VIDEO: आखिर कहां जाकर थमेगा कांग्रेस की अदरुनी कलह का दौर और कब सुधरेंगे हालात !

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/11 06:10

जयपुर: देश में अब गांधी युग का सियासी समापन नजर आ रहा है. दुनिया की सबसे पुरानी पार्टियों में गिनी जाने वाली कांग्रेस पार्टी आज अपने ऐतिहासिक पराभव के दौर से गुजर रही है. जहां एक बार पूरे देश में विपक्षी पार्टी के नाममात्र सांसद ही संसद पहुंचते थे, आज हालात यह है कि लोकसभा में विपक्षी दल के नाते कांग्रेस अपना नेता प्रतिपक्ष नहीं बना पा रही है. संख्या बल के मौजूदा दौर में कांग्रेस अपने विरोधी नरेन्द्र मोदी से बुरी तरह पिछड़ चुकी है. पराजय के दौर को झेल रही कांग्रेस को आम चुनावों में बीजेपी से हारना पड़ा और अब चुनावों के बाद कांग्रेस अपनों से ही जद्दोजहद कर रही है. राहुल गांधी मौन साधे है, वहीं नेताओं के बीच शह और मात का खेल तक शुरु हो चुका है. आखिर कहां जाकर थमेगा कांग्रेस की यह अदरुनी कलह का दौर और कब सुधरेंगे हालात ! खास रिपोर्ट:

राहुल की चुुप्पी के बाद राज्यों में कांग्रेस के अंदर उपजे कलह के बोल:
लोकसभा चुनावों से कुछ ही महिनों पहले हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों में कांग्रेस को अप्रत्याशित सफलता मिली. राजस्थान में गहलोत सरकार, मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार और छत्तीसगड़ में बघेल सरकार का निर्माण हुआ. जोश से लबरेज कांग्रेस के अंदर उस वक्त और ताकत का संचार हुआ, जब प्रियंका गांधी वाड्रा की विधिवत एंट्री पार्टी में हो गई और उन्होंने यूपी का कार्यभार संभाला लिया. राहुल और प्रियंका की जोड़ी देखकर कांग्रेसियों के हौंसले सातवें आसमान पर थे. उम्मीदें इतनी थी कि मोदी फेक्टर से टक्कर ले सके. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने तूफानी दौरे करके मोदी और शाह को चुनौती देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. राहुल ने अमेठी के साथ ही दक्षिण भारत के वायनाड़ से चुनाव लड़ने का निश्चय भी कर लिया, लेकिन तमाम उम्मीदें और सपनों को लोकसभा चुनाव के परिणामों ने धराशायी कर दिया. मोदी की आंधी ने अमेठी को भी नहीं छोड़ा और कांग्रेस के सत्ता वाले राज्यों में भी चारों खाने चित्त हो गई. बस यहीं से शुरु हो गया कांग्रेस में अंदर का द्वंद. इस्तीफे की पेशकश करके हाईकमान ने चुप्पी क्या साधी. भोपाल से लेकर जयपुर तक सियासत उफान पर दिखने लगी, पंजाब भी पीछे नहीं रहा. चारों ओर से बुरी खबरें आने लगी. तेलंगाना में कांग्रेस के 12 विधायकों ने साथ छोड़ दिया और टीआरएस में शामिल हो गये. 

मौन और कलह साथ-साथ !
तेलंगाना:

—तेलंगाना में कांग्रेस ने झटका लगा
—लोकसभा की पराजय ने यहां पार्टी को तोड़ दिया
—टीआरएस की जोड-तोड़ की गणित के कारण कांग्रेसी विधायक छिटक गये
—पहले ही आंध्र और तेलंगाना में कांग्रेस के लिये लोकसभा चुनाव परिणाम सुखद नहीं रहे

कर्नाटक:
—कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस सरकार के बीच सास-बहू जैसे रिश्ते है
—कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी और कांग्रेस के सिद्धारमेया के बीच ठनी रहती है
—डी के शिवकुमार यहां लगातार गठबंधन की एकता में ही जुटे रहते है
—अपनी पार्टी के मुख्यमंत्रियों से संवाद नहीं कर रहे राहुल गांधी ने कुमारस्वामी से जरुर बात की

पंजाब:
—कैप्टेन अमरिंदर सिंह ने यहां कांग्रेस की लाज रखी
—पूरे देश में यहीं एकमात्र कांग्रेस सत्ताधारी राज्य जहां अमरिंदर ने कप्तान की भूमिका निभाई
—लेकिन कप्तान और क्रिकेटर सिद्धू के बीच जंग खुलेआम हो गई
—आलाकमान की परवाह किये बिना अमरिंदर सिंह ने सिद्धू के पर कतर दिये
—बौखलाये सिद्धू ने दिल्ली पहुंचकर आलाकमान को वेदना बताई
—अहमद पटेल के जरिये राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सिद्धू की वेदना को समझा
—हालांकि अमरिंदर सिंह अड़े थे सिद्धू को अपने मंत्रीमंडल से निकालना
—लेकिन आलाकमान की समझाइश के बाद उन्होंने केवल सिद्धू का महकमा ही बदला
—यह अलग बात है अपने राज्यों के मुख्यमंत्री से नहीं मिल रहे राहुल गांधी ने सिद्धू से मुलाकात कर ली

मध्यप्रदेश:
—मध्यप्रदेश में कांग्रेस को एक अदद सीट मिली
—मुख्यमंत्री कमनाथ के पुत्र नकुल ही चुनाव जीते
—ज्योतिरादित्य सिंधिया खुद चुनाव हार गये
—ज्योरादित्य सिंधिया समर्थकों ने पराजय के बाद मोर्चा खोल दिया
—सिंधिया समर्थकों ने मुख्यमंत्री बदलने की मुहिम चला रखी है
—एमपी में विराट पराजय के लिये कमलनाथ को दोषी ठहराने में जुटे है
—उधर विरोधियों के तेवरों से बेपरवाह कमलनाथ ने दिल्ली जाकर पीएम नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर डाली
—कमलनाथ ने जता दिया कि एमपी के विकास के लिये वे प्रतिबद्ध
—हालांकि बेटे के बहाने राहुल गांधी के समक्ष पूरी बात रखना चाहते थे कमलनाथ

राजस्थान:
—राहुल गांधी को राजस्थान से काफी आशाएं थी
—लेकिन यहां भी मोदी लहर ने 25-0 को स्कोर लाकर उम्मीदें धूमिल कर दी
—पार्टी हारते ही कांग्रेसी नेता बेलगाम हो गये और सुर बदलने लगे
—सचिन पायलट के समर्थक विधायक ने मुख्यमंत्री बदलने की बात कर दी
—वहीं गहलोत के कट्टर समर्थक एक मंत्री ने इस्तीफा तक सौंप डाला
—असंतोष पूर्ण बयानों पर लगाम लगाने े लिये अविनाश पांडे को मैदान में आना पड़ा
—राज्य के कांग्रेसियों के नाम अनुशासन का खत लिखना पड़ा
—कलह का दौर अभी राजस्थान की कांग्रेस में पूरी तरह थमा नहीं है

हरियाणा:
—हरियाणा में कांग्रेस की कलह पुरानी है
—मौजूदा करारी पराजय से जख्म ताजा हो गये
—हुड़्डा और तंवर समर्थकों के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर जारी है

सीडब्लूसी ने राहुल गांधी को यह अधिकार सौंपे थे कि संगठन में पूरी तरह बदलाव किये जाये. बदलावों की बयार से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी भी अछूती नहीं रहने वाली है. कांग्रेस में एक खेमा चाहता है कि कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री वेणुगोपाल को हटाया जाये. दूसरे खेमे का मानना है कि जिन राज्यों में कांग्रेस की करारी पराजय हुई वहां के प्रभारियों को पद से तत्काल हटा दिया जाये. राजस्थान, हरियाणा, यूपी, बिहार, एमपी, छत्तीसगढ़ समेत कुछ राज्यों में संगठन के अध्यक्ष बदले जाने को लेकर भी चर्चाएं है. आलाकमान शायद बूथवार रिपोर्ट का इंतजार करे फिर निचले स्तर तक संगठनात्मक ढांचे में आमूल चूल परिवर्तन किया जाये, लेकिन यह तभी संभव है जब राहुल गांधी अपने मौन को तोड़े और भविष्य की सियासत का खुलासा करे. 

... संवाददाता नरेश शर्मा के साथ योगेश शर्मा की रिपोर्ट


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