राजस्थान विधानसभा चुनाव के रण में 'सॉफ्ट' हिंदुत्व की राह पर कांग्रेस 

Dinesh Kumar Dangi Published Date 2018/10/19 10:52

जयपुर (दिनेश डांगी)। गुजरात चुनाव में सॉफ्ट हिंदुत्व के फार्मूले को आजमाते हुए कांग्रेस ने उम्मीदों से अच्छा प्रदर्शन किया था। लिहाजा राजस्थान के रण में भी कांग्रेस अगर सॉफ्ट हिंदुत्व के फार्मूले पर चली तो कई अल्पसंख्यक सीटों में इस बार कटौती कर सकती है। ऐसे में कांग्रेस इस बार चांर-पांच सीटें अल्पसंख्यकों की कम कर सकती है। पार्टी ने पिछली बार राजस्थान में 16 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे और एक भी जीतकर नहीं आया था। 

राजस्थान विधानसभा चुनाव का जीतने के लिए कांग्रेस इस बार कंई प्रयोगों पर विचार कर रही है। इसके तहत कांग्रेस अपनी अल्पसंख्यक हितैषी की छवि से बाहर निकलने की कोशिश में जुटी हुई है। यानि मुस्लिमों के परम्परागत वोट बैंक के बजाय दूसरी जातियों को साधने के लिए मुस्लिम उम्मीदवारों को इस बार कम सीटें देने पर विचार कर रही है। आपको बता दे कि पिछली बार कांग्रेस ने 16 और उससे पहले 17 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। ऐसे में इस बार पूरी संभावना है कि कांग्रेस सिर्फ 12 मुस्लिमों की ही टिकटे देगी। 

कांग्रेस इन सीटों पर अक्सर अब तक मुस्लिम प्रत्याशी उतारती आई है

चूरु, फतेहपुर, किशनपोल, आदर्शनगर, रामगढ़, कामां, सवाईमाधोपुर, टोंक, पुष्कर, नागौर, मकराना, लाडनूं, सूरसागर, पोकरण, शिव, लाडपुरा, कोटा साउथ, सीकर, मंडावा।

अब बात उन सीटों की करेंगे जहां इस बार मुस्लिम को मैदान में नहीं उतारने पर पार्टी मंथन कर रही है। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस इस बार आदर्श नगर, लाडपुरा, सूरसागर, नागौर और लाडनूं पर मुस्लिम चेहरे को नहीं उतारने का मन लगभग बना चुकी है। वहीं फतेहपुर से भी सीकर के कद्दावर नेताओं का एक गुट मुस्लिम को टिकट नहीं देने की पैरवी कर रहे है। इसके बजाय सीकर शहर सीट मुस्लिम को देने की वकालात कर रहे हैं। दरअसल गुजरात चुनाव में सॉफ्ट हिंदुत्व के फॉर्मूले को आजमाकर कांग्रेस को उम्मीदों से अच्छी सीटें मिल गई थी। कांग्रेस राजस्थान चुनाव में भी इसी फॉर्मूले के तहत मैदान में उतरने की रणनीति बना रही है। दरअसल, इस फॉर्मूले के पीछे कांग्रेस की चाल अपने परंपरागत वोट बैंक की बजाय दूसरी जातियों के वोट बटोरना है। फिलहाल इसको लेकर पार्टी में शीर्ष लेवल पर मंथन भी चल रहा है। 

बहरहाल मुस्लिमों की सीट पर कटौती करके कांग्रेस विपक्षी पार्टियों के तुष्टिकरण की सियासत करने के आऱोपों से अब बचना चाहती है। क्योंकि लगातार करारी हार के बाद उसे एहसास हो गया है कि अल्पसंख्यकों की हितैषी पार्टी का ठप्पा नहीं हटा तो ऐसे ही दूसरी जातियों और वर्गों के वोट खिसकते चले जाएंगे, खासतौर से हिन्दूओं के। लिहाजा, राजस्थान के रण में कांग्रेस ने बदलती छवि और सॉफ्ट हिन्दुत्व की नांव पर सवार होने की तैयारी कर ली है। 

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