तरकश के पुराने तीर से भाजपा का चक्रव्यूह तोड़ने में जुटी कांग्रेस

Nirmal Tiwari Published Date 2018/11/05 08:03

सिरोही। सिरोही जिले में कांग्रेस लंबे समय से भाजपा का तिलिस्म तोड़ नहीं पा रही है। जिले की तीनों सीटों पर फिलहाल भाजपा काबिज है लेकिन इस बार कांग्रेस अपने तरकश के पुराने तीर के जरिए भाजपा का चक्रव्यूह तोड़ने के प्रयास में लगी हुई है। 

सिरोही जिले में विधानसभा की 3 सीट हैं। जिनमें सिरोही सामान्य सीट है, पिंडवाड़ा आबू एसटी और रेवदर एससी वर्ग के लिए आरक्षित है। पिछले चुनावों की बात करें तो सिरोही से ओटाराम देवासी न जीत दर्ज की थी उसके बाद वह प्रदेश में मंत्री बने। पिंडवाड़ा आबू से भाजपा के समाराम गरासिया ने गंगा बहन को हराया वहीं रेवदर से भाजपा के जगसीराम ने लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की। जगसी राम ने पिछली बार लखमा राम को उससे पहले नीरज डांगी और उससे पहले छोगाराम बाकोलिया को हराया था। 

रेवदर में बाकोलिया परिवार की राजनीति शुरू से सशक्त रही है लेकिन पिछले 3 बार से बाकोलिया परिवार को टिकट नहीं मिला इस बार अनीता बाकोलिया ने कांग्रेस से टिकट की मांग की है। ध्यान रहे छोगाराम बाकोलिय राज्य सरकार में परिवहन मंत्री रहे थे। पिंडवाड़ा आबू सीट की बात करें तो पिछली बार यहां से भाजपा के समाराम गरासिया ने कांग्रेस की गंगा बेन को हराया था 2013 में भाजपा ने सामाराम को टिकट नहीं दिया था और यहां से कांग्रेस की गंगा बेन विजयी रही थी। लेकिन 2003 में समाराम गरासिया यहां से जीते थे। कुल मिलाकर कहे तो इस सीट पर एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा का कब्जा रहता है लेकिन इस बार बदलते समीकरणों में गंगा बहन की चुनौती दमदार लग रही है। 

सिरोही सामान्य सीट की बात करें तो यहां पर कांग्रेस के दिग्गज संयम लोढ़ा की कभी तूती बोलती थी लेकिन बदलते राजनीतिक मिजाज और गहलोत खेमे से अनबन के चलते संयम लोढ़ा सियासी तौर पर हाशिये पर आ गए थे। इसके बाद उन्हें दो बार टिकट तो मिला लेकिन दोनों बार भाजपा के आता राम देवासी ने जातीय गणित और धार्मिक अनुयायियों के बल पर लोढ़ा को लगातार दो बार करारी शिकस्त दी। इस बार सिरोही में ओटाराम की खिलाफत तो नहीं है क्योंकि लोगों का कहना है कि उन्होंने कुछ अच्छा नहीं किया तो बुरा भी नहीं किया लेकिन संयम लोढ़ा एक बार फिर तेजी से जनता के बीच जगह बना रहे हैं। ऐसे में इस बार संयम लोढ़ा को टिकट दिया गया तो हालात बदल भी सकते हैं। इधर ओटाराम को पायल परसरामपुरिया से भी चुनौती मिल रही है पायल ने भी भाजपा से टिकट की मांग की है। कुल मिलाकर सिरोही में इस बार भाजपा पहले की तरह मजबूत दिखाई नहीं दे रही। उधर कांग्रेस एंटी इनकंबेंसी और 5 साल की तैयारी से फ्रंट फुट पर जरूर नजर आ रही है।
 

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