सीमा पार पाकिस्तान से अनियंत्रित टिड्डियों का हमला जारी

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/05/30 11:55

जैसलमेर: पाकिस्तान से अनियंत्रित टिड्डिया लगातार जैसलमेर के रास्ते भारत आ रही है ,तो इधर भारत में 7 दिन से डेरा जमाए बैठी टिड्डी नियंत्रित होने से पहले ही अंडा दे चुकी है. इससे लाखों टिड्डिया रातों-रात बढ़ने का खतरा पैदा होने की आशंका है. टिड्डिया जैसलमेर के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज तक पहुंच चुकी है और विभाग के लिए नियंत्रण को लेकर अब दोगुनी मशीनरी झोंकने की जरूरत महसूस की जा रही है. पाकिस्तान से आ रही टिड्डिया जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर और बीकानेर जिलों की तरफ आगे बढ़ने की आशंका है.  गत 21 मई को जैसलमेर के रामदेवरा क्षेत्र में प्रवेश कर चुका टिड्डी दल लगातार पाकिस्तान से आ रहा है.  दिक्कत यह आ रही है कि यह क्षेत्र प्रतिबंधित होने के कारण टिड्डी प्रतिरक्षा एवं नियंत्रण विभाग व कृषि विभाग की टीम वहां पहुंच नहीं पा रही है. ऐसे में इस क्षेत्र में नियंत्रण नहीं हो पाया है, उधर रेंज में डेरा डाले बैठी टिड्डी ने अंडे दे दिए है. अब फाका का रूप लेकर उड़ने लगी है इसे बड़े पैमाने में पेड़-पौधों वनस्पति को नुकसान पहुंचने की आशंका मंडरा रही है. 

इस साल के आरंभ में टिड्डी का आउटब्रेक लाल सागर के दोनों ओर स्थित अफ्रीका के पूर्वी देशों और सऊदी अरब से हुआ है. इसके बाद सऊदी अरब, यमन, ओमान और ईरान में टिड्डी के बड़े झुंड विकसित होते जा रहे हैं. ईरान से लगातार टिड्डियां पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान होती हुई भारत की ओर आ रही है. एफ एओ के अनुसार ब्लूचिस्तान के तटीय इलाकों में कई सारे हॉपर्स हैं जिनमें मई के अंत तक पंख आ जाएंगे और वे उडऩा आरंभ कर देंगे. कुछ टिड्डी के बड़े झुंड में है जो लगातार भारत के बॉर्डर की ओर बढ़ रही है. पाकिस्तान में टिड्डी नियंत्रण कार्यक्रम समुचित रूप से नहीं चलाया जा रहा है. जिसकी वजह से भारत को टिड्डियां को काबू में करना पड़ रहा है. खाड़ी देशों में टिड्डी के बड़े-बड़े झुंड हैं. विशेषकर यमन, ओमान और ईरान में. टिड्डियां जून में अनुकूल मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए भारत की तरफ बढ़ रही है. भारत में मानसून का मौसम शुरू हो चुका है और जून में बरसात और आंधी का मौसम रहेगा. जिस कारण टिड्डियों को आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिलेगी. केंद्र सरकार टिड्डियों को राजस्थान और गुजरात के बॉर्डर पर ही खत्म कर आगे बढ़ने से रोकना चाह रही है. इसके लिए कई संसाधन लगाए गए हैं.  

फील्ड फायरिंग रेंज में बड़ी संख्या में मौजूद टिड्डी दल
जिले में अधिकतर हिस्से में टिड्डी दल पर नियंत्रण हो चुका है. केवल फील्ड फायरिंग रेंज में बड़ी संख्या में मौजूद टिड्डी दल पर नियंत्रण करना बाकी है. यहां नियंत्रण करने में कई बाधाएं आ रही हैं. जानकारी के अनुसार यदि समय रहते फायरिंग रेंज में नियंत्रण नहीं किया गया तो टिड्डियों का यह समूह प्रजनन कर तबाही मचा सकता है. हालांकि अभी तक टिड्डी दल में प्रजनन नहीं हुआ है, लेकिन अब कुछ ही दिनों में प्रजनन करने की आशंका है. ऐसे में टिड्डी दल पर जल्द से जल्द नियंत्रण करने की जरूरत है. विभागीय सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के रास्ते भारत आने वाले टिड्डी दल की अभी तो सिर्फ शुरुआत है. आगामी दिनों में मानसून के समय बड़ी संख्या में टिड्डी दल जैसलमेर आ सकते हैं. पाकिस्तान में इसका नियंत्रण नहीं हुआ है, ऐसे में अब मानसून में बड़ी संख्या में टिड्डी दल यहां आने की आशंका है. टिड्डी दल पर पूरी तरह से नियंत्रित करने व आगामी दिनों में पाक से आने वाले दलों पर रोक लगाने के लिए फरीदाबाद से 10 टीमें जैसलमेर पहुंच गई हैं. इनमें 40 से अधिक अधिकारी शामिल हैं.

पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर टिड्डियों को नियंत्रित करने के लिए मेलाथिन का छिडक़ाव किया
देश के टिड्डी नियंत्रण संगठन की ओर से को लगातार आठवें दिन जैसलमेर क्षेत्र में पाकिस्तान से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर टिड्डियों को नियंत्रित करने के लिए मेलाथिन का छिडक़ाव किया गया. उधर पाकिस्तान की ओर से टिड्डियों पर नियंत्रण नहीं करने की वजह से भारत को जोर-शोर से नियंत्रण कार्यक्रम चलाना पड़ रहा है. भारत के अधिकारियों ने पाकिस्तान के समक्ष अपनी नाराजगी व्यक्त की है. इसके बाद दोनों देशों ने 19 जून को बैठक करने का निर्णय किया है. यह बैठक मुनाबाव या खोखरापार में होगी. रोम स्थित विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) ने भी अपनी प्रेस रिलीज में पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान में टिड्डी नियंत्रण में बरती जा रही ढिलाई पर चिंता व्यक्त की है. 

गोडावण का भोजन है टिड‌्डी, संरक्षण बना चुनौती 
राज्य पक्षी गोडावण की संख्या लगातार कम हो रही है. पिछले दो दशक में गोडावण घटकर 100 से भी कम रह गए हैं. इसमें भी अधिकतर गोडावण जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में विचरण करते हैं. लुप्तप्राय: गोडावण को बचाने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं और करोड़ों रुपए संरक्षण पर खर्च किए गए हैं. हाल ही वॉटर होल पद्धति से हुई गणना में जैसलमेर केवल 14 गोडावण ही नजर आए. ऐसे में घटती संख्या को रोकना चुनौती बना हुआ है. गौरतलब है कि इन दिनों जैसलमेर टिड्डी दल देखा गया है. अलग-अलग जगहों पर नजर आ रहे टिड्डी दल को रोकने के लिए प्रशासन ने दवाई छिड़काव के निर्देश जारी किए हैं. ऐसे में दवाई छिड़काव से टिड्डी दल को तो रोका जा सकेगा, लेकिन गोडावण के लिए खतरा बढ़ जाएगा. प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है कि कैसे भी टिड्डी दल पर नियंत्रण किया जाए, नहीं तो आगामी किसानों की फसलों के लिए यह घातक हो सकता है. जानकारों के अनुसार यदि टिड्डियों का यहां प्रजनन हो गया तो स्थिति नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा.   

गोडावण का प्रिय भोजन टिड्डी 
जानकारी के अनुसार गोडावण का प्रिय भोजन टिड्डी ही है. टिड्डी दल पर नियंत्रण के लिए जिन रासायनिक दवाइयों का छिड़काव किया जा रहा है इससे टिड्डी दल पर तो नियंत्रण हो जाएगा, लेकिन उन टिड्डियों का यदि गोडावण ने सेवन कर लिया तो उनके काल का ग्रास बनने की आशंका है.  

टिड्डी के दो रूप होते हैं एक पीला और दूसरा भूरे रंग का
टिड्डी के दो रूप होते हैं एक पीला और दूसरा भूरे रंग का. पीले रंग की टिड्डी यानी वयस्क जल्दी से प्रजनन क्रिया कर 10 दिन में ही एक साथ सौ अंडे देकर अपनी तादाद बढ़ाती है. ऐसे में 10 हजार पीली टिड्डी भी कुछ ही दिनों में अपनी संख्या करोड़ तक कर सकती है. सबसे पहले इन पीली टिड्डियों का खात्मा किया जा रहा है. जानकारी के अनुसार फायरिंग रेंज में आ रही समस्या के निराकरण के लिए जिला मुख्यालय पर महत्वपूर्ण मीटिंग होगी, जिसमें नियंत्रण कैसे किया जाए इस पर फैसला लिया जा सकता है. 

रसायनिक दवाओं के छिड़काव के बाद मरी टिड्डियों को खाने से गोडावण की मौत होने की आशंका 
इधर, वन विभाग और अन्य अधिकारियों का कहना है कि फायरिंग रेंज के प्रतिबंधित क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण टीम का जाना संभव नहीं है और दूसरी तरफ फायरिंग रेंज में गोडावण भी मौजूद हैं. रसायनिक दवाओं के छिड़काव के बाद मरी टिड्डियों को खाने से गोडावण की मौत होने की आशंका बढ़ गई है, ऐसे में वन विभाग ने टिड्डी नियंत्रक दल को क्षेत्र में दवा के छिड़काव के लिए मना किया है. ऐसे में इस इलाके में टिड्डी दल पर नियंत्रण करना चुनौती बन गया है.  

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