VIDEO: रियायती दर पर संस्थाओं को भूमि आवंटन प्रकरण, जेडीए की रिपोर्ट में हुए अहम खुलासे 

VIDEO: रियायती दर पर संस्थाओं को भूमि आवंटन प्रकरण, जेडीए की रिपोर्ट में हुए अहम खुलासे 

जयपुर: कौड़ियों के भाव विभिन्न संस्थाओं को भूमि आवंटन के बारे में जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से सरकार को भेजी रिपोर्ट में कई खुलासे हुए हैं. ऐसे प्रकरण भी सामने आए हैं, जिनमें निर्धारित अवधि में संस्था की ओर से निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया है. जयपुर विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1982 में अपनी स्थापना के बाद से जिन जिन संस्थाओं को रियायती दर पर भूमि आवंटित की है. राज्य सरकार के आदेश पर इन सभी प्रकरणों में जेडीए की ओर से मौका मुआयना कराया जा रहा है. जेडीए ने अब तक 139 प्रकरणों की तथ्यात्मक रिपोर्ट नगरीय विकास विभाग को भिजवा दी है. संस्था को आवंटन की अहम शर्त यह भी है कि निर्धारित अवधि में मौके पर निर्माण कार्य पूरा किया जाए. जेडीए की ओर से भेजी गई इस रिपोर्ट में ऐसे प्रकरण भी सामने आए हैं जिनमें तय अवधि में निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया है. 

रियायती दर पर भूमि आवंटन मामला: 
-महर्षि अरविंद भारती विद्यालय को विश्वविद्यालय के लिए 30 एकड़ भूमि आवंटित की गई थी.

-निर्धारित अवधि में समस्त निर्माण पूरा करना था, लेकिन इस संस्था की ओर से ऐसा नहीं किया गया.

-इस संस्था को भवन मानचित्र अनुमोदन के 5 वर्ष में निर्माण पूरा कर पूर्णता प्रमाण पत्र लेना था, जो कि संस्था द्वारा नहीं लिया गया.

-संजय शिक्षा समिति को विश्वविद्यालय के लिए डीएलसी दर का 30% एवं 20% उपरि व्यय की दर पर 123254 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई थी.

-आवंटन की शर्तों की पालना नहीं की गई है, संस्था को 6 अक्टूबर 2018 तक निर्माण पूरा करना था, लेकिन नहीं किया गया.

-राजस्थान भृगुवंशीय सामूहिक विवाह समिति को वृद्धाश्रम एवं छात्रावास के लिए 16 सितंबर 2013 को ₹225 प्रति वर्ग मीटर की दर पर 2000 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई थी.

-निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया है.

-मैढ क्षत्रिय स्वर्णकार वेलफेयर सोसाइटी को छात्रावास के लिए 16 सितंबर 2013 को ₹225 प्रति वर्ग मीटर की दर से 4000 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई थी. 

-निर्धारित अवधि में निर्माण पूरा नहीं किया गया है.

-जयपुर जिला माली समाज संस्था को 16 सितंबर 2013 को वृद्धाश्रम, बेरोजगार प्रशिक्षण और छात्रावास के लिए ₹225 प्रति वर्ग मीटर की दर पर 4000 वर्ग मीटर भूमि आवंटित की गई थी.

-निर्धारित अवधि में निर्माण पूरा नहीं किया गया है. 

रियायती दर पर संस्थाओं को भूमि आवंटन के प्रकरणों की पड़ताल कराने के पीछे नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की मंशा स्पष्ट है. वे चाहते हैं कि जिस उद्देश्य के लिए भूमि आवंटित की गई है. वह उद्देश्य हर हाल में पूरा हो ताकि समाज के गरीब व जरूरतमंद तबके को इसका फायदा मिल सके.

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