निर्माण-तोड़फोड़ के मलबे का वैज्ञानिक तरीके से होगा प्रबंधन, गहलोत सरकार ने तैयार की नीति

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/07/30 08:16

जयपुर: प्रदेश शहरों और गांवों में निर्माण और तोड़फोड़ के मलबे के वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन के लिए प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार ने नीति तैयार कर ली है. इस नीति के तहत मलबे के कलेक्शन से लेकर उसके डिस्पोजल तक के प्रावधान किए गए हैं. मलबा उठाने के लिए संबंधित निकाय व पंचायतीराज संस्था राशि वसूलेंगे और सार्वजनिक स्थानों पर मलबा फेंका तो भारी जुर्माना भी वसूला जाएगा. एक खास रिपोर्ट:

केंद्र सरकार ने 2016 में लागु किए नियम:
मामले की गंभीरता को ऐसे समझा जा सकता है कि राज्य में रोजाना छह हजार पांच सौ टन ठोस कचरा उत्पादित होता है. इस कचरे का 25 से 30 प्रतिशत निर्माण व तोड़फोड़ का मलबा होता है. मलबा और कचरा मिक्स होने से ना तो कचरे का सही निस्तारण हो पाता है और नहीं मलबे का. वहीं दूसरी तरफ शहरों में अक्सर मलबे को सड़क, पार्क, खुले स्थान, नाला और नदियाें में डाल दिया जाता है. इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है. देश के शहरों और गांवों को इस समस्या से निजात दिलाने के लिए केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने वर्ष 2016 में निर्माण व तोड़फोड़ अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू किए थे. इन नियमों को लागू करने के लिए सभी राज्यों को इस बारे में नीति बनानी है. 

शहरी और ग्रामीण में लागू होगी नीति:
प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार में इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है. मौजूदा अशोक गहलोत सरकार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए नीति का प्रारूप तैयार किया है. यह नीति प्रदेश के शहरी और ग्रामीण दाेनों क्षेत्रों में लागू होगी. स्वायत्त शासन विभाग की ओर से तैयार किए इस प्रारूप पर पर्यावरण विभाग, पंचायतीराज विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल से सुझाव मांगे गए हैं. नीति का प्रमुख उद्देश्य शहर और गांवों को स्वच्छ रखना और मलबे को दुबारा उपयोगी बनाना है. आपको बताते हैं कि राज्य की प्रस्तावित इस नीति में इस बारे में क्या प्रावधान किए गए हैं-

इस नीति में क्या है प्रावधान:
—नीति के तहत जो भी व्यक्ति निर्माण या तोड़फोड़ करवा रहा है उसे पहले मलबे का पृथक्करण करना होगा
—मलबे को मिट्टी, रेत, कंकर, ईंट, कंक्रीट, लोहा, लकड़ी व डामर आदि में अलग-अलग करना होगा
—मलबे का वजन 20 टन से कम होने संबंधित व्यक्ति या फर्म निकाय/पंचायतीराज संस्था को सूचित करेगा
—इस सूचना पर निकाय/पंचायतीराज संस्था की ओर से निर्धारित शुल्क वसूलकर मलबा उठवाया जाएगा
—20 टन से 1 लाख टन से कम मलबा होने पर संबंधित को खुद ही मलबा प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाना होगा
—साथ ही मलबे के निस्तारण के लिए प्रोसेसिंग चार्ज भी देना होगा
—1 लाख टन या इससे अधिक मलबा होने पर संबंधित को खुद ही इसका निस्तारण करना होगा
—निस्तारण के बाद बने मैटेरियल का उसी प्रोजेक्ट में दुबारा उपयोग करना होगा
—उसी प्रोजेक्ट में दुबारा उपयोग नहीं होने की स्थिति में इस मैटेरियल की अन्य प्रोजेक्ट में इसकी आपूर्ति करनी होगी
—ये सारे मापदंड सरकारी विभागों के ठेकेदारों पर भी लागू होंगे
—मलबा परिवहन करने वाले वाहनों में निकाय/पंचायतीराज संस्था को व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम लगाना होगा
—निकाय/पंचायतीराज संस्था को आवश्यकतानुसार प्रोसेसिंग यूनिट लगानी होगी
—मलबा प्रबंधन की शिकायतों के निस्तारण के लिए निकाय/पंचायतीराज संस्था को हैल्पलाइन सेवा शुरू करनी होगी

प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाने की एवज में दरें निर्धारित:
मलबे को उठाने और उसे ट्रांसपोर्ट कर प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाने की एवज में निकाय/पंचायतीराज संस्था की ओर से संबंधित से राशि वसूली जाएगी. जो राशि नगरपालिकाओं के लिए निर्धारित की गई है, वही दर ग्राम पंचायत व पंचायत समितियों पर भी लागू होगी. आपको बताते हैं कि नीति के प्रारूप में मलबा उठाने की क्या दरें प्रस्तावित की गई हैं।

मलबा उठाने की प्रस्तावित दर:
—0.5 टन से लेकर 0.75 टन वजन पर नगर निगम क्षेत्र में 500,
—नगर परिषद क्षेत्र में 300 और नगरपालिका में 200 रुपए लगेगा
—1.5 टन वजन पर नगर निगम क्षेत्र में 1000,नगर परिषद क्षेत्र में 750 और नगरपालिका में 500 रुपए लगेगा
—3 टन तक वजन पर नगर निगम क्षेत्र में 2000,नगर परिषद क्षेत्र में 1500 और नगरपालिका में 1000 रुपए लगेगा  
—6 टन तक वजन पर नगर निगम क्षेत्र में 4000,नगर परिषद क्षेत्र में 2500 और नगरपालिका में 1500 रुपए लगेगा
—80 वर्गमीटर से अधिक निर्माण की तोड़फोड़ पर नगर निगम क्षेत्र में 50, 
—नगर परिषद क्षेत्र में 30 और नगरपालिका में 20 रुपए प्रति माह लगेगा
—120 वर्गमीटर तक के निर्माण की तोड़फोड़ पर नगर निगम क्षेत्र में 100,
—नगर परिषद क्षेत्र में 75 और नगरपालिका में 50 रुपए प्रति माह लगेगा
—25 घनफीट तक के मलबे के लिए नगर निगम क्षेत्र में 50,
—नगर परिषद क्षेत्र में 30 और नगरपालिका में 20 रुपए लगेगा
—इससे अधिक होने पर 2 रुपए प्रति घन फीट अतिरिक्त शुल्क लगेगा
—मलबा उठाने के शुल्क के अलावा संबंधित व्यक्ति या फर्म को यूजर चार्ज भी देना होगा
—नगर निगम क्षेत्र में यह यूजर चार्ज 350,नगर परिषद क्षेत्र में 250 और नगरपालिका क्षेत्र में 150 रुपए होगा

जुर्माना भी लगाया जाएगा:
प्रस्तावित नीति के मुताबिक मलबे को सड़क, पार्क, नदी-नाले व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर डालने पर निकाय/पंचायतीराज संस्था की ओर से जुर्माना भी लगाया जाएगा. यहीं नहीं मलबे का अलग-अलग मैटेरियल में पृथक्करण नहीं करने पर भी जुर्माना वसूला जाएगा. यह जुर्माना प्रदेश में लागू ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के तहत ही प्रस्तावित किए गए हैं. आपको बताते हैं कि नीति के तहत मलबा इधर-उधर डालने के लिए क्या जुर्माना प्रस्तावित किया गया है।

मलबा इधर-उधर डाला तो भारी जुर्माना:
—आवासीय, रिटेल व अन्य छोटी इकाईयों ने मलबे का पृथक्करण नहीं किया तो जुर्माना लगेगा
—नगर निगम क्षेत्र में 500,नगर परिषद क्षेत्र में 300 
—नगरपालिका क्षेत्र में यह जुर्माना 200 रुपए लगेगा
—कचरे में मलबा मिक्स करने पर 500 रुपए से लेकर 1000 रुपए तक का जुर्माना लगेगा
—मकान के सामने, पार्क व सार्वजनिक स्थान पर मलबा डालने पर 200 से लेकर 500 रुपए तक का जुर्माना लगेगा
—नदी, नाले, नहर या सड़क पर मलबा डालने पर नगर निगम क्षेत्र में 25000,
—नगर परिषद में 15000 और नपा क्षेत्र में 10000 रुपए जुर्माना लगेगा
—सरकारी ठेकेदार ने मौके से मलबा नहीं हटाया तो निगम क्षेत्र में 5000,
—नगर परिषद क्षेत्र में 3000 और नपा क्षेत्र में 200 रुपए जुर्माना लगेगा

संबंधित विभागों से सुझाव:
नीति के प्रारूप पर संबंधित विभागों से सुझाव मांगे गए हैं. इन सुझावों के निस्तारण के लिए मुख्य सचिव के स्तर पर बैठकों के दौर होंगे. तब जाकर यह नीति फाइनल हो पाएगी और स्वायत्त शासन विभाग से अधिसूचना के माध्यम से इस नीति को लागू करेगा. उम्मीद है कि यह सारी प्रक्रिया जल्द पूरी हो ताकि मलबे के कारण होने वाले नुकसान से प्रदेश के शहर और गांवों को बचाया जा सके. 
 
... संवाददाता अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट 
 

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