साउथम्प्टन Covid 19 का कहर पहुंचा उत्तर कोरिया में, मानवीय आपातकाल का खतरा

Covid 19 का कहर पहुंचा उत्तर कोरिया में, मानवीय आपातकाल का खतरा

Covid 19 का कहर पहुंचा उत्तर कोरिया में, मानवीय आपातकाल का खतरा

साउथम्प्टन: विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मार्च 2020 में Covid19 को एक महामारी घोषित किया. लेकिन उत्तर कोरिया ने हाल फिलहाल, मई 2022 में, वायरस के अपने पहले पुष्ट मामलों की सूचना दी है.

एक देश इतने समय तक बीमारी के प्रकोप से बचे रहने में कामयाब रहा:

हालांकि यह कुछ हद तक आश्चर्यजनक लग सकता है कि एक देश इतने समय तक बीमारी के प्रकोप से बचे रहने में कामयाब रहा, उत्तर कोरिया ने जनवरी 2020 से अपनी सीमाओं को सील कर दिया था, देश में या उसके बाहर कोई आवाजाही नहीं रही. तो यह प्रशंसनीय है कि वहां Covid का नामो-निशान नहीं था.

लेकिन अब, वही देश, जिसकी आबादी लगभग दो करोड़ ₨60 लाख है वायरस के ओमिक्रोन संस्करण के एक बहुत बड़े और तेजी से फैलने वाले प्रकोप का सामना कर रहा है. 17 मई तक, बुखार के 14 लाख मामले सामने आए थे, जिसमें अप्रैल के अंत से 56 मौतें हुई थीं. टेस्टिंग सुविधाओं की कथित कमी के कारण देश बुखार को Covid ​​​​संक्रमण के संकेत के रूप में मान रहा है.

इस प्रकोप के बारे में हमारे ज्ञान में बहुत बड़ा अंतर है. इसमें इंडेक्स केस शामिल: 

बेशक, हम नहीं जानते कि बुखार के इन मामलों में से कितने निश्चित रूप से Covid हैं, जो सैद्धांतिक रूप से मामलों की संख्या को ज्यादा आंक सकते हैं. साथ ही, मामलों का एक अनुपात बिना लक्षण वाला होने की संभावना है, और सीमित निगरानी के साथ मामलों की सूचना में कमी का मतलब है कि मामलों की सटीक संख्या मालूम कर पाने की संभावना नहीं है. कुछ परीक्षण हो रहे हैं, जिसमें अज्ञात संख्या में ओमिक्रोन मामलों की पुष्टि हुई है. लेकिन आखिरकार, इस प्रकोप के बारे में हमारे ज्ञान में बहुत बड़ा अंतर है. इसमें इंडेक्स केस शामिल है - वह केस जो इस प्रकोप का स्रोत था. उत्तर कोरिया के पास Covid के प्रकोप से निपटने की सुविधाएं नहीं हैं

उत्तर कोरिया में कोई ज्ञात Covid टीकाकरण कार्यक्रम नहीं है: 

Covid महामारी ने उच्च गुणवत्ता वाले वास्तविक आंकड़ों को राष्ट्रीय और वैश्विक पैमाने पर पेश करने और महामारी की सतत निगरानी के साथ ही बड़े पैमाने पर परीक्षण के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत बताई है. ऐसा लगता है कि उत्तर कोरिया में इसमें से कुछ भी नहीं है. महत्वपूर्ण रूप से, चीन और कोवैक्स से आपूर्ति के पिछले प्रस्तावों के बावजूद, उत्तर कोरिया में कोई ज्ञात Covid टीकाकरण कार्यक्रम नहीं है.

सरकार ने पहले चीन से तीस लाख सिनोवैक खुराक को लौटा दिया था, साथ ही एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को भी स्वीकार नहीं किया था. वैक्सीन के कथित साइड इफेक्ट पर चिंता जताते हुए यह कदम उठाया गया था.अब, दक्षिण कोरिया ने वैक्सीन की खुराक दान करने की पेशकश की है, लेकिन उत्तर कोरिया ने अभी तक इसे स्वीकार नहीं किया है. कुछ हद तक, उत्तर कोरिया उसी स्थिति में है जहां शेष दुनिया 2020 के मध्य तक थी.

सेना को दवाएं और आपूर्ति वितरित करने का भी आदेश दिया है:

सरकार ने राष्ट्रीय तालाबंदी का आदेश दिया है. निवासियों के लिए इसके सामाजिक-आर्थिक परिणाम होंगे, लेकिन, कुल मिलाकर, शायद एक समझदार कदम है, यह देखते हुए कि आबादी में वायरस के खिलाफ बहुत कम प्रतिरक्षा होगी, चाहे वह पूर्व संक्रमण के माध्यम से हो या टीकाकरण के सुरक्षित मार्ग से. किम जोंग-उन ने अधिकारियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र की अपर्याप्त महामारी प्रतिक्रिया के लिए उसकी आलोचना करते हुए सेना को दवाएं और आपूर्ति वितरित करने का भी आदेश दिया है.

टीकाकरण अभियान जैसे अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को लागू करने के लिए लॉकडाउन कम से कम देश को कुछ समय देगा: 

उत्तर कोरिया में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली कमजोर बताई जा रही है, खासकर राजधानी प्योंगयांग से दूर. महामारी का प्रकोप कुछ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को आसानी से प्रभावित कर सकता है. स्वास्थ्य देखभाल के अन्य क्षेत्रों पर इसका असर होगा. उदाहरण के लिए, गैर-संचारी रोगों का सामना कर रहे रोगियों की देखभाल प्रभावित हो सकती है. टीकाकरण अभियान जैसे अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को लागू करने के लिए लॉकडाउन कम से कम देश को कुछ समय देगा.

अब उत्तर कोरिया बाहरी दुनिया के प्रति अपने सामान्य संदेह को दूर करके मदद के अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों को स्वीकार करे: 

इस Covid प्रकोप से उत्तर कोरिया में बीमारी का एक बड़ा बोझ पैदा होने की संभावना है, जिससे स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी दबाव पड़ेगा. जनसंख्या को निस्संदेह बहुत नुकसान होगा, चाहे स्वास्थ्य परिणामों की सार्वजनिक रिपोर्टिंग पूर्ण परिणाम दिखाती हो या नहीं. व्यापक रूप से Covid टीकाकरण की तत्काल आवश्यकता है, विशेष रूप से वृद्ध और कमजोर लोगों के लिए. वक्त का तकाजा है कि अब उत्तर कोरिया बाहरी दुनिया के प्रति अपने सामान्य संदेह को दूर करके मदद के अंतरराष्ट्रीय प्रस्तावों को स्वीकार करे. सोर्स-भाषा 

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