कांग्रेस की कद्दावर नेता शीला दीक्षित का निधन, 15 साल तक रहीं दिल्ली की मुख्यमंत्री

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/20 04:37

नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता शीला दीक्षित का आज नई दिल्ली में निधन हो गया. उनकी सेहत काफी दिनों से नासाज चल रही थी और आज अचानक उनके देहांत की खबर आई. बताया जा रहा है कि उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हुई है. उनका एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में इलाज चल रहा था. कांग्रेस पार्टी के लिए यह काफी बड़ा झटका है, क्योंकि पार्टी में उनके योगदान और समन्वयवादी राजनीति के चलते वे सबके करीब थी.

शीला दीक्षित का राजनीतिक सफर:
शीला दीक्षित साल 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. उनके नेतृत्व में लगातार तीन बार कांग्रेस ने दिल्ली में सरकार बनाई. वह सबसे लंबे समय 15 साल तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. फिलहाल कांग्रेस ने उन्हें दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दे रखी थी. दीक्षित ने पहली बार 1984 में कन्नौज सीट से चुनाव लड़ा था. यहां उन्होंने सपा के छोटे सिंह यादव को हराया था. 1984 से 1989 तक सांसद रहने के दौरान वे यूनाइटेड नेशंस कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वीमेन में भारत की प्रतिनिधि रह चुकी हैं. इसके बाद 1998 में वे नई दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं और 2013 तक इस पद पर रहीं. दिल्ली में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद केरल की राज्यपाल भी रही थीं. इसके अलावा कांग्रेस ने यूपी विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर भी पेश किया था.

दिल्ली का चेहरा बदलने का श्रेय:
शीला दीक्षित को दिल्ली का चेहरा बदलने का श्रेय दिया जाता है. उनके कार्यकाल में दिल्ली में विभिन्न विकास कार्य हुए. दिल्ली में मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार हो या फिर बारापूला जैसे बड़े रोड नेटवर्क उन्हीं की देन माने जाते हैं. शीला दीक्षित ने महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग में 5 साल (1984-1989) तक भारत का प्रतिनिधित्व किया. वह प्रधानमंत्री कार्यालय में 1986 से 1989 तक संसदीय कार्य राज्यमंत्री रहीं. 

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