लोकसभा चुनावों से पहले दो धड़ों में बंटी नजर आ रही कांग्रेस

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/03/16 01:45

नागौर। लोकसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही कांग्रेस मिशन 25 को लेकर जुट गई है और अपना प्रचार प्रसार भी शुरू कर दिया। कांग्रेस में अब टिकटों को लेकर भी लगातार दिल्ली में बैठक हो रही है। सूत्रों के अनुसार कई नामो पर अंतिम मुहर लगना बाकी है वही नागौर जिले की बात करे तो नागौर कांग्रेस आज भी अपनी अपनी टिकट की मांग को लेकर दो धड़ों में बंटी हुई नजर आ रही है। 

यह कल नागौर में कांग्रेस के कार्यकर्ता सम्मेलन में भी नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, डिप्टी सीएम सचिन पायलट, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडेय और प्रदेश कांग्रेस के सह काजी निजामुद्दीन जब जोधपुर के पीपाड़ से नागौर पंहुचे तो इससे पहले राज स्कूल के ग्राउंड में बने हेलीपैड पर अगवानी करने पंहुचे कांग्रेसी नेताओं में गुटबाजी साफ दिखाई दी, क्यो की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा और सवाईसिंह चौधरी एक कार में आये और लाडनू विधायक मुकेश भाकर के साथ एक और जाकर मंत्रणा करने लग गए । 

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से लोकसभा का टिकट मांग रही जिला प्रमुख सुनीता चौधरी और उप मुख्य सचेतक महेंद्र चौधरी, डीडवाना विधायक चेतन डूडी, परबतसर विधायक रामनिवास गावड़िया के साथ साथ हरेन्द्र मिर्धा एक और मंत्रणा करते नजर आए जब तक गहलोत उनके बीच नही आये आपस मे मुलाकात और रामा श्यामा भी नही हुआ। हरेन्द्र मिर्धा को विधानसभा चुनाव में टिकट नही दिया गया और उन्हें लोकसभा में टिकट देने की बात कही गई थी। तो दूसरी और बिंदु चोधरी भी कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रबल दावेदार बताई जा रही है। 

ज्योति मिर्धा पांच साल क्षेत्र से गायब रहने के बाद अब चुनाव के वक्त जिले में सक्रिय नजर आ रही है। ज्योति मिर्धा समर्थकों के अनुसार टिकट लगभग तय बताया जा रहा है लेकिन जनता में एक कयास यह भी लगाया जा रहा है कि अगर ज्योति मिर्धा को टिकट नही मिला तो इस बार ज्योति मिर्धा पाळा बदल कर कांग्रेस छोड़ सकती है, लेकिन नागौर के कांग्रेसियों की दूरियां क्या आने वाले चुनाव में कांग्रेस को जीत दिला पाएगी या नही। बहरहाल टिकट अभी तय नही हो पाई अब देखना यह होगा टिकट किसको मिलता है। वही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट ने कल भी मंच से अपने भाषणों में कहा कि नागौर की जनता जिस करवट बैठती है सत्ता उसके हाथों में होती है। 

दूसरी तरह नागौर का इतिहास भी रहा है कि जब कांग्रेस बुरी तरह हार गई थी उस दौरान भी नागौर ने नाथूराम मिर्धा को यहां से जिताकर भेजा था मगर इन दिनों तो मिर्धा खानदान भी खुद अलग अलग धड़ो में बंटा नजर आ रहा है। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि क्या मिर्धा परिवार का जनाधार कम हो गया या जनता मिर्धा परिवार को नकारती जा रही है । कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनाव नाक का चुनाव है। अशोक गहलोत ने मकराना की सभा में मंच से कांग्रेसी नेताओं से अपील करते हुए यह भी कहा था कि सब मतभेद भुलाकर यह चुनाव लड़ना होगा और जिस किसी को भी आलाकमान टिकट देकर भेजे उसको चुनाव जिताकर भेजना है। अब देखना यह दिलचस्प होगा की टुकड़ो में बंटी हुई नागौर कांग्रेस कितना एक होकर चुनाव लड़ती है और जीत का सेहरा किसके माथे पर सजता है। 

...नरपत ज़ोया संवाददाता 1st इंडिया न्यूज नागौर

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