यूपी में 'माया के जाल' में फंसा कांग्रेस विधायक

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/16 02:01

नई दिल्ली। लोकसभा चुनावों से पहले उत्तरप्रदेश में कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। हाल ही में गाजियाबाद से विधायक अमरपाल शर्मा ने कांग्रेस छोड़ बीएसपी का दामन थाम लिया है। सपा-बसपा महागठबंधन के बाद शर्मा को कांग्रेस में अपनी नैया डूबती दिखाई दे रही है। हालांकि, गाजियाबाद सीट से बीएसपी के सुरेश बंसल की दावेदारी को लेकर सुर्खियां तेज है ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है क्या अमरपाल को इस सीट से टिकट मिल पाएगा? 

बतादें, अमरपाल शर्मा 2012 के विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद की साहिबाबाद विधानसभा सीट से भाजपा के सुनील शर्मा को हराकर बसपा के टिकट पर विधायक का चुनाव जीते थे। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले बसपा ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पार्टी से बाहर निकाल दिया था। उस समय अमरपाल शर्मा ने बसपा सुप्रीमो मायावती पर टिकट के बदले 5 करोड़ रुपए मांगने का आरोप लगाया था। 

ख़ैर, बसपा में शामिल होते समय अमरपाल शर्मा ने कहा कि उन्होंने मायावती पर कोई आरोप नहीं लगाया। 2017 के विधानसभा चुनाव में अमरपाल शर्मा कांग्रेस के टिकट पर साहिबाबाद से चुनाव लड़े लेकिन हार गए। अमरपाल शर्मा पर गाजियाबाद के खोड़ा में भाजपा नेता गजेंद्र भाटी उर्फ गज्जी की हत्या का भी आरोप है। बसपा में शामिल होते हुए अमरपाल शर्मा ने कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 80 लोकसभा की सीटें हैं जिसमें सपा बसपा गठबंधन में दोनों पार्टियां 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी वहीं दो सीटों पर गठबंधन की दो सहयोगी पार्टियां लड़ेगी वहीं अमेठी और रायबरेली की सीट गठबंधन ने कांग्रेस के लिए छोड़ दी हैं।  

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