मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना के तहत लेब टेक्नीशियन व सहायकों की रोजी-रोटी पर संकट 

FirstIndia Correspondent Published Date 2020/01/19 14:48

डूंगरपुर: डूंगरपुर जिले में मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना के तहत अस्पतालों में कार्यरत लेब टेक्नीशियन व लेब सहायकों  की रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है. जिला अस्पताल में मुख्यमंत्री निशुल्क जांच योजना में कार्यरत पीड़ित लेब टेक्नीशियन व लेब सहायकों ने सरकार से अपनी नौकरी बचाने की गुहार लगाईं है. 

काउंसिल की मान्यता अनिवार्य:
दरअसल राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना की शुरुआत की गई. इस दौरान जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी में लैब टेक्नीशियन व सहायक की नियुक्ति की गई, जिससे लोगों को जांच योजना का फायदा मिला. इसके बाद राज्य में पैरा मेडिकल काउंसिल के गठन किया गया और लैब टेक्नीशियन के लिए काउंसिल की मान्यता को अनिवार्य कर दिया गया. निःशुल्क जांच योजना में लगे कार्मिकों ने बताया कि जब योजना की शुरूआत हुई तब यह अनिवार्य नहीं था. इस कारण 2013 से वे अपनी सेवाएं देते आ रहे है. उनकी नियुक्ति के समय ठेका पद्धति से उन्हें आरएमआरएस में समायोजित कर दिया गया. 

नौकरी को लेकर असुरक्षित:
लैब तकनीशियनों ने बताया कि पिछले दिनों मेडिकल कॉलेज में यूटीबी पर कार्यरत 17 टेक्नीशियनों को पैरामेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण निकाल दिया गया है. ऐसे में निःशुल्क जांच योजना में कार्यरत लैब तकनीशियनों व सहायकों में भी अपनी नौकरी को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे है. ऐसे में निःशुल्क जांच योजना के कार्मिकों ने नोकरी बचाने के लिए प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, मेडिकल कॉलेज प्राचार्य व सरकार से गुहार लगाई है. 

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