VIDEO: कोरोना मरीजों का दर्द बढ़ा रहा जयपुरिया अस्पताल! चिकित्सा विभाग के आदेश बने मजाक, देखिए खास रिपोर्ट

VIDEO: कोरोना मरीजों का दर्द बढ़ा रहा जयपुरिया अस्पताल! चिकित्सा विभाग के आदेश बने मजाक, देखिए खास रिपोर्ट

जयपुर: कोरोना प्रबन्धन में लगे चिकित्सा विभाग के आदेश राजधानी जयपुर के कोविड डेडिकेटेड जयपुरिया अस्पताल में "मजाक" बने हुए है.जी हां ये कोई हमारा आरोप नहीं,बल्कि अस्पताल में दूर दराज से इलाज की आस लेकर पहुंच रहे लोगों की पीड़ा है.अस्पताल को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच फर्स्ट इंडिया की टीम खुद मौके पर पहुंची.तो देखा कि अस्पताल की इमरजेंसी में घंटों इंतजार के बाद भी मरीजों को भर्ती करने में आनाकानी की जा रही है.खुद मरीजों के परिजनों ने फर्स्ट इंडिया को बताया कि अस्पताल में बैड उपलब्ध नहीं होने का तर्क देकर मरीज को भर्ती नहीं किया जा रहा है.चार से पांच घंटे हो चुके है, लेकिन उनके बाद में आए "पहुंच" वाले मरीजों को भर्ती किया जा रहा है.आप खुद ही सुनिए आखिर मरीज के परिजन क्या कह रहे है.

फर्स्ट इंडिया टीम ने लिया अस्पताल के अन्दर का जायजा:

इतना ही नहीं, मरीजों के इस तरह के जवाब के बाद जब फर्स्ट इंडिया टीम ने अस्पताल के अन्दर का जायजा लिया, जहां सरकार के सख्त आदेश के बावजूद बैड उपलब्धता सूचना बोर्ड मरीजों को गुमराह करता मिला.दरअसल, सरकार ने मरीजों की दिक्कतों को देखते हुए सख्त निर्देश दे रखे है कि अस्पताल में किसी भी मरीजों को भर्ती करने से इनकार नहीं किया जाए.बकायदा अस्पताल के मुख्य द्वार पर सूचना बोर्ड लगाया जाए, जिसके ये साफ जिक्र हो कि वहां किस श्रेणी के कितने बैड है.उनमें से कितने भरे हुए है और कितने खाली है.लेकिन जयपुरिया अस्पताल में बोर्ड पर एक मई की बैड सूचना "डिस्प्ले" की जा रही थी.आइए आपको बताते है कि सात मई यानी आज अस्पताल के सूचना बोर्ड पर बैड की उपलब्धता दर्शा रही है.

जबकि अस्पताल अधीक्षक डॉ एसएस राणावत का दावा:

इस पूरे मामले में जब अधीक्षक डॉ एसएस राणावत से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने दावा किया कि किसी भी मरीज को भर्ती करने से इनकार नहीं किया जा रहा है.इतना ही नहीं सिर्फ दो कदम दूर लगे डिस्प्ले बोर्ड की गफलत को भी उन्होंने स्वीकार नहीं किया.उन्होंने कहा कि रोजाना डिस्प्ले बोर्ड को अपडेट किया जाता है.अस्पताला में बैड सम्बधित सभी अपडेट जानकारी बोर्ड पर लगाई जाती है.आइए आपको सुनाते है कि अधीक्षक साहब क्या कह रहे है.

ट्रीटमेंट को लेकर सूबे के मुखिया से लेकर चिकित्सा मंत्री तक अत्यंत गंभीर: 

कोरोना मरीजों के ट्रीटमेंट को लेकर सूबे के मुखिया से लेकर चिकित्सा मंत्री तक अत्यंत गंभीर है, लेकिन राजधानी जयपुर में ही कोविड डेडिकेटेड जयपुरिया अस्पताल मरीजों की दिक्कतें बढ़ा रहा है.इस रिपोर्ट की मंशा ये कतई नहीं है कि अस्पताल की छवि खराब की जाए लेकिन जिम्मेदारों को ये बताना बहुत जरूरी है कि गरीब तबके के लोगों के लिए वे ही बड़ी आशा की उम्मीद है.यदि सरकारी अस्पताल में भर्ती होने के लिए एप्रोच लगानी होगी तो फिर गरीब जनता किससे गुहार लगाएगी.उम्मीद है कि जिम्मेदार भी इस बात को समझेंगे और सरकार की मंशा के अनुरूप मरीजों की सेवा में जुटेंगे.

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