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कांग्रेस का शहीदों के सम्मान में कार्यक्रम, शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित

जयपुर: गलवान घाटी घटनाक्रम के बाद सियासत उफान पर है. भारत-चीन को बीच विवाद थम नहीं रहा और बीजेपी-कांग्रेस के बीच आरोप प्रत्यारोप. कांग्रेस ने शुक्रवार को  वीर शहीदों के सम्मान में श्रद्धांजलि कार्यक्रम किए और महापुरुषों को याद किया. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर राज्य की कांग्रेस ने भारत-चीन सीमा पर शहीद हुए भारतीए सैनिकों को श्रद्धाजंलि देने के लिए कांग्रेस ने शुक्रवार को कार्यक्रम किया.

शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित:
शहीदों को सलाम कार्यक्रम में पीसीसी की ओर से शहीद स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. एक घंटे का मौन कार्यक्रम आयोजित हुआ.इस दौरान पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट मौजूद रहे ,मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी. मुख्य सचेतक डॉ महेश जोशी, मंत्री परिषद के प्रमुख सदस्यों में  प्रताप सिंह खाचरियावास , विश्वेन्द्र सिंह  , शाले मोहम्मद , सुखराम विश्नोई ,भजन लाल जाटव ,विधायकों में रफीक खान , इंद्राज गुर्जर ,पीसीसी पदाधिकारियों महेश शर्मा ,राजेश चौधरी ,ज्योति खंडेलवाल  समेत प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रही. इस मौके पर सचिन पायलट ने मीडिया से कहा कि देशवासियों की भावना को व्यक्त करने के लिए कांग्रेस की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया हैं.पायलट ने कहा कि आज पूरा देश सैनिकों के साथ खडा हैं.उन्होंने कहा कि सरहद पर लगातार सैनिक शहीद हो रहे हैं.जिम्मेदार लोगों को आगे आकर जवाब देना चाहिए.

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ये प्रमुख नेता रहे मौजूद:
मुख्य सचेतक डॉ महेश जोशी, मंत्री परिषद के प्रमुख सदस्यों में  प्रतापसिंह खाचरियावास , विश्वेन्द्र सिंह  , शाले मोहम्मद , सुखराम विश्नोई ,भजन लाल जाटव ,विधायकों में रफीक खान , इंद्राज गुर्जर ,पीसीसी पदाधिकारियों महेश शर्मा ,राजेश चौधरी ,ज्योति खंडेलवाल,सुरेश मिश्रा,पुष्पेन्द्र भारद्वाज  समेत प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रही. पीसीसी के कार्यक्रम में सोशल डिस्टेंसिंग का बुरा हाल दिया. मंच से बार बार नेता अपने कार्यकर्ताओं को समझाते रहे कि वे लॉक डाउन नियमों की पालना करे लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वीडियो कांफ्रेसिंग कार्यक्रम के कारण नहीं पहुंच पाये. 

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जयपुर: जैसलमेर की बाड़ेबंदी के बाद कांग्रेस के विधायक एक बार फिर जयपुर पहुंच गए है. विधानसभा सत्र से पहले इन विधायकों को जयपुर लाया गया है. सरकार की रणनीति के तहत अगले कुछ दिन विधायक होटल फेयरमोंट में ही रहेंगे. ऐसा माना जा रहा है कि विधानसभा सत्र के बाद ही विधायक अपने क्षेत्रों का दौरा कर सकेंगे. 

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सीएम गहलोत मंगलवार को जैसलमेर गए थे: 
जैसलमेर से करीब 90 विधायक और 20 कांग्रेस नेता लौटे हैं. इससे पहले सीएम गहलोत मंगलवार को जैसलमेर गए थे. वहां उन्होंने विधायकों से बदले राजनीतिक हालात पर चर्चा की. उसके बाद आज विधायकों को जैसलमेर से जयपुर रवाना किया गया. वहीं दूसरी ओर शुक्रवार से शुरू होने जा रहा विधानसभा सत्र इस बार काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं. 

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गहलोत खेमे के विधायक लगातार 31 दिनों से बाड़ेबंदी में: 
गहलोत खेमे के विधायक लगातार 31 दिनों से बाड़ेबंदी में हैं. पहले 13 जुलाई से जयपुर के फेयरमोंट होटल में विधायकों को रखा गया फिर 31 जुलाई को जैसलमेर के सूर्यगढ़ होटल ले जाया गया. अब एक बार फिर विधायकों को जयपुर के फेयरमोंट होटल में ठहराया गया है. विधायकों ने विक्ट्री का साइन दिखाकर होटल में प्रवेश किया. 


 

VIDEO: हमने कभी सरकार गिराने की कोशिश नहीं की, हमें बागी या विरोधी कहना बिल्कुल गलत- विश्वेन्द्र सिंह

VIDEO: हमने कभी सरकार गिराने की कोशिश नहीं की, हमें बागी या विरोधी कहना बिल्कुल गलत- विश्वेन्द्र सिंह

जयपुर: राजस्थान का सियासी दंगल अब खत्म हो गया है. केंद्रीय आलाकमान से समस्याओं के समाधान का भरोसा मिलने के बाद सचिन पायलट भी जयपुर वापस लौट आए हैं. इस बीच आज विश्वेन्द्र सिंह ने 1st इंडिया से खास बात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि हमने कभी सरकार गिराने की कोशिश नहीं की. हमें बागी या विरोधी कहना बिल्कुल गलत है. अशोक गहलोत सरकार के मुखिया हैं और हम सरकार के साथ हैं. 

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हमारे कारण सरकार को कोई चिंता नहीं होनी चाहिए: 
उन्होंने कहा कि हमारे कारण सरकार को कोई चिंता नहीं होनी चाहिए. वहीं ऑडियो व SOG मामले पर बोलते हुए विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि मेरे ऑडियो को एडिट किया गया है मैंने गजेंद्र सिंह से कोई बात नहीं की. वहीं गहलोत के नेतृत्व में फिर से मंत्री बनकर काम करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पार्टी जो भूमिका तय करेगी उसे निभाएंगे. सुनिए विश्वेंद्र सिंह ने क्या कुछ कहा...

 

VIDEO: हिली हुई डगमगाई सरकार अपने कदमों को साधने की कोशिश कर रही - राजेंद्र राठौड़

जयपुर: राजस्थान में तेजी से बदल रहे सियासी राजनैतिक घटनाक्रम पर उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि कुनबा बिखर गया आखिर आलाकमान को बीच में दखल देनी पड़ी. यह नाकामयाबी ही मानी जाएगी. वहीं राठौड़ ने वसुंधरा राजे पर बोलते हुए कहा कि गठबंधन धर्म की पालना करनी चाहिए. अनर्गल आरोप लगाना कदापि उचित नहीं है. जिन किसी ने भी उन पर आरोप लगाए हमने उनको समझाया. वसुंधरा राजे हमारी पूर्व मुख्यमंत्री है प्रदेश की नेता हैं और नेता रहेंगी.  

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तरकस में एक भी तीर नहीं रखेंगे सभी तीर छोड़े जाएंगे: 
अविश्वास प्रस्ताव और विश्वास प्रस्ताव जैसी बात पर बोलते हुए राठौड़ ने कहा कि सरकार को बेनकाब करने के लिए कोशिश करेंगे. तरकस में एक भी तीर नहीं रखेंगे सभी तीर छोड़े जाएंगे. भारतीय जनता पार्टी मजबूत प्रतिपक्ष है इसलिए हमारे सामने कोई चुनौती नहीं है. 13 तारीख की विधायक दल की बैठक के बाद हमारी रणनीति फाइनल होगी. 

हिली हुई डगमगाई सरकार अपने कदमों को साधने की कोशिश कर रही: 
वहीं गहलोत सरकार पर तंज कसते हुए राठौड़ ने कहा कि हिली हुई डगमगाई सरकार अपने कदमों को साधने की कोशिश कर रही है. लेकिन भूचाल आया है वह अपने निशान छोड़ कर चला गया. उन्होंने कहा कि सत्र निश्चित तौर पर हंगामेदार और शानदार रहेगा. सरकार के नाकामी, टिड्डी का आक्रमण, कोरोना का कहर, सूखे की संभावना व जर्जर कानून व्यवस्था के मुद्दों पर विपक्ष का आक्रमण होगा. हम सदन से सड़क दक कुशासन से लड़ेंगे. 

VIDEO: राजनीति में भाषा मर्यादित होनी चाहिए, मैंने कोई मांग आलाकमान के सामने नहीं रखी- सचिन पायलट  

बाहर से बुर्ज की मरम्मत हो जाए तो यह नहीं माने की किला सुरक्षित: 
राठौड़ ने कहा कि टेलीफोन टेप हुए पुलिस की एजेंसी विधायकों को ढूंढती रही लेकिन पपला गुर्जर को पुलिस ढूंढती तो अच्छा होता. वहीं पांच साल सरकार चलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि किला अगर ढह जाता है और बाहर से बुर्ज की मरम्मत हो जाए तो यह नहीं माने की किला सुरक्षित है. ऐसे में यह तो समय की रफ्तार और समय की धार बताएगी. 

VIDEO- मुख्यमंत्री गहलोत से मुलाकात के बाद बोले विधायक ओम प्रकाश हुड़ला, कहा...

जयपुर: राजस्थान में तेजी से सियासी घटनाक्रम में बदलाव हो रहे हैं. इसी बीच तीन निर्दलीय विधायक ओम प्रकाश हुड़ला, सुरेश टांक व खुशबीर सिंह ने मुख्यमंत्री आवास पर पहुंचे कर सीएम गहलोत से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद फर्स्ट इंडिया से बात करते हुए निर्दलीय विधायक ओम प्रकाश हुड़ला ने कहा कि कुछ समय पहले हमारे खिलाफ SOG में एक मुकदमा दर्ज हुआ था सरकार ने वो वापस ले लिया. 

VIDEO: राजनीति में भाषा मर्यादित होनी चाहिए, मैंने कोई मांग आलाकमान के सामने नहीं रखी- सचिन पायलट  

उन्होंने कहा कि उस मुकदमे को लेकर सरकार और हमारे बीच एक आपसी तनाव पैदा हुआ था. हमे खुशी है इस बात की कि सरकार ने वह मुकदमा वापस ले लिया. आज हमने जो भी गिले-शिकवे थे वो सौहार्दपूर्ण वातावरण में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर दूर किए. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य एक ही है कि हमारे क्षेत्र की जनता का विकास कैसे हो. सुनिए और क्या कुछ कहा...

 

VIDEO: राजनीति में भाषा मर्यादित होनी चाहिए, मैंने कोई मांग आलाकमान के सामने नहीं रखी- सचिन पायलट

जयपुर: आखिर एक महीने की सियासी जंग के बाद पायलट की फिर घर वापसी हो गई. इसके बाद आज सचिन पायलट काफी लंबे वक्त बाद मीडिया से रूबरू हुए. इस दौरान उन्होंने कहा कि राजनीति में भाषा मर्यादित होनी चाहिए. हमने जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया है हर नेता और हर समाज को साथ लेकर काम किया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मैंने आलाकमान के सामने कोई मांग नहीं रखी. मैंने आलाकमान के ऊपर सारा फैसला छोड़ दिया है. हाईकमान ने हमारी बातों को गंभीरता से सुना है. समस्याओं के निराकरण के लिए 3 सदस्यीय कमेटी बनाई है.

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कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को लेकर इश्यू था:  
पायलट ने कहा कि जिसका सरकार बनाने में योगदान हो उसे सम्मान मिलना चाहिए. मैंने गहलोत जी के साथ मिलकर संघर्ष किया है. इसके साथ ही उन्होंने ने कहा कि झूठ फैलाने वालों को सच्चाई का सामना करना पड़ेगा. सचिन पायलट ने कहा कि कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान को लेकर इश्यू था. मुझे सौभाग्य मिला कि 6 साल तक कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष रहा. जब हमारी सरकार नहीं थी तब हमने 5 साल तक लगातार मेहनत की. धरने, भूख हड़ताल कर हमने जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए. 2018 में कड़ी मेहनत के कारण 21 से बढ़कर 100 तक सीटें पहुंची है. लेकिन डेढ़ साल में उस गति से काम नहीं कर पाए. 

VIDEO: बीजेपी ने विधायक दल की बैठक टाली, अब 13 अगस्त को सुबह 11बजे होगी बैठक 

जब-जब पार्टी ने मुझे दायित्व दिया है मैंने निष्ठा के साथ निभाया:
उन्होंने कहा कि हमने सबको साथ लेकर काम किया है. कठिन परिस्थितियों में किसानों और युवाओं को साथ में लेकर मेहनत की. समयबद्ध तरीके से सभी इश्यू का निराकरण किया जाएगा. मैंने कभी भी किसी के लिए अमार्यादित भाषा का इस्तेमाल नहीं किया. अशोक गहलोत जी मेरे से उम्र में बड़े है लेकिन जिस तरह टीका टिपण्णी हुई उससे मुझे भी दुख हुआ है. जिस तरह के आरोप लगाए है वो सच आपके सामने है. पायलट ने कहा कि सत्ता और संगठन को मिलकर काम करना चाहिए. मुझे दुख है कि देशद्रोह का नोटिस भेजा गया, ACB, SOG की कार्रवाई नहीं होनी चाहिए थी. लेकिन पार्टी आलाकमान ने हमारी बातों को सुना है. जब-जब पार्टी ने मुझे दायित्व दिया है मैंने निष्ठा के साथ निभाया है. दूसरे दल क्या करते है क्या नहीं वो जाने. मैंने पार्टी विचारधारा और पार्टी के खिलाफ कोई बात नहीं बोली. 


 

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जयपुर: राजस्थान में आज भाजपा विधायक दल की बैठक होनी थी लेकिन अब वह बैठक टाल दी गई है. नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने फर्स्ट इंडिया न्यूज से बातचीत में बताया कि हमने विधायक दल की बैठक बुलाई थी लेकिन हमारे कुछ विधायक गुजरात में होने के चलते आज नहीं आ पाएंगे. इसके बाद कल जन्माष्टमी है. इसलिए सभी ने सुझाव दिया की मीटिंग जन्माष्टमी के बाद की जाए. 

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विधायक दल की बैठक के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा:
उन्होंने कहा कि विधायक दल की बैठक के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा. बैठक वी. सतीश की मौजूदगी में होगी, वहीं अन्य केंद्रीय नेताओं के भी आने का कार्यक्रम है. हमारी पार्टी में फूट नहीं है लोगों ने ऐसा करने का प्रयास किया. हनुमान बेनीवाल से भी कल हमारी बात हुई, पूर्व मुख्यमंत्री से मेरी बात हुई है वो भी भाजपा की बैठक में मौजूद रहेगी. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र की वजह से बिना मन गहलोत को पायलट से मिलना पड़ेगा. 
 

VIDEO: गहलोत-पायलट समझौते का बसपा "इफेक्ट"!

जयपुर: सचिन पायलट की करीब एक महीने की बगावत के बाद कांग्रेस में घर वापसी तय हो गई है. ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि गहलोत-पायलट समझौते का बसपा-कांग्रेस विलय प्रकरण पर क्या असर होगा. आज सुप्रीम कोर्ट में इससे जुड़े सभी मुद्दों पर जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बैंच सुनवाई करेगी. 

VIDEO: सीएम गहलोत से मुलाकात के बाद बोले पायलट खेमे के विधायक भंवरलाल शर्मा, मेरा पार्टी से कोई गिला-शिकवा नहीं 

मौजूदा हालात में TRUST VOTE जीतने पर इसका कोई असर नहीं होगा:
ऐसे में यदि सुप्रीम कोर्ट बसपा विधायकों की "वोटिंग राइट्स" पर रोक लगा देता है तो फिर इसका असर गहलोत के TRUST VOTE के परिणाम पर क्या होगा? इस बारे में गहलोत कैम्प से जुड़े सूत्रों ने संकेत देते हुए कहा कि मौजूदा हालात में TRUST VOTE जीतने पर इसका कोई असर नहीं होगा, और फिर रही-सही कसर बागी विधायकों की कांग्रेस वापसी से पूरी हो जाएगी. तेजी से बदलते इस घटनाक्रम से गहलोत कैम्प में जबरदस्त खुशी का माहौल है. 

गहलोत-पायलट संघर्ष प्रकरण समाप्त! दो माह पुराने आंतरिक संघर्ष का हुआ पटाक्षेप

विधानसभा सत्र से पहले ही कांग्रेस ने अपने घर को समेट लिया:  
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को सचिन पायलट और उनके साथी विधायकों से मुलाकात की, सभी की बातें सुनी गईं. जिसके बाद मंगलवार को सभी विधायक जयपुर जा सकते हैं. यानी 14 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र से पहले ही कांग्रेस ने अपने घर को समेट लिया है. वहीं राहुल-प्रियंका से मुलाकात के बाद सचिन पायलट ने मीडिया से बात की, उन्होंने कहा कि पार्टी पद देती है तो ले भी सकती है. हम आत्मसम्मान की लड़ाई लड़ रहे थे.


 

गहलोत-पायलट संघर्ष प्रकरण समाप्त! दो माह पुराने आंतरिक संघर्ष का हुआ पटाक्षेप

जयपुर: राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गहलोत-पायलट दो माह पुराने आंतरिक संघर्ष का पटाक्षेप हुआ हैं. अब गहलोत-पायलट टकराव एक बीते युग की बात होगी. आज देर रात तक पायलट की बाकायदा घर वापसी हो जाएगी. पायलट के साथ ही बर्खास्त मंत्री एवं 16 समर्थक विधायक लौटेंगे और अब फिर से राज्य में कांग्रेस की एकता कायम हो जाएगी, लेकिन राजनैतिक प्रेक्षकों के सामने अब एक ही सवाल ? क्या दोनों पक्षों के बीच ये समझौता होगा स्थाई युद्ध विराम ? या फिर कभी पायलट कैम्प "लाइन ऑफ कंट्रोल" पार कर जाएगा ? आखिर कैसे इतनी कटुता भुलाकर दोनों नेताओं का पुनर्मिलन होगा ? और इस पुनर्मिलन की रुपरेखा और व्यवहारिकता पर अभी कुछ प्रश्नचिन्ह लगे हैं. अलबत्ता मध्यस्थ भंवर जितेन्द्र अपनी पूरी कोशिशें कर रहे हैं. आज रात अहमद पटेल-पायलट की मुलाकात के बाद थोड़ा और खुलासा होगा. 

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तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की कही गई बात: 
इससे पहले सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक सोमवार दोपहर सचिन पायलट की राहुल गांधी-प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल से मुलाकात हुई थी.इस दौरान चारों के बीच करीब दो घंटे तक चर्चा हुई. मुलाकात के बाद राहुल और प्रियंका सोनिया गांधी से मिलने पहुंचे. उसके बाद अब राहुल-सोनिया और प्रियंका के बीच मुलाकात हुई. मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान तीन सदस्यीय कमेटी बनाने की बात कही गई है. ऐसे में तीनों सदस्य पूरे मामले पर विचार विमर्श करने के बाद ही विधायकों की वापसी पर फैसला लेंगे. फिलहाल सचिन पायलट की बातों को नहीं माना गया है. शायद यह मीटिंग बहुत कामयाब नहीं रही. आलाकमान पायलट की मूल मांग मानने के मूड में नहीं है. आलाकमान ने राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन से साफ इनकार किया है. ऐसे में अब आखिर कैसे होगी पायलट और बागियों की सम्मानजनक घर वापसी? फिलहाल किसी को कुछ भी समझ नहीं आ रहा है. शायद आज रात तक कुछ स्थिति स्पष्ट हो जाए. 

एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही:  
बता दें कि 14 अगस्त से ही राजस्थान में विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है, इस पर सचिन पायलट गुट ने सत्र में शामिल होने के संकेत दे दिए थे. ऐसे में अब प्रियंका और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद एक बार फिर उम्मीद जताई जा रही है कि सचिन पायलट अपनी नाराजगी भूलकर पार्टी में वापस आएंगे. पहले भी प्रियंका गांधी वाड्रा ने सचिन पायलट से कई बार फोन पर बात की थी और उन्होंने मसला सुलझाने का प्रयास किया था. 

गहलोत गुट के विधायकों ने की थी एक्शन की मांग:
इससे पहले सोमवार को ही ये बात सामने आई थी कि राजस्थान में गहलोत गुट के विधायकों ने मांग की है कि बागी विधायकों पर एक्शन होना चाहिए, जिसपर सीएम गहलोत ने फैसला आलाकमान पर छोड़ने की बात कही थी. साथ ही कहा था कि इस बारे में सबको आलाकमान का फैसला मानना चाहिए. 

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