अच्छे दिन 2014 में लाने थे, अब 2019 में भय के दिन लाए- मानवेंद्र सिंह

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/04/02 10:59

जैसलमेर। बाड़मेर-जैसलमेर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 के आम चुनाव में उनके पिता पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह ने स्वाभिमान की जो लड़ाई लड़ी थी। उनकी झलक इस चुनाव में भी कायम है। स्वाभिमान समर्थकों मैं वही जो आज भी नजर आता है हालांकि उन्होंने कहा कि वे इस बार कांग्रेस की ओर से प्रत्याशी बनाए गए हैं तथा उनका इरादा इस स्वाभिमान की लड़ाई बनाने का नहीं है। फिर भी इस शब्द के पीछे जनता की ताकत है। प्रत्याशी बनाए जाने के बाद पहली बार जैसलमेर आए मानवेंद्र सिंह ने कहा कि आज की भाजपा पूरी तरह से बदल गई है और अब वह पहचान में नहीं आती है।   

मानवेंद्र सिंह ने कहा कि अच्छे दिन 2014 में लाने थे अब 2019 में भय के आधार पर चुनाव लड़ा जा रहा है। लोगों को भयभीत करके कहा जा रहा है की अगर हम नहीं होते तो क्या होता सर्जिकल स्ट्राइक तथा अलग-अलग घोषणाओं के माध्यम से अच्छे दिन के बारे में बताया जा रहा है। इसमें कितनी सच्चाई है यह सभी लोग जानते हैं। अच्छे दिन नहीं आए तो भय के आधार पर चुनाव लड़ा जा रहा है। 

हर दिन एक नया दिन है, हर चुनौती एक नई चुनौती है
पिछले लोकसभा चुनाव में बाड़मेर जैसलमेर सीट पर अटल के हनुमान कहे जाने वाले जसवंत सिंह को टिकट नहीं मिलने पर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि कि जो यह घटनाक्रम हुआ यह सभी बीती हुई बातें हैं। कहीं ऐसी बातें हैं जो भूली नहीं जाती है और मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं कि मैं इन बातों को भूल गया हूं। परंतु हर दिन एक नया दिन है, हर चुनौती एक नई चुनौती है, जो हर एक नई चुनौती को एक नई दिशा में देख कर चुनाव लड़ा जाएगा। अब पीछे वाली बातें पीछे हैं और पीछे रहनी चाहिए। मानवेंद्र सिंह ने राज्य मंत्री हरीश चौधरी के बीच टिकट दावेदारी बोले की दावेदारी करना सबका अधिकार है। जिनका उनका अधिकार है तो उतना मेरा भी अधिकार है , इसमें कोई गलत बात नहीं है।  चयन पार्टी नेता को करता है स्थानीय कारण होते हैं कोई राजनीतिक कारण होते हैं।  कांग्रेस पार्टी ने बहुत सोच समझकर चयन किया है। अब कांग्रेस सभी एक सूत्र होकर अच्छा परिणाम देगी। 

भाजपा का नेतृत्व भारत की संस्कृति से परे
वही लोकसभा कांग्रेस प्रत्याशी मानवेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा ने हमेशा बुर्जुगों को को दरकिनार किया है। जो यह हालत बुर्जुगों के साथ हुई है संस्थापक नेताओं के साथ हुई है। यह देश भर में संकेत है कि भाजपा का नेतृत्व भारत की परंपरा भारत की संस्कृति भारत की संस्कार भारत के रीति-रिवाज से परे हैं। भारतीय संस्कृति और रिवाज से भाजपा को कोई लेना देना नहीं है।  उनको स्वयं से लेना देना है। 

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