अनुच्छेद 370 पर दो हिस्सों में बंटी कांग्रेस, विरोध के पक्ष और विपक्ष में बहस

अनुच्छेद 370 पर दो हिस्सों में बंटी कांग्रेस, विरोध के पक्ष और विपक्ष में बहस

नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और 35A हटाने और राज्य का पुनर्गठन के मुद्दे पर कांग्रेस दो गुटों में बंटती नजर आ रही है. कुछ नेता पार्टी के विरोध के रुख से सहमत हैं तो कुछ इसके विरोध से राजनीतिक नुकसान की आशंका जता रहे हैं. वहीं कुछ नेता विरोध को सही बता रहें है. हालांकि कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने इस पर चुप्पी साधे रखना ही उचित समझा है. 

पार्टी के कई नेता लाइन से हटकर दे रहे बयान: 
कांग्रेस भले ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और राज्य के पुनर्गठन बिल का विरोध कर रही हो लेकिन पार्टी के कई नेता पार्टी लाइन से हटकर बयान दे रहे हैं. इनमें पार्टी के कई युवा नेता भी शामिल हैं. कांग्रेस के पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा ने नरेंद्र मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन किया है. 

21वीं सदी में अनुच्छेद-370 का कोई औचित्य नहीं: 
हुड्डा ने ट्वीट कर लिखा है कि मेरा पहले से विचार रहा है कि 21वीं सदी में अनुच्छेद-370 का कोई औचित्य नहीं है. इसे हटाना चाहिए. यह देश की अखंडता और अभिन्न अंग जम्मू-कश्मीर की जनता के हित में है. लेकिन यह मौजूदा सरकार की यह जिम्मेदारी है कि इसका क्रियान्वयन शांति और विश्वास के वातावरण में हो. 

इतिहास की एक गलती को सुधारा गया:  
दूसरी ओर कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने भी अनुच्छेद 370 हटाए जाने का स्वागत किया. उन्होंने कहा, मेरे राजनीतिक गुरु राम मनोहर लोहिया हमेशा से इस आर्टिकल के खिलाफ थे. इतिहास की एक गलती को आज सुधारा गया है. इसके अलावा मिलिंद देवड़ा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अनुच्छेद 370 को उदार बनाम रूढ़िवादी बहस में तब्दील कर दिया गया. पार्टियों को अपनी विचारधारा से अलग हटकर इस पर बहस करनी चाहिए कि भारत की संप्रभुता और संघवाद, जम्मू-कश्मीर में शांति, कश्मीरी युवाओं को नौकरी और कश्मीरी पंडितों के न्याय के लिए क्या सही है. 
 

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