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चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में 20 साल बाद कांग्रेस को मिला बड़ा बहुमत, हुई बल्ले-बल्ले

चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में 20 साल बाद कांग्रेस को मिला बड़ा बहुमत, हुई बल्ले-बल्ले

रावतभाटा(चित्तौड़गढ़): चित्तौड़गढ़ के रावतभाटा में इस बार राजेंद्र विधुड़ी की बल्ले-बल्ले हो गई. यहां 20 साल बाद कांग्रेस को बहुमत मिला है. कांग्रेस को इस बार यहां  29 वार्डों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की है तो वहीं भाजपा सिर्फ 9 वार्डों में सिमट कर रह गई. जबकि दो वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है. 

शनिवार को हुआ था मतदान: 
उल्लेखनीय है कि राज्य में तीन नगर निगमों, 18 नगर परिषद और 28 नगरपालिकाओं यानी कुल 49 निकायों में सदस्य पार्षद पद के लिए शनिवार को मतदान हुआ था. चुनाव में कुल 71.53 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. इन 49 निकायों में कुल 2,105 वार्डों में चुनाव होना था जिनमें से 14 वार्डों में पार्षद निर्विरोध चुने जा चुके हैं. बाकी 2,081 वार्ड में 7,942 उम्मीदवार अपना चुनावी भाग्य आजमा रहे हैं जिनमें 2,832 महिलाएं और 5,109 पुरुष प्रत्याशी शामिल हैं. 

26 नवंबर को अध्यक्ष और 27 को होगा उपाध्यक्ष का चुनाव: 
तय कार्यक्रम के अनुसार नगर निकायों में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव 26 नवंबर और उपाध्यक्ष पद के लिए 27 नवंबर को करवाया जाएगा.इस बीच कांग्रेस और भाजपा ने प्रमुख निकायों में अपने-अपने वार्ड पार्षद प्रत्याशियों को इकट्ठा कर किसी होटल, रेसार्ट या अन्य स्थान पर भेज दिया है. इसी तरह कई जगह निर्दलीय प्रत्याशियों की बैठकें भी हो रही हैं ताकि किसी भी तरह का समीकरण बनने पर साथ मिलकर एक राय तय की जा सके.

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किसान अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध, 24 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में होगी प्रेसवार्ता

जयपुर: किसान अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध सामने आ रहा है. 24 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में प्रेसवार्ता होगी. प्रदेश प्रभारी अजय माकन ,पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा मौजूद रहेंगे. 28 सितंबर को पीसीसी से राजभवन तक पैदल मार्च तक पैदल मार्च बताया जा रहा. हालांकि धारा 144 के मद्देनजर कार्यक्रम में बदलाव हो सकता है. 

2 अक्टूबर को मनाएगी प्रदेश कांग्रेस किसान मजदूर दिवस:
पैदल मार्च के बाद राज्यपाल को ज्ञापन दिया जाएगा. 2 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस किसान मजदूर दिवस मनाएगी. इसी दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की है जयंती.  2 अक्टूबर को ही विस क्षेत्रों पर कृषि विधेयकों के खिलाफ धरने प्रदर्शन होंगे. संभव है 10 अक्टूबर को जयपुर सहित अन्य जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस किसान सम्मेलन आयोजित करेेंगे. सोमवार को भी कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस ने  प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर्स को ज्ञापन सौंपे थे,सोशल डिस्टेंसिंग सहित गाइड लाइन की पालना होगी. 

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कृषि अध्यादेशों को लेकर विरोध प्रदर्शन:
कृषि अध्यादेशों को लेकर एक पखवाड़े तक विरोध प्रदर्शन के निर्णय के पीछे किसान वोट बैंक है. प्रदेश की बात करें तो यहां वर्तमान में चल रहे ग्राम पंचायतों के साथ ही आगामी समय में पंचायत समितियों और जिला परिषदों के चुनाव भी हैं ऐसे में इस मुद्दों के जरिए कांग्रेस किसान वर्ग की सहानुभूति बंटोरकर उन्हें अपने पाले में लाना चाहती है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

सदन की कार्यवाही से विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल भी राज्यसभा से पास

सदन की कार्यवाही से विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल भी राज्यसभा से पास

नई दिल्ली: विपक्ष के बहिष्कार के बीच कृषि से जुड़ा तीसरा बिल आवश्यक वस्तु विधेयक, 2020 भी राज्यसभा से पास हो गया है. कृषि से जुड़े दो बिल पहले ही राज्यसभा से पास हो चुके हैं. लोकसभा ने 15 सितंबर को आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी थी.

इस बिल में खाद्य पदार्थों को नियंत्रण मुक्त करने का प्रावधान:
इस बिल में खाद्य पदार्थों जैसे अनाज, दालें और प्याज को नियंत्रण मुक्त करने का प्रावधान है. बिल पास होने के बाद अब अनाज, दलहन, खाद्य तेल, आलू-प्याज आवश्यक वस्तु नहीं होंगे. उत्पादन, स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन पर सरकारी नियंत्रण खत्म होगा. फूड सप्लाई चेन के आधुनिकीकरण में मदद मिलेगी. उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी. सब्जियों की कीमतें दोगुनी होने पर स्टॉक लिमिट लागू होगी.

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सरकार बता रही कृषि क्षेत्र की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: 
इससे पहले 20 सितंबर को कृषि से जुड़े दो महत्वपूर्ण विधेयकों को राज्यसभा ने विपक्षी सदस्यों के भारी हंगामे के बीच ध्वनिमत से अपनी मंजूरी दे दी थी. सरकार द्वारा इन दोनों विधेयकों को देश में कृषि क्षेत्र से जुड़े अबतक के सबसे बड़े सुधार की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है.

राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला:  
वहीं इससे पहले मौजूदा मानसून सत्र में कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किए जाने के बाद सभी आठ निलंबित सांसदों ने अपना धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया है. विपक्षी दलों के राज्यसभा सांसदों ने राज्यसभा का वॉकआउट किया है. इसमें कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), वामदल, आरजेडी, टीआरएस और बीएसपी ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया है.

टोंक से तीन बार विधायक और पूर्व मंत्री रही ज़किया इनाम का निधन

टोंक से तीन बार विधायक और पूर्व मंत्री रही ज़किया इनाम का निधन

जयपुर: टोंक से तीन बार विधायक और पूर्व मंत्री रही ज़किया इनाम नहीं रही, देर रात जयपुर में उनका निधन हो गया. पिछले कई दिनों से वे बीमार चल रही थी. कल शाम को ही उनको आरयूएचएस में भर्ती कराया था. देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली. उनकी मौत की खबर के बाद टोंक कांग्रेसियों ने शोक व्यक्त किया है. कांग्रेस पार्टी से टोंक से ज़किया इनाम 3 बार विधायक रही. 1985-1989 के बीच चिकित्सा मंत्री रही. उन्होने महिला और बाल विकास मंत्री समेत विभिन्न मंत्रालय संभाले. 

1985 में पहली बार कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में भाग्य आजमाया:
साल 1985 में पहली बार कांग्रेस उम्मीदवार के रुप में भाग्य आजमाया तथा विधायक चुनने के बाद चिकित्सा मंत्री भी बनी थी. 1993 के चुनाव में उनको टिकट नहीं मिला. 1985, 1990, 1998, 2003, 2008 एवं 2013 में वे कांग्रेस उम्मीदवार रहीं. 1998, 2008 में विधायक फिर से विधायक चुनी. 2013 के चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा तथा उनकी जमानत भी नहीं बच पाई. जिले में अब तक जकिया ही ऐसी महिला उम्मीदवार थी, जो तीन बार विधायक बनी.

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कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर:  
उनके निधन की खबर मिलते ही टोंक और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर दौड़ गई. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा, पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत प्रमुख नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया.   

राज्यसभा के सभी आठ निलंबित सांसदों का धरना खत्म, विपक्ष ने किया पूरे मानसून सत्र के बहिष्कार का फैसला

राज्यसभा के सभी आठ निलंबित सांसदों का धरना खत्म, विपक्ष ने किया पूरे मानसून सत्र के बहिष्कार का फैसला

नई दिल्ली: मौजूदा मानसून सत्र में कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा राज्यसभा की कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला किए जाने के बाद सभी आठ निलंबित सांसदों ने अपना धरना प्रदर्शन खत्म कर दिया है. विपक्षी दलों के राज्यसभा सांसदों ने राज्यसभा का वॉकआउट किया है. इसमें कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), डीएमके, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), वामदल, आरजेडी, टीआरएस और बीएसपी ने भी कार्यवाही का बहिष्कार किया है.

कार्यवाही का बहिष्कार करने के बाद खत्म किया धरना: 
कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य और निलंबित सांसदों में शामिल राजीव सातव ने कहा कि विपक्ष इस सत्र में उच्च सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेगा. ऐसे में हमने धरना खत्म कर दिया है. अब हम सड़क पर आंदोलन करेंगे. इससे पहले, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि जब तक उच्च सदन के आठ सदस्यों का, मानसून सत्र की शेष अवधि से निलंबन वापस नहीं लिया जाता तब तक विपक्ष कार्यवाही का बहिष्कार करेगा.

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सांसदों को निलंबित करने पर सरकार पर साधा था निशाना:
दरअसल, विपक्षी दलों ने रविवार को राज्यसभा में हुए हंगामे के चलते सोमवार को आठ विपक्षी सदस्यों को निलंबित किए जाने को लेकर सरकार पर निशाना साधा था. इस कदम के विरोध में वे संसद भवन परिसर में ‘‘अनिश्चितकालीन’’ धरने पर बैठ गए थे. बता दें कि सभापति वेंकैया नायडू ने तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन, कांग्रेस के राजीव सातव, रिपुन बोरा, नासिर हुसैन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, के.के. रागेश और माकपा के ई. करीम को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया था. इसके विरोध में सभी सांसद, गांधी प्रतिमा के पास धरने पर थे और पूरी रात संसद परिसर में गुजार दी.


 

किसान अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध, तैयार की खास रणनीति

जयपुर: केंद्र सरकार के कृषि अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस का चौतरफा विरोध जारी है. अब 24 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्याल में प्रेसवार्ता रखी गई है. इस दौरान प्रदेश प्रभारी अजय माकन के साथ PCC चीफ गोविंद डोटासरा मौजूद रहेंगे. 

28 सितंबर को PCC से राजभवन तक पैदल मार्च:  
इसके साथ ही कांग्रेस 28 सितंबर को PCC से राजभवन तक पैदल मार्च भी करेगी. हालांकि धारा-144 के मद्देनजर कार्यक्रम में बदलाव भी हो सकता है. पैदल मार्च के बाद राज्यपाल को ज्ञापन दिया जाएगा. 

2 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस मनाएगी 'किसान मजदूर दिवस':
वहीं, 2 अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस किसान मजदूर दिवस मनाएगी. 2 अक्टूबर को विधानसभा क्षेत्रों और जिला मुख्यालयों पर कृषि विधेयकों के खिलाफ धरने प्रदर्शन भी होंगे. 10 अक्टूबर को जयपुर सहित अन्य जिला मुख्यालयों पर कांग्रेस किसान सम्मेलन आयोजित करेगी. 

सोमवार को भी जिला कलेक्टर्स को ज्ञापन सौंपे थे:
गौरतलब है कि सोमवार को भी कृषि विधेयकों के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदर्शन कर जिला कलेक्टर्स को ज्ञापन सौंपे थे. कृषि से जुड़े वर्गों की सहानुभूति बंटोरने के लिए कांग्रेस एक पखवाड़े के कार्यक्रम तय करते हुए सभी राज्य ईकाइयों को विभिन्न टास्क दिए गए हैं.
 

Rajasthan Panchayat Election: पहले चरण में 13 सरपंच और 4468 पंच चुने गये प्रत्याशी निर्विरोध

Rajasthan Panchayat Election: पहले चरण में 13 सरपंच और 4468 पंच चुने गये प्रत्याशी निर्विरोध

जयपुर: पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव के पहले चरण में नाम वापसी की अवधि पूरी होने के बाद 1002 ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए 5388 और पंच पदों के लिए 11890 उम्मीदवार चुनाव मैदान में बच गए हैं. पहले चरण में 13 सरपंच और 4468 पंच प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए हैं. पहले चरण के पंच सरपंच चुनाव में नाम वापसी के बाद अब तस्वीर साफ हो गई है. इसके तहत...

- पहले चरण के पंच सरपंच चुनाव में राज्य की 1002 ग्राम पंचायतों में 9042 प्रत्याशियों ने कुल 9066 नामांकन पत्र दाखिल किए. जांच के बाद 8875 नामांकन पत्र वैध पाए गए हैं.   

- इनमें से नाम वापसी के आखिरी दिन 3474 उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया.  

- अब राज्य में पंचायत चुनाव-2020 में सरपंच पद के लिए अंतिम रूप से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की संख्या 5388 रह गई है.  

- इसी तरह 1002 ग्राम पंचायतों के 9688 वार्डों के लिए 21542 उम्मीदवारों ने 21557 नामांकन पत्र दाखिल किए गए. इनमें से 20961 नामांकन पत्र वैध पाए गए.  

- 4571 उम्मीदवारों ने अपने नाम वापस लिए, जबकि 4468 पंचों को निर्विरोध चुन लिया गया. उन्होंने बताया कि नाम वापसी के बाद अब 11890 उम्मीदवार वार्ड पंच के लिए चुनाव मैदान में अपनी किस्मत आजमाएंगे. 

आगे का कार्यक्रम रहेगा इस तरह: 

- इन ग्राम पंचायतों पर चुनाव कराने के लिए 27 सितंबर तक मतदान दल निर्वाचन स्थल पर पहुंच जाएंगे.  

- इन पंचायतों पर 28 सितंबर सोमवार सुबह 7.30 से सायं 5.30 बजे तक मतदान होगा.  

- मतदान समाप्ति के बाद इन पंचायत मुख्यालयों पर मतगणना करवाई जाएगी.  

- 29 सितंबर को उपसरपंच का चुनाव होगा.  

- गौरतलब है कि पहले चरण में 50 पंचायत समितियों की 1002 ग्राम पंचायतों के 4679 मतदान केंद्रों पर मतदान कराया जाएगा.  
इन पंचायतों में कुल 33 लाख 40 हजार 35 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे, जिनमें से 17 लाख 48 हजार 670 पुरुष, 15 लाख 91 हजार 347 महिलाएं और 18 अन्य मतदाता शामिल हैं.  

राज्य निर्वाचन आयुक्त पी एस मेहरा ने प्रदेश के समस्त मतदाताओं से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण से बचाव संबंधी सभी प्रोटोकॉल की पालना के साथ अधिक से अधिक संख्या में मतदान करने की अपील की है.  
 

धरना दे रहे सांसदों को चाय पिलाने पहुंचे उपसभापति हरिवंश की पीएम मोदी ने की तारीफ, कहा- इससे खूबसूरत संदेश और क्या हो सकता है

धरना दे रहे सांसदों को चाय पिलाने पहुंचे उपसभापति हरिवंश की पीएम मोदी ने की तारीफ, कहा- इससे खूबसूरत संदेश और क्या हो सकता है

नई दिल्ली: राज्यसभा से कृषि बिल पर चर्चा के दौरान हंगामा करने पर निलंबित हो चुके आठ सांसदों से आज सुबह उपसभापति हरिवंश मुलाकात करने पहुंचे. इस दौरान हरिवंश सभी सांसदों के लिए चाय लेकर पहुंचे थे. ऐसे में अब पीएम मोदी ने भी उनके इस व्यवहार की तारीफ की है. 

बिहार सदियों से देश को लोकतंत्र की ताकत का एहसास कराते आया:
प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि जिन्होंने कुछ दिन पहले उनका अपमान किया, अब हरिवंश जी उनके लिए ही चाय लेकर पहुंचे हैं. पीएम मोदी ने मंगलवार सुबह ट्वीट कर लिखा कि बिहार सदियों से देश को लोकतंत्र की ताकत का एहसास कराते आया है. आज सुबह राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश जी ने जिस तरह का व्यवहार किया है, वह लोकतंत्र के चाहने वालों को गर्व महसूस कराएगा. 

यह हरिवंश जी की उदारता और महानता को दर्शाता है:
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि हर किसी ने देखा कि दो दिन पहले लोकतंत्र के मंदिर में उनको किस प्रकार अपमानित किया गया, उन पर हमला किया गया और फिर वही लोग उनके खिलाफ धरने पर भी बैठ गए. लेकिन आपको आनंद होगा कि आज हरिवंश जी ने उन्हीं लोगों को सवेरे-सवेरे अपने घर से चाय ले जाकर पिलाई. यह हरिवंश जी की उदारता और महानता को दर्शाता है. लोकतंत्र के लिए इससे खूबसूरत संदेश और क्या हो सकता है. मैं उन्हें इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं.  

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कांग्रेस ने किया सदन के मानसून सत्र का 'बायकॉट': 
वहीं कांग्रेस ने सदन के मानसू सत्र का 'बायकॉट' कर दिया है. कांग्रेस ने MSP की मांग नहीं मानने पर संसद की कार्यवाही का बहिष्कार किया है. कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सांसदों का निलंबन वापस हो, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश पर MSP की गारंटी मिले. ऐसे में मांगें माने जाने तक हम सदन से बायकॉट करेंगे.

कृषि बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने राज्यसभा में हंगामा किया था:  
बता दें कि कृषि बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने राज्यसभा में हंगामा किया था. इस दौरान कई सांसदों ने उपसभापति की टेबल पर कागज फाड़े थे, माइक तोड़ दिया था. साथ ही उपसभापति पर पक्षपात करने का आरोप लगाया था, जिसके बाद एक अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया था. इसी पर एक्शन लेते हुए राज्यसभा चेयरमैन वेंकैया नायडू ने विपक्ष के आठ सांसदों को निलंबित कर दिया था. जिसके बाद सभी सांसद सोमवार शाम से ही संसद परिसर में धरने पर बैठे हैं. सभी सांसद पूरी रात संसद परिसर के बाहर ही बैठे रहे.

राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में हस्तक्षेप करने से किया इंकार, लक्ष्मणगढ पंचायत समिति के चुनाव पर रोक लगाने की याचिका खारिज

राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव में हस्तक्षेप करने से किया इंकार, लक्ष्मणगढ पंचायत समिति के चुनाव पर रोक लगाने की याचिका खारिज

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने अधिसूचना जारी होने और एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद चुनाव में किसी प्रकार से हस्तक्षेप से इंकार करते हुए अलवर की लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के चुनाव पर रोक लगाने को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है. जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की एकलपीठ ने ये आदेश भरतसिंह की ओर से दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए दिये है.

दोबारा आरक्षण सूची जारी किये बिना ही चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया:
भरतसिंह की ओर से एडवोकेट प्रकाश ठकुरिया ने याचिका दायर कर अदालत को बताया कि 3 फरवरी 2020 को लक्ष्मणगढ पंचायत समिति के लिए जारी कि गयी कुछ पंचायतों को नगरपालिका लक्ष्मणगढ़ में शामिल कर लिया गया. ऐसे में लक्ष्मणगढ़ में आने वाली पंचायतों की दोबारा आरक्षण सूची जारी किये बिना ही चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है. 

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अधिसूचना जारी होने के बाद उसमें हस्तक्षेप किया जाना विधिविरूद्ध: 
याचिका में लक्ष्मणगढ़ पंचायत समिति के चुनाव पर रोक लगाने और नए सिरे से दोबारा आरक्षण सूची तैयार करने के बाद ही चुनाव कराने की गुहार लगायी गयी. लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार चुनाव के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद उसमें हस्तक्षेप किया जाना विधिविरूद्ध है. इस मामले में भी अधिसूचना जारी होने और 28 सितंबर को चुनाव तय होने के चलते अदालत ने याचिका को खारिज करने के आदेश दिये है.