के भाव बढ़े हैं, उसको लेकर भी चिंता व्यक्त की गई और विभिन्न तरीके के सुझाव भी आए. छोटी बच्चियों के साथ बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सुझाव आए कि सरकारों के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि इन घटनाओं के विरोध में समाज को भी जागरूक जागरूक किया जाए. ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिये. समाज को ठीक करना समाज ही नहीं सभी का धर्म है. 

पर्यावरण संरक्षण जागरूकता के लिए एक कार्यशाला:
बैठक में पर्यावरण के संदर्भ में भी जनजागरण पर चर्चा हुई. साथ ही पर्यावरण रक्षा व संवर्धन पर भी चर्चा हुई. इसी को लेकर संघ ने एक योजना बनाई है कि आगामी दिनों में देश के दो भागों में, जिनमें की आगरा और पुणे में एक-एक दिन की पर्यावरण संरक्षण जागरूकता के लिए एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी. जिसमें जागरूकता की अलख जगाने के लिए काम किया जाएगा. आरएसएस ने कहा है कि "पेड़ लगाओ प्लास्टिक छोड़ो पानी बचाओ". 

महिलाओं के सर्वे को लेकर भी मंत्रणा:
बैठक में संघ परिवार की 700 महिलाओं के सर्वे को लेकर भी मंत्रणा हुई. इन 700 महिलाओं ने 43000 से ज्यादा महिलाओं को लेकर सर्वेक्षण किया है, जिनमें महिलाओं के अलग-अलग तरह से आर्थिक और शैक्षिक स्तर पर सर्वे किया गया है. इस सर्वे की रिपोर्ट को 24 सितंबर को दिल्ली में रिलीज किया जाएगा. 

सीमा सुरक्षा पर भी चर्चा:
सीमा क्षेत्र के तहत जलीय व थल सीमा सुरक्षा पर भी चर्चा की गई. संघ ने तय किया है कि सीमा क्षेत्रों पर विकास की दृष्टि से और भी ज्यादा काम किया जाएगा. आरएसएस की दलील है कि सीमा पर राष्ट्र विरोधी गतिविधियां चलती रहती है, जिनमें की जाली नोट व नशीले पदार्थ जैसी समस्याएं भी है. मतान्तरण होना भी सीमा पर तेजी से जारी रहता है, जिनमें ईसाईकरण और मुस्लिमकरण होता है. संघ का मानना है कि सीमा पर सुरक्षा के लिए सभी की महत्वपूर्ण भूमिका हो इस और काम करने की आवश्यकता है. 

मतांतरण को रोकना भी एक चुनौती:
भारत में जनजाति क्षेत्र सर्वाधिक है, 8 से 10 करोड़ जनजातियों के लोग भारत में रहते हैं और जनजातियों के मतांतरण को रोकना भी एक चुनौती है. मुस्लिमकरण और ईसाईकरण जैसी समस्या पर चर्चा हुई. इस संबंध में बैठक के दौरान देश के मध्य क्षेत्र के आदिवासियों के कल्याण के लिए संघ द्वारा चल रहे विभिन्न कार्यक्रमों को लेकर प्रजेंटेशन भी दिया गया. आज भी मतांतरण होता है, जिस पर बैठक में चर्चा हुई. बैठक में नक्सलवाद जैसे मुद्दे भी आये. साथ ही आरएसएस का मानना है कि केंद्र सरकार के प्रयासों से नक्सलवाद में कमी भी आई है. आरएसएस की इस बैठक में मदरसों को लेकर भी बातचीत हुई है, इसे लेकर कुछ सुझाव भी आए हैं. आरएसएस का मानना है कि मुस्लिम भी बहुत सारे राष्ट्रभक्त हैं, साथ ही आरएसएस ने उत्तर प्रदेश सरकार के मदरसों में तिरंगे को लेकर लिए गए फैसले की भी सराहना की है. 

कश्मीर पर फैसले को लेकर सराहना:
समन्वय बैठक में केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 और 35a के फैसले को लेकर सराहना हुई. इसे एक ऐतिहासिक फैसला बताया. वहीं केंद्र सरकार के द्वारा जम्मू कश्मीर में शांति व्यवस्था के लिए लिए गए फैसलों को लेकर आरएसएस पूरी तरह से संतुष्ट है और केंद्र सरकार की सराहना भी करता है. आरएसएस का कहना है कि जम्मू कश्मीर में संघ कार्य कई वर्षों से चलता आया है. जिन नेताओं को नजरबंद किया गया, वह भी राष्ट्र हित में लिया गया फैसला था. वह नेता जनता को उकसाये नहीं, इसलिए यह फैसला लिया गया था. आरएसएस की दलील है कि केंद्र सरकार ने दूसरे कार्यकाल के 100 दिन में भी बहुत अच्छे फैसले लिए हैं, इससे पूर्व में अच्छे कार्य और अच्छे फैसले लिए इसीलिए केंद्र में दोबारा सरकार बनी है।

हिंसा का संघ समर्थन नहीं करता:
मोबलीचिंग से जुड़े सवाल पर जवाब देते हुए आरएसएस ने यह भी कहा कि समाज में किसी भी प्रकार की हिंसा का संघ समर्थन नहीं करता है. बांग्लादेश के घुसपैठियों के पास कई तरीके के डाक्यूमेंट्स आ चुके हैं, जिसको लेकर आरएसएस का मानना है कि स्थानीय स्तर पर नेताओं और अन्य लोगों के सहयोग से ऐसा हुआ था, लेकिन केंद्र घुसपैठियों वाली समस्या का निराकरण कर रहा है. सरकार को आगे कार्रवाई करनी चाहिए. हालांकि घुसपैठियों को लेकर रिपोर्ट बनाई गई है उसमें कुछ कमियां है, उन्हें दूर भी किया जाना चाहिए. 

जारी रहना चाहिए आरक्षण:
आरक्षण को लेकर पत्रकारों के द्वारा किए गए सवाल के जवाब में आरएसएस की तरफ से दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि समाज में जब तक छुआछूत व असमानता है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए. आरक्षण ले रहा वर्ग जब तक चाहेगा, आरक्षण जारी रहना चाहिए. प्रचार प्रमुख अरुण कुमार ने कहा आप अपने शब्द मेरे मुंह मे मत डालिए. दत्तात्रेय ने कहा समीक्षा जब होगी, तब होगी मगर आज आरक्षण की आवश्यक्ता है. मन्दिर, कुआ और शमशान में भेदभाव नहीं होना चाहिए. 

नहीं हुआ कोई रेजोल्यूशन पास:
हालांकि इस अखिल भारतीय समन्वय बैठक को लेकर आरएसएस पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इसमें किसी तरीके का कोई रेजोल्यूशन पास नहीं किया जाएगा. इसमें आरएसएस से जुड़े विभिन्न संगठन चर्चा करेंगे और अपनी अपनी राय देंगे, लेकिन एक बात तय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आगामी दिनों में राष्ट्र सुरक्षा व महिला सशक्तिकरण को लेकर भी पर्यावरण संरक्षण की तर्ज पर काम करेगा. 

... संवाददाता ऐश्वर्य प्रधान की रिपोर्ट

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