गुर्जर आरक्षण मामले में बैंसला ने की 15 दिनों में समझौते को लागू करने की मांग

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/10 09:08

हिण्डौन सिटी(करौली)। कर्नल किरोडी बैंसला के भाजपा में शामिल होने के बाद गुर्जरों के पांच प्रतिशत आरक्षण का मामला एक बार फिर गरमाता दिखाई दे रहा है। शुक्रवार को हिण्डौन सिटी में गुर्जर नेता कर्नल किरोडी बैंसला के आवास पर गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की आपात बैठक आयोजित हुई जिसमें सरकार पर गत दिनों हुए समझौते की पालना नहीं करने का आरोप लगाते हुए कर्नल बैंसला ने चेतावनी दी हैं कि यदि 15 दिनों में उन्हे उनका हक नहीं मिला तो वो चुप नहीं बैठेंगे और फिर आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। उन्होने कहा कि सरकार की नीयत में खोट है। बैठक में करीब एक दर्जन जिलों के गुर्जर नेताओं ने भाग लिया।

कर्नल बैंसला ने कहा कि 15 फरवरी को मलारना डूंगर में हुए आंदोलन के दौरान समझौता हुआ कि 5 प्रतिशत आरक्षण बिल 13 फरवरी से ही लागू होगा लेकिन उसे अभी तक लागू नहीं किया है जिससे गुर्जर समाज को कई नौकरियों में उसका लाभ नहीं मिला है। इसके अलावा गत आंदोलनों में तीन शहीद हुए गुर्जरों के परिवारों को मुआवजा व नौकरी नहीं दी गई। इसके अलावा अन्य नौकरियों में बैकलॉग की भर्तियों को चिन्हित करने  के मामले में कार्यवाही नहीं हुई। आंदोलन के दौरान हुए मुकदमों का निस्तारण करने पर भी सरकार द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इसके अलावा समझौते के अन्य बिंदुओं पर भी सरकार कार्यवाही नहीं कर रही जिससे गुर्जर समाज में रोष है। 

15 दिनों में समझौते की पालना का दिया अल्टीमेटम
उन्होने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले 15 दिनों में सरकार या तो समझौते की पालना कर गुर्जरों को उनका हक दे वरना हम चुप नहीं बैठेंगे और जो भी बनेगी हम कार्यवाही करेंगे। उन्होंने कहा कि मेरी आवाज नहीं सुनी गई और न्याय नहीं मिला तो मैं आंदोलन करूंगा। भाजपा से जुड़ने के सवाल पर कर्नल ने कहा कि राजनैतिक पार्टी से जुड़ना व सामाजिक कार्य दोनों अलग-अलग है। 

गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति में कोई बिखराव नहीं
वहीं आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता शैलेन्द्र गुर्जर ने कहा कि संघर्ष समिति में कोई बिखराव नहीं है। सभी ने कर्नल बैंसला को संयोजक बनाया था। 14 सालों से कर्नल संर्घष कर रहे हैं। गुर्जरों को सभी लाभ कर्नल बैंसला के नेतृत्व में संघर्ष से मिले हैं। पूरा समाज एकजुट है व कर्नल के साथ है। राजनैतिक विचारधार अलग हो सकती है। समाज हित सर्वोपरी है। और समाज के लिए आंदोलन करना पड़ा तो उसके लिए फिर तैयार हैं।

....मनीष बंसल फर्स्ट इंडिया न्यूज हिण्डौन सिटी करौली

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