कांग्रेस ने साधा पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना, कहा- उन्होंने प्रवासी श्रमिकों के लिए कुछ नहीं किया

कांग्रेस ने साधा पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना, कहा- उन्होंने प्रवासी श्रमिकों के लिए कुछ नहीं किया

कांग्रेस ने साधा पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना, कहा- उन्होंने प्रवासी श्रमिकों के लिए कुछ नहीं किया

कोलकाताः पश्चिम बंगाल सरकार पर कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रदेश में लौटे श्रमिकों के लिए कुछ नहीं करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार को कहा कि उनकी पार्टी अगर सत्ता में आती है तो प्रत्येक गरीब के खाते में सीधे नकदी का हस्तांतरण किया जाएगा.

अधीर रंजन चौधरी ने कहा- कांग्रेस ने दिया था श्रमिकों के खाते में नकदी हस्तांतरण करने का प्रस्तावः
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि कांग्रेस ने, लॉकडाउन एवं लॉकडाउन के बाद प्रवासी श्रमिकों के पास नकदी का अभाव नहीं हो, इसके लिए उनके खाते में सीधे नकदी हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया था और केंद्र सरकार ने इसके लिए 50 हजार करोड़ रुपए की परियोजना की घोषणा की थी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2019 लोकसभा चुनाव से पहले चुनावी वादे के रूप में प्रत्येक गरीब व्यक्ति को नकद देने की वकालत की थी.

चौधरी ने कहा- चुनाव में निर्वाचित होने के बाद सुनिश्चित करेंगे की छत्तीसगढ़ सरकार की योजना पश्चिम बंगाल में लागू करने होः
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि यह कोई खोखला वादा नहीं था. छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रत्येक गरीब की जेब में 5700 रुपए देने की व्यवस्था की है. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में अगर हम निर्वाचित होते हैं तो हमलोग यह सुनिश्चित करेंगे के छत्तीसगढ़ की यह योजना पश्चिम बंगाल में भी लागू हो. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की सरकार के कारण प्रदेश के प्रवासी श्रमिकों को अब तक केंद्र की परियोजना का लाभ नहीं मिल सका है क्योंकि राज्य सरकार ने प्रदेश के 25 हजार प्रवासी श्रमिकों की सूची केंद्र को नहीं भेजी है.
 
प्रवासी श्रमिकों के बारे में दीदी में के पास समय नहींः 
लॉकडाउन के बाद राज्य छोड़ चुके प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंता पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि दीदी (ममता) कम से कम उनके बारे में सोचें. लॉकडाउन के दौरान आर्थिक संकट का सामना करने के बाद वे अपने गृह राज्य लौट आए हैं और उन्हें नौकरी के अवसर मिलने के बाद एक बार फिर से राज्य छोड़ना पड़ा है. अपने परिवार को बाहर से पैसे भेने वाले प्रवासी श्रमिकों के प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान को रेखांकित करते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि लेकिन, उनके बारे में सोचने के लिए आपके (ममता) के पास समय नहीं है.
सोर्स भाषा
 

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