कांग्रेस के 8 नए चेहरों और भाजपा के नो पुराने चेहरों को जीत का सेहरा बंधने की उम्मीद

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/09 07:57

जोधपुर। हर हाल में अपनी अपनी पार्टी की सरकार बनाने के लिए प्रत्याशियों का चयन कांग्रेस और भाजपा ने बहुत ही सोच समझ कर किया था यही वजह है कि जोधपुर की 10 सीटों पर भाजपा ने जहां 9 पुराने चेहरों पर विश्वास किया। वहीं कांग्रेस ने 8 नए चेहरे उतारे अब दोनों पार्टियों के नए पुराने चेहरों को इस बार के चुनाव से काफी उम्मीद है । जीतते हैं तो आगे सुनहरा भविष्य है और हार जाते हैं तो आगे के लिए टिकट पाने की संभावनाएं खत्म होती नजर आएंगी।

राजस्थान की राजनीति के गढ़ समझे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला है यह एक अलग बात है कि भाजपा ने अपने 9 पुराने चेहरों को पुनः चुनाव मैदान में उतारा था तो वहीं कांग्रेस ने 8 नए चेहरे चुनाव मैदान में उतारे थे ऐसे में दोनों की नैया पार लगाने के लिए भाजपा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से लेकर निचले स्तर तक के कार्यकर्ता हरसंभव कोशिश भी की। 

राजनीति के जादूगर कहे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जहां से प्रतिनिधित्व करते हैं वहां इस बार पुराने के रूप में सिर्फ सरदारपुरा से अशोक गहलोत और बिलाडा से हीरालाल मेघवाल को ही उम्मीदवार बनाया गया बाकी शेष 8 सीटों पर नए प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे गए, जोधपुर शहर से मनीषा सूरसागर से डॉ अयूब,लूनी से महेंद्र विश्नोई,शेरगढ़ से मीना कँवर,फलोदी से महेश व्यास लोहावट से किसनाराम विश्नोई,भोपालगढ़ से  भँवर बलाई व ओसिया से दिव्या मदेरणा को चुनाव लड़ाया गया। 

इसी तरह भारतीय जनता पार्टी की बात करें तो सिर्फ एक अतुल भंसाली ऐसे हैं जिन्हें शहर से नए प्रत्याशी के रूप में टिकट दिया गया बाकी सभी 9 सीटों पर पुरानी चेहरों पर भाजपा दांव खेला,सूरसागर से सूर्यकांता व्यास,सरदार पुरा से शंभू सिंह खेतासरओसिया से भैराराम सियोल, बिलाड़ा से अर्जुनलाल गर्ग, भोपालगढ़ से कमसा मेघवाल,शेरगढ़ बाबू सिंह राठौड़, लूनी से जोगाराम पटेल,फलोदी से पब्बाराम बिश्नोई व लोहावट से गजेंद्र सिंह खींवसर को चुनाव मैदान में  उतारा गया था। अब भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को अपनी अपनी जीत का भरोसा तो पूरा है मगर ईवीएम की मशीनों में बंद भाग्य का ताला चुनाव परिणाम आने पर ही खुलेंगे तब पता लगेगा कि किस को शिकस्त मिली है और किसके सर पर जीत का सेहरा बंधा है। 

कुल मिलाकर इस वक्त भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों की धड़कने ऊपर नीचे हो रही है रातों की नींद उड़ी हुई है बस अपने अपने इष्ट देवताओं को याद करके यही प्रार्थना कर रहे हैं  हे प्रभु जीत दिला दे।अब देखना यह है कि मतदाताओं ने किसे चुना है।वैसे भी अब ज्यादा समय 11 दिसंबर में शेष नहीं है चुनाव परिणाम सामने आएंगे तभी यह भी साफ हो जाएगा कि जनता मिथक तोड़ने का काम करती है या फिर एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की परंपरा का निर्वहन करती है। राजीव गौड़ न्यूज फर्स्ट इंडिया जोधपुर

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