बजट के अभाव में अटका शौर्य उद्यान का निर्माण कार्य

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/24 04:05

झुंझुनू। साहस, शौर्य और शहादत की बात हो और राजस्थान के झुंझुनू जिले का नाम जुबान पर ना आए यह तो हो ही नहीं सकता। झुंझुनू के रणबांकुरों ने सीमाओं पर देश की रक्षा करते हुए हंसते-हंसते प्राणों की आहुति दी है। देश को राजस्थान से सर्वाधिक सैनिक देने का खिताब झुंझुनू के नाम है। और यही कारण है कि झुंझुनू जिला देशभर में सैनिक जिले के नाम से मशहूर है। सैनिक कल्याण सूत्रों की मानें तो झुंझुनू के 459 जवान अभी तक देश के काम आ चुके हैं। हाल ही पुलवामा हमले का बदला लेते हुए आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर अब्दुल रशीद कामरान गाजी को मारने वाली टीम में जिले के टीबा गांव के सिपाही श्योराम गुर्जर भी शामिल थे जो देश के दुश्मनों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। रणबांकुरों की इस धरती को सम्मान देने, शहादत को नमन करने और आज की युवा पीढ़ी को वीर सपूतों की शौर्य गाथा से रूबरू करवाने के मकसद से झुंझुनू जिला मुख्यालय के निकट दोरासर गांव में शौर्य शक्ति स्मारक जिसे आम बोलचाल में शौर्य उद्यान भी कहा जाता है, का निर्माण कराया जा रहा है। 

हम आपको बता दें कि जिले में शहीदों की याद में ऐसे शौर्य उद्यान की मांग करीब एक दशक पहले की गई थी जिसे तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2015 में माना और दोरासर में इसके निर्माण की मंजूरी दी। यह शौर्य उद्यान राजस्थान धरोहर एवं प्रोन्नति प्राधिकरण की ओर से बनवाया जा रहा है। इसके लिए दोरासर गांव में 20 बीघा जमीन आवंटित की गई। उद्यान का मुख्य भवन 43250 वर्ग फीट में बनाया गया है। सो जाओ ध्यान के लिए साढे चार करोड़ रुपए का बजट भी मंजूर किया गया था लेकिन करीब डेढ़ करोड़ रुपए का बजट अटक जाने के चलते इसका निर्माण अधर में है। यह उद्यान एक साल में बनकर तैयार हो जाना था लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ है। बजट के अभाव में यहां लाइट, फुटपाथ, मुख्य प्रवेश द्वार, गार्ड रूम, पार्किंग, प्रतिमाओं को स्थापित करने जैसे काम अटक गए हैं। खास बात तो यह है कि 27 सितंबर 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने जयपुर से ऑनलाइन ही इस उद्यान का लोकार्पण भी कर दिया था लेकिन अधूरा होने के चलते उद्यान आमजन के लिए आज तक नहीं खोला जा सका है। 

इधर कुलोद कलां के सरपंच अर्जुन महला ने आरोप लगाया है कि वर्तमान सरकार ने शौर्य उद्यान का बजट रोक दिया है जिसके चलते इसका निर्माण कार्य अधर में लटक गया है। उन्होंने कहा है कि अगर इसका काम जल्द से जल्द शुरू नहीं किया गया तो गांव वालों को लेकर बड़ा आंदोलन करेंगे। क्योंकि यह शौर्य उद्यान झुंझुनू ही नहीं पूरे राजस्थान के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है और इसका निर्माण कार्य बीच में रोक देना हमारे वीर सपूतों और शहीदों का अपमान है। 

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