'मिशन बागी' के लिए अभी मैदान में डटे है कांग्रेस के दिग्गज नेता

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/22 11:19

जयपुर (योगेश शर्मा)। गुलाम नबी आजाद और मुकुल वासनिक ने दो दिनों तक जयपुर में रहकर बगावत की राह पर चल रहे दिग्गज बागियों को मना लिया है। सचिन पायलट, अशोक गहलोत और अविनाश पांडे ने बागियों को मनाने में अपनी भूमिका निभाई। हालांकि करीब 1दर्जन बागी अभी तक मैदान में डटे है। महादेव सिंह खंडेला, बाबू लाल नागर, भीमराज भाटी लाख कोशिशो के बाद भी नहीं माने। खास रिपोर्ट...

बगावत की राह पर कांग्रेस के दिग्गज नेता भी सवार है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री महादेव सिंह खंडेला, पूर्व मंत्री बाबू लाल नागर, पूर्व मंत्री रामचंद्र सराधना जैसे दिग्गजों ने मैदान नहीं छोड़ा है। वहीं पूर्व मंत्री ललित भाटी ने अपने भाई के समर्थन में नाम वापिस ले लिया। अशोक गहलोत के फोन करने के बाद ललित भाटी मान गये। सचिन पायलट के प्रयास अपने लोकसभा के निर्वाचन क्षेत्र रह चुके अजमेर में रंग लाये। मुकुल वासनिक ने तीन बार ललित भाटी को फोन किये। हेमन्त भाटी और ललित भाटी सगे भाई है लेकिन पिछले कई सालों से दोनों के बीच सियासी अदावत का दौर जारी है। कांग्रेस के उन दिग्गजों के नाम बताते है जिन्होंने नाम वापिस ले लिये है। 

कांग्रेस के 'रणछोड़

रामचंद्र सराधना, पूर्व विधायक विराटनगर
—सचिन पायलट और अशोक गहलोत के प्रयासों के बाद माने
—विराटनगर से टिकट कटने के बाद थे मैदान में

ललित भाटी, पूर्व विधायक अजमेर
—अजमेर के कद्दावर नेता
—दलित नेता के तौर पर मेरवाड़ा में चर्चित
—अपने भाई के खिलाफ अंतिम क्षणों में मैदान छोड़ा
—अशोक गहलोत-वासनिक के प्रयासों के बाद माने

ब्रह्मदेव कुमावत, पूर्व विधायक मसूदा
—मसूदा से विधायक रह चुके कुमावत
—पायलट के प्रयास यहां लाये रंग

लाडपुुरा से देवा भड़क माने
—देवनी-उनियारा से माने कुलदीप राजावत
—आदर्शनगर से कलीम अहमद बैठे

कांग्रेस के वो दिग्गज जो मैदान में डटे है

—महादेव सिंह खंडेला पूर्व विधायक खंडेला
—खंडेला पूर्व विधायक और पूर्व केन्द्रीय मंत्री है
—कांग्रेस में गहलोत के करीबी माने जाते है

बाबू लाल नागर पूर्व विधायक दूदू
—नागर है जयपुर देहात के प्रखर दलित नेता
—दुष्कर्म मामले के चलते नागर का टिकट कटा
—नागर भी कांग्रेस में गहलोत कैम्प में गिने जाते है

हाजी कय्यूम पूर्व विधायक मसूदा
—मेरवाड़ा के कद्दावर मुस्लिम लीडर
—समझाइस के बावजूद डटे है चुनावी समर में

भीमराज भाटी पूर्व विधायक पाली
—भाटी है गोडवाड-मारवाड़ के तेज तर्रार नेता
—टिकट नहीं मिलने के बाद कांग्रेस से बागी हुये

रामकेश मीना पूर्व विधायक गंगापुर सिटी
—रामकेश मीना बागी होकर चुनावी समर में डटे है
—रामकेश के पुत्र धीरज है युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव

नाथूराम सिनोदिया पूर्व विधायक किशनगढ
—सिनोदिया टिकट कटने के बाद हुये बागी
—किशनगढ के कद्दावर नेता है सिनोदिया 

प्रधुम्न सिंह मांडल
—प्रधुम्न सिंह है देवेन्द्र सिंह के पौत्र
—पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष है देवेन्द्र सिंह

जगदीश चौधरी आहोर
—जगदीश चौधरी टिकट कटने के बाद मैदान में डटे
—जगदीश है पूर्व विधायक भगराज के पुत्र

पूसाराम गोदारा रतनगढ़
—गोदारा है कांग्रेस के बागी के तौर पर मैदान में
—पिछली बार कांग्रेस टिकट पर लड़ा था चुनाव

प्रशासनिक अफसर रहे अबरार अहमद ने सवाई माधोपुर से टिकट वापिस ले लिया है। पूजा छाबड़ा ने श्रीगंगानगर से जमींदारा पार्टी को समर्थन दे दिया। शराबबंदी के चलते दिया समर्थन। कांग्रेस नेतृत्व को बागियों को मनाने में आंशिक सफलता ही मिल पाई। दिग्गज नेताओं ने अभी मैदान नहीं छोड़ा है। 

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