जयपुर VIDEO: फिर से कोरोना का पर्यटन उद्योग पर साया, तीसरी लहर की जद में पर्यटन, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: फिर से कोरोना का पर्यटन उद्योग पर साया, तीसरी लहर की जद में पर्यटन, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: कोरोना के चलते 2 साल तक ठप रहे पर्यटन को जैसे-तैसे पिछले 3 माह में वापसी का मौका मिला वैसे ही एक बार फिर पर्यटन उद्योग कोरोना की चपेट में आ गया है. कोरोना की तीसरी लहर के चलते प्रदेश का पर्यटन ढांचा एक बार फिर चरमरा गया है. ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स को लगातार बुकिंग कैंसिल होने के ईमेल मिल रहे हैं. पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों के सामने एक बार फिर रोजगार का संकट गहरा गया है. साथ ही कई हजार करोड़ के नुकसान का भी अंदेशा है. 

कोरोना के चलते विश्व स्तर पर सबसे ज्यादा किस उद्योग को नुकसान हुआ है तो वह है पर्यटन उद्योग. कोरोना की चपेट में आकर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पूरी तरह से बंद है. भारत समेत तमाम ऐसे देश जो पर्यटन को लेकर मुख्यधारा में थे वह सिर्फ घरेलू पर्यटन पर फोकस कर रहे हैं. राजस्थान के संदर्भ में बात करें तो यहां के पर्यटन उद्योग ने लगभग 20 महीने तक कोरोना के साथ संघर्ष किया. इस दौरान 30 लाख से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बेरोजगार हुए, 20000 करोड रुपए से ज्यादा का नुकसान ट्रैवल ट्रेड को उठाना पड़ा. बमुश्किल कोरोना की दूसरी लहर के समाप्त होने पर पर्यटन उद्योग वापस अपने पैरों पर खड़ा हुआ तो अब कोरोना की तीसरी लहर ने एक बार फिर पर्यटन उद्योग को झकझोर दिया है. ट्रैवल एजेंट्स और टूर ऑपरेटर्स के पास मार्च तक की तमाम बुकिंग रद्द हो चुकी हैं. होटल्स में बुकिंग लगातार कैंसिल हुई और अब राज्य सरकार ने वीकेंड कर्फ्यू लगा दिया है, जिसके चलते रविवार को प्रदेशभर में तमाम पर्यटन गतिविधियां समेत तमाम गतिविधियां बंद रहेंगी ऐसे में ट्रैवल ट्रेड को जो थोड़ी बहुत उम्मीद थी वह भी धराशाई हो गई है.

 

कोरोना की पहली और दूसरी लहर में पर्यटन उद्योग को संबल देने के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न रियायतें दी. लोक कलाकारों और पर्यटन उद्योग से जुड़े निचले पायदान के स्टेकहोल्डर्स को आर्थिक सहायता भी दी. इससे कोरोना की दूसरी लहर धीमी पड़ने पर पर्यटन उद्योग एक बार फिर उठ खड़ा हुआ था. गत साल के अंतिम 3 माह यानी अक्टूबर से दिसंबर तक पर्यटन में जबरदस्त उछाल आया. घरेलू पर्यटक घरों से बाहर निकल पर्यटन स्थलों तक पहुंचे. इससे पर्यटन उद्योग में एक बार फिर अच्छी खासी चहल-पहल दिखाई दी, लेकिन दिसंबर अंत तक हालात एक बार फिर विकट हो गए और कोरोना की तीसरी लहर में सब कुछ चौपट कर दिया. एक बार फिर पर्यटन उद्योग से जुड़े तमाम स्टेकहोल्डर्स के सामने चुनौती खड़ी हो गई है. 

होटल रिसोर्ट संचालक, गाइड, लोक कलाकार, हस्तशिल्प, जिप्सी संचालक, टूर ऑपरेटर, ट्रैवल एजेंट्स यहां तक कि छोटे छोटे हॉकर और वेंडर भी अपने भविष्य को लेकर एक बार फिर परेशान दिखाई दे रहे हैं. जिन होटल और पर्यटन स्थलों पर एक पखवाड़े पहले तक जबरदस्त रौनक थी वह वीरान हो गए हैं. लगातार बुकिंग कैंसिल होने से एक बार फिर पर्यटन उद्योग के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि कोरोना की तीसरी लहर बमुश्किल बैसाखियों को छोड़ अपने पैरों से चलने लगे पर्यटन उद्योग को एक बार फिर अपाहिज करने लगी है. मार्च तक की बुकिंग कैंसिल हो गई हैं और मार्च के बाद ऑफ़ सीजन आ जाएगा. ऐसे में जल्द ही सरकारी स्तर पर ठोस प्रयास नहीं हुए तो इस बार पर्यटन उद्योग को वापस पटरी पर लाना कठिन चुनौती साबित होगा.

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