गहलोत सरकार को बदनाम करने का आपराधिक षड्यंत्र! हाथरस गैंगरेप-हत्या प्रकरण को राजस्थान से जोड़ने का षड्यंत्र

गहलोत सरकार को बदनाम करने का आपराधिक षड्यंत्र! हाथरस गैंगरेप-हत्या प्रकरण को राजस्थान से जोड़ने का षड्यंत्र

गहलोत सरकार को बदनाम करने का आपराधिक षड्यंत्र! हाथरस गैंगरेप-हत्या प्रकरण को राजस्थान से जोड़ने का षड्यंत्र

जयपुर: राजस्थान गहलोत सरकार को बदनाम करने का आपराधिक षड्यंत्र हो रहा है! हाथरस गैंगरेप-हत्या प्रकरण को राजस्थान से जोड़ने का षड्यंत्र रचा जा रहा है. कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा ऐसी कोशिशें की जा रही है. इनमें कांग्रेस के 1-2 बड़े बागी नेता भी शामिल हैं. ये लोग गहलोत सरकार को अस्थिर करने का षड्यंत्र करते रहे हैं और अब हाथरस प्रकरण को बारां-सवाई माधोपुर की घटनाओं से जोड़कर फिर ऐसी कोशिशें हो रही है, जबकि हाथरस और बारां-सवाई माधोपुर घटना का आपस में कोई संबंध नहीं है. 

युवती के परिजनों को भी शव देखने का नहीं मिला मौका:
हाथरस में एक दलित युवती के साथ गैंगरेप हुआ था. गैंगरेप के बाद बलात्कारियों ने युवती की जीभ काटी थी और इसके बाद यूपी पुलिस ने पूरे गांव को सील करके आधी रात को युवती का शव जला दिया था. युवती के परिजनों को भी शव देखने का मौका नहीं मिला. इसके बाद राहुल और प्रियंका पीड़ित परिवार से मिलने हाथरस जा रहे थे, लेकिन उन्हें ग्रेटर नोएडा में ही रोककर पुलिस ने राहुल के साथ धक्का-मुक्की की थी. 

आपकी सुरक्षा की भी हमारी जिम्मेदारी होगी:
इसके ठीक विपरित गहलोत ने जयपुर और दिल्ली के नेताओं को खुला निमंत्रण दिया. यदि आप चाहें तो खुद बारां जाकर सच्चाई जान सकते हैं. आपकी सुरक्षा की भी हमारी जिम्मेदारी होगी. अब गहलोत सरकार की इस पारदर्शिता के बावजूद कुछ लोग बारां-सवाई माधोपुर की घटनाओं को हाथरस की विभत्स घटना से जोड़ रहे. जबकि बारां में दोनों युवतियों ने मजिस्ट्रेट के सामने पहले ही बयान दे दिया. इनके साथ किसी भी तरह का दुष्कर्म नहीं होने का बयान. इसके बावजूद राजनैतिक कारणों से कुछ लोग बारां की घटना को हाथरस जैसा रंग दे रहे है,लेकिन अब सच्चाई पूरे देश के सामने आ चुकी है और अंतत: हाथरस के बहाने गहलोत सरकार को बदनाम या अस्थिर करने का षड्यंत्र  विफल हो गया.

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