जयपुर VIDEO: कोविड-19 वैक्सीन की चौथी खेप पहुंची जयपुर, कोविशिल्ड की 4 लाख 32 लाख डोज पहुंची

VIDEO: कोविड-19 वैक्सीन की चौथी खेप पहुंची जयपुर, कोविशिल्ड की 4 लाख 32 लाख डोज पहुंची

जयपुरः राजस्थान प्रदेश में 16 जनवरी से शुरू किए गए कोविड-19 टीकाकरण अभियान गति पकड़ने लगा है. टीकाकरण को लेकर प्रदेश में को कोविड वैक्सीन का पहुंचना जारी है. इसी के तहत बुधवार को एयर एशिया की फ्लाइट से कोविशील्ड वैक्सीन की चौथी खेप जयपुर पहुंची. जयपुर एयरपोर्ट से सुरक्षा इंतजामों के साथ वैक्सीन की खेप को स्टेट वैक्सीन स्टोर पहुंचाया गया.

एयर एशिया का विमान 4 लाख 32 हजार डोज लेकर पहुंचाः
जानकारी के अनुसार प्रदेश में जारी कोविड टीकाकरण अभियान को लेकर बुधवार को सीरम इंस्टीट्यूट द्वार निर्मित कोविशील्ड वैक्सीन की चौथी खेप एयर एशिया की फ्लाइट से पुणे से जयपुर पहुंची. वैक्सीन की इस खेप में कोविशील्ड की 4 लाख 32 हजार डोज लाई गई है. बुधवार को करीब 5 बजे ये विमान कोविशील्ड की खेप लेकर जयपुर पहुंचा. जयपुर एयरपोर्ट से कोविशील्ड वैक्सीन की खेप को सुरक्षा इंतजामों के साथ स्टेट वैक्सीन स्टोर पहुंचाया गया. बताया जा रहा हे कि इसके अलावा कोविशील्ड की 1 लाख 18 हजार डोज उदयपुर भेजी गई है. जबकि पांच संभागों के लिए वैक्सीन जयपुर से ही भेजी जाएगी.

इससे पहले आई थी केवल 50 प्रतिशत वैक्सीनः
उल्लेखनीय है कि कोविड टीकाकरण के लिए राजस्थान में रजिस्टर्ड हेल्थ वर्कर्स के हिसाब से अब तक केवल 50 प्रतिशत वैक्सीन ही आई थी. अब 4 लाख 32 हजार डोज के बाद अब और हेल्थ वर्कर्स को वैक्सीन लग सकेगी.

13 जनवरी को जयपुर पहुंची थी वैक्सीन की पहली खेपः
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 13 जनवरी को कोवैक्सीन की 20 हजार डोज और कोविशील्ड की 4.43 लाख डोज की दो खेप जयपुर पहुंची जबकी तीसरी खेप उदयपुर पहुंची थी. उसके बाद सरकार की और से कोरोना यौद्धाओं के लिए टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था.

16 जनवरी से पीएम ने की थी टीकाकरण अभियान की शुरुआतः
आपको बता दे कि 16 जनवरी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में कोविड टीकाकरण अभियान की शुरुआत की थी. इसके तहत अग्रिम मोर्चे पर तैनात स्वास्थ कर्मियों को दो टीके कोविशिल्ड और कोवैक्सीन लगाने के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया है. इसी के तहत कोविड-19 का टीका पूरे देश में पहुंचाया जा रहा है. आक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनिका कोविशिल्ड टीका का उत्पादन सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से किया गया है, जबकि कोवैक्सीन का उत्पादन भारत बायोटेक कर रहा है.

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