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स्वर्णनगरी के पर्यटन अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल, बाजार मंदी झेलने को मजबूर

स्वर्णनगरी के पर्यटन अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल, बाजार मंदी झेलने को मजबूर

जैसलमेर: स्वर्णनगरी की अर्थव्यवस्था यहां के पर्यटन पर निर्भर है, फिलहाल पर्यटन पिट रहा है तो बाजार मंदी झेलने को मजबूर है. समय रहते हालात नहीं सुधारे तो जैसलमेर शहर के लिए बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है. यहां का पर्यटन खत्म हो जाएगा और स्थाई तौर पर मंदी झेलनी पड़ेगी. बाजार में पैसे का टर्न ऑवर नहीं हो रहा है जिससे व्यवसायी भी परेशान है. सैलानियों की आवक में कमी शहर के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है.  

इस बार 60 प्रतिशत सैलानी कम आए: 
जैसलमेर में जुलाई अगस्त माह में जहां हर साल 80 हजार से 1 लाख सैलानी आते हैं वहीं इस बार यह आंकड़ा 37 हजार तक ही पहुंचा है. यानि 60 प्रतिशत सैलानी कम आए. सीजन का पहला पड़ाव तो मंदी की मार झेल चुका है और अब पर्यटन व्यवसायियों को सीजन के दूसरे पड़ाव से उम्मीद है. साल दर साल सैलानियों की आवक में कमी जैसलमेर के पर्यटन को बहुत बड़ा झटका है. विदेशी सैलानियों की आवक तो एकदम कम हो रही है जैसलमेर का पर्यटन विदेशी पर्यटकों से ही गुलजार रहता था, लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां विदेशी सैलानियों की आवक में कमी आई है. इस बार तो कमी बहुत ज्यादा देखने को मिल रही है. विदेशी सैलानियों का पीक सीजन जुलाई व अगस्त माह होता था. इस दौरान फ्रांस व स्पेन के हजारों पर्यटक आते थे, लेकिन इस बार इन दो माह में 8500 विदेशी पर्यटक भी नहीं आए. 

क्या सैलानियों का जैसलमेर से मोह भंग हो रहा है ? 
विदेशी सैलानियों की आवक में कमी के पीछे उनका जैसलमेर से मोहभंग होना बताया जा रहा है. जैसलमेर की छवि जो पहले थी अब नहीं रही है. यहां की स्थानीय समस्याएं पर्यटन बिगाड़ने में भारी पड़ रही है. लपकों की समस्या का पुलिस व प्रशासन निस्तारण नहीं कर सके, ऐसे में सैलानियों के साथ ठगी व दुर्व्यवहार के मामले लगातार चलते रहे. इससे परेशान होकर विदेशी पर्यटक अब यहां आने से कतराने लगे हैं. हवाई सेवा शुरू होने का फायदा नहीं गत साल हवाई कनेक्टिविटी का फायदा यह हुआ कि जैसलमेर में देसी पर्यटकों की रिकार्ड आवक हुई, ऐसे में विदेशी सैलानियों की आवक पर हवाई कनेक्टिविटी का कोई खास असर नहीं हुआ है. जुलाई व अगस्त माह में इतने कम सैलानी आए हैं मानो हवाई सेवा शुरू होने का इस पर्यटन सीजन में कोई फायदा नहीं हुआ. हालांकि इन दोनों माह में दिल्ली व मुंबई की फ्लाइट शुरू नहीं थी. हवाई सेवा शुरू होने से पहले ऐसा लग रहा था कि जैसलमेर के पर्यटन को काफी लाभ होगा, लेकिन अभी तक ऐसा नजर नहीं आ रहा है. समय रहते हालात नहीं सुधरने तो पर्यटन खत्म हो जाएगा जिस तरह से जैसलमेर में सैलानियों की आवक का ग्राफ तेजी से गिर रहा है उससे तो ऐसा लग रहा है आगामी कुछ सालों में यहां का पर्यटन खत्म हो जाएगा. 

जैसलमेर में पर्यटन नगरी जैसी कोई सुविधाएं नहीं है. न तो प्रशासन, न नगरपरिषद, न सरकारें और न ही हम इसे लेकर सजग हैं. जानकार बताते हैं कि एक बार किसी शहर से पर्यटकों का मोहभंग हो गया तो समझो आगामी कई सालों तक उसे विकसित करने के लिए मशक्कत करनी पड़ेगी.  

जिम्मेदार कौन ?
शहरवासी : जो शहर को साफ सुथरा रखने को लेकर जागरूक नहीं. 
पर्यटन व्यवसायी : जो पर्यटन नगरी की व्यवस्थाएं सुधारने में सहयोग नहीं कर रहे. 
जिला प्रशासन : पर्यटन को बढ़ाने के लिए प्रयास नहीं, नए पर्यटन क्षेत्र तलाशने व विकसित करने के प्रति सजग नहीं. 
सरकार : स्वर्णनगरी के पर्यटन के लिए विशेष पैकेज नहीं दे रही. 
नगरपरिषद : 5 किमी दायरे में फैले शहर को साफ सुथरा, विकसित व पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने में विफल.  
लपके : जो पर्यटन के लिए नासूर बन चुके हैं. सैलानियों के साथ ठगी व दुर्व्यवहार करने वाले.    

 

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लुप्तप्राय पक्षी गोडावण को लेकर अनदेखी, तीन साल से नहीं हुई गणना

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जैसलमेर: गोडावण लुप्त प्राय पक्षी है. इसके संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर अब तक करोड़ों रुपए खर्च हो चुके हैं. लेकिन गोडावण को बचाने के प्रयास विफल होते जा रहे हैं. गोडावण की वास्तविक संख्या कितनी है यह जिम्मेदारों को भी पता नहीं है. हालांकि तीन साल पहले वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ने इसकी गणना की थी, लेकिन गणना के आंकड़ों को हमेशा छिपाया जाता है. हकीकत में कितने गोडावण है वह गोडावण संरक्षण में लगे जिम्मेदारों को भी पता नहीं है. ऐसे में विलुप्त प्राय राज्य पक्षी को लेकर बरती जा रही लापरवाही समझ से परे है. जानकारों के अनुसार जहां गोडावण की गणना साल में दो बार होनी चाहिए वहीं यहां तो तीन साल होने जा रहे हैं और गणना ही नहीं की गई. यह कैसा संरक्षण का प्रयास है. 

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इस बार भी गणना को लेकर संशय बरकरार: 
बताया जा रहा है कि मार्च 2017 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून की ओर से गोडावण की गणना की गई थी. उसके बाद आज तक गणना नहीं हुई है. इस बार भी गणना को लेकर संशय बरकरार है. सूत्रों के अनुसार वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की ओर से इस बार भी गणना नहीं की जाएगी. एक तरफ गोडावण संरक्षण को लेकर जोर शोर से प्रयास करने की बात की जा रही है तो दूसरी तरफ गणना को लेकर जिम्मेदार पीछे हट रहे हैं. गोडावण का प्रजनन काल अप्रैल से सितंबर माह तक रहता है. गत वर्ष इस दौरान 25 मादा गोडावण ने प्रजनन किया था. इसमें से प्रजनन केन्द्र के लिए 9 अंडे उठाए गए थे.

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इस बार प्रजनन कम होने की आशंका:
इस बार अप्रैल से लेकर अब तक तीन नन्हें गोडावण ही नजर आए हैं. ऐसे में इस बार प्रजनन कम होने की आशंका है. गोडावण संरक्षण के प्रयास देश विदेश के विशेषज्ञ भी कर रहे हैं. करोड़ों रुपए खर्च भी किए गए हैं. लेकिन अभी तक जानकार गोडावण की संख्या को लेकर भी क्लियर नहीं है. इसके आंकड़ों के मकड़जाल में फंसे हुए हैं. वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की गणना में स्पष्ट संख्या नहीं बताई जाती है. जब तक संख्या को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होगी तब तक बेहतर तरीके से संरक्षण के प्रयास नहीं हो सकेंगे. 

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जैसलेमर: सीमा पार पाकिस्तान से जैसलमेर सहित पश्चिमी राजस्थान में कई दिनों से टिड्डी दल का आगमन हो रहा है. इससे निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकार हर प्रकार के जतन कर रही है. हाल ही में जैसलमेर सहित पश्चिमी राजस्थान में ड्रोन और अन्य संसाधनों के अलावा हेलीकॉप्टर से भी टिड्डियों पर दवाओं का छिड़काव कराया जा रहा है. हालांकि किसानों और सरकार के लिए आफत बनी टिड्डी गोडावण सहित कई अन्य वन्य जीवों के लिए वरदान साबित हो रही है. 

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टिड्डियां बेहतर पौष्टिक आहार का विकल्प:
जैसलमेर में राष्ट्रीय मरु उद्यान और उसके आसपास के इलाकों में गोडावण सहित कई वन्यजीवों के लिए टिड्डियां बेहतर पौष्टिक आहार का विकल्प बनी हुईं हैं. उम्मीद लगाई जा रही है कि इस बार गोडावण के प्रजनन में इसका असर दिखेगा और बेहतर परिणाम सामने आएंगे.राष्ट्रीय मरु उद्यान के अधिकारी डॉ. कपिल चंद्रवाल ने बताया कि टिड्डियों के आगमन का सर्वाधिक लाभ इस बार राज्य पक्षी गोडावण ने उठाया है.

टिड्डी में होता है भरपूर मात्रा में प्रोटीन:
उनका कहना है कि टिड्डी में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है और वन्यजीवों को पर्याप्त मात्रा में पोष्टिक आहार मिले तो उसके शरीर का विकास अच्छा होता है और शारीरिक क्रियाएं बेहतर ढंग से कार्य करती हैं. ऐसे में उम्मीद है कि टिड्डियों का सेवन गोडावण के प्रजनन में काफी लाभकारी सिद्ध होगा जिसका परिणाम बेहतर होगा. 

टिड्डी गोडावण का पसंदीदा आहार:
गौरतलब है कि प्रोटीन युक्त पोष्टिक आहार होने के साथ-साथ टिड्डी गोडावण का पसंदीदा आहार भी है, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता बढ़ सकती है. सामान्यतः गोडावण यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड शर्मिला पक्षी होता है और यह 1 वर्ष में एक अंडा ही देता है. कभी-कभी तो गोडावण 2 से 3 वर्ष में एक अंडा देता है. जिस कारण इसकी प्रजाति पर विलुप्त होने का संकट भी मंडराता रहता है. हांलाकि पिछले वर्ष जैसलमेर में गोडावण के 10 अंडे मिले थे, जिससे चूजे भी निकल आए हैं. इनका सुदासरी स्थित हैचरी में संरक्षण किया जा रहा है.

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मरुधरा में आकर्षित कर रहा है ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय पक्षी एमू

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जैसलमेर: आमतौर पर आप ने ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय पक्षी एमू टीवी या किसी विशेष स्थानों पर देखा होगा लेकिन यह एमु पक्षी जैसलमेर के मरुस्थल में देख हर को अचंम्भित हो जाता है. जैसलमेर से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित आकल वुड फॉसिल पार्क में ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय पक्षी एमू आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. आकल वुड फॉसिल पार्क में एमू के होने से लोगों में इसके प्रति क्रेज बढ़ गया है. लोग आकल वुड फॉसिल पार्क के साथ एमू के साथ समय भी बिता रहे हैं.

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सेल्फी लेने के बाद एमू एक अजीब आवाज निकालता है: 
आमतौर लोग छोटे पक्षियों में चिड़िया, तोता, कबूतर व थोड़े बड़े में गोडावण के प्रति आकर्षित है. लेकिन इस विशालकाय पक्षी के इस क्षेत्र में मिलने के कारण लोगों में इसे देखने का जबरदस्त क्रेज है. ऑस्ट्रेलिया का विशालकाय पक्षी एमू शतुरमुर्ग के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी है. इसकी ऊंचाई लगभग 2 मीटर होती है जिससे यह आम लोगों के साथ घुलमिल भी जाता है. एमू पक्षी विशालकाय होने के साथ ही एक अजीब आवाज भी निकालता है. लोगों में सेल्फी लेने की दीवानगी को देख देखकर अब यह आस्ट्रेलियन पक्षी भी सेल्फी का शौकीन हो गया है. वुड फॉसिल पार्क में घुमने आने वालों के साथ यह पक्षी स्वत: ही आकर खड़ा हो जाता है जिसका मतलब सेल्फी लेना होता है. उसके बाद लोग इसकी गर्दन पर हाथ रखने के साथ ही बड़े शौक के साथ सेल्फी लेते हैं. अपने साथ सेल्फी लेने वाले के साथ सेल्फी लेने के बाद एमू एक अजीब आवाज निकालता है. जिससे पास में खड़ा व्यक्ति एकबारगी डर भी जाता है. लेकिन यह पक्षी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है. जिससे लोग इसके साथ खड़े होकर सेल्फी खिंचवाते है. 

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एमू की टांगे मजबूत और शक्तिशाली होती है:
डीएनपी के अधिकारी बताते है की एमू ऑस्ट्रेलिया का पक्षी है. लोग अंडे बेचने के लालच में इन्हें यहां ले आए होंगे. लेकिन उसके बाद उन्होंने इसे छोड़ दिया है. हालांकि यह वन्यजीव में नहीं आता है लेकिन पार्क के कर्मचारियों ने अपने पास रख लिया है. अब यह उनसे घुलमिल भी गया है. एमू के पंख बड़े चमकीले और सुन्दर होते हैं. नर तथा मादा दोनों के गले के पास एक विचित्र सी थैली होती है, जिसमें हवा भर कर यह अनोखी आवाज निकालता है. एमू की टांगे मजबूत और शक्तिशाली होती है. इनकी सहायता से यह पचास कि. मी. प्रति घंटा की गति से सरलता से भाग सकता है. एमू के पैरो में कैसोवरी के समान कोई तेज धारदार काँटा तो नहीं होता, फिर भी इसकी ठोकर शुतुरमुर्ग तथा कैसोवरी के समान ही खतरनाक होती है. सामान्यतया यह अपने शत्रुओं से डर कर भागता नहीं है, बल्कि उनका मुकाबला करता है. जैसलमेर के मरुस्थल में इस पक्षी को देख हर कोई मोहित हो रहा है.  

ईडी ने नीरव मोदी पर कसा शिकंजा, जैसलमेर में 12 पवनचक्की जब्त

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जैसलेमर: मुम्बई में पंजाब नेशनल बैंक की एक शाखा से कथित रूप से 2 अरब डॉलर का कर्ज लेकर भारत से फरार चल रहे भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ सरकार और प्रवर्तन निर्देशालय अब और अधिक सख्त हो गया है. हाल ही मुम्बई सहित कई अन्य ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए ईडी ने नीरव मोदी की करोड़ों की सम्पति जब्त की है. 

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12 पवन उर्जा संयंत्र जब्त:
इसी कड़ी में जैसलमेर जिले मे नीरव मोदी के भाई निशाल मोदी के नाम से पंजीकृत चार शैल कम्पनियों के 12 पवन उर्जा संयंत्रों को जब्त करने की कार्रवाई की गई है.जानकारी के मुताबिक जैसलमेर जिले के जोधा गांव के पास विन वर्ल्ड कंपनी के 800 किलो वॉट की 12 पवन चक्कियां जो की नीरव मोदी के भाई निशाल मोदी के नाम पंजीकृत सोलर एक्पोर्ट, स्टैलर डायमंड, डायमंड आर अस और निशाल मर्चेंडाइंग प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के नाम थी उन्हें हाल ही में जब्त किया गया है.

50 से 52 करोड़ की संपति की गई जब्त:
गौरतलब है कि इन पवन उर्जा संयंत्रों को ईडी द्धारा 2018 में कार्रवाई के दौरान अटैच किया गया था लेकिन अब इसे ईडी ने जब्त कर दिया है. जानकारी के मुताबिक ईडी की इस कार्रवाई के बाद इन पवन उर्जा संयत्रों पर बिजली का उत्पादन बंद कर दिया जाएगा. विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक एक विंड मिल प्रोजेक्ट का अनुमानित बाजार मूल्य 4 से 4.50 करोड़ रुपए है ऐसे में ईडी की इस कार्रवाई से लगभग 50 से 52 करोड़ की संपति जब्त की गई है.

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सरहदी जिले का एक अनूठा पुलिस थाना, 27 सालों में बलात्कार का एक भी मुकदमा नहीं हुआ दर्ज

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जैसलमेर: जिले में एक थाना ऐसा भी है जहां 27 वर्ष में महज 60 मुकदमे दर्ज हुए हैं और जहां पुलिस कर्मियों के पास कोई काम ही नहीं है. कई बार पूरे साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता. इस थाने को 27 साल तक हेड कांस्टेबल ही संभालता रहा है. शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है, जहां 27 वर्ष में महज 60 मुकदमे दर्ज हुए हैं. थाना वीरान मरुस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई मनुष्य मुश्किल से ही नजर आता है. आइए बताते है ऐसे थाने की कहानी... 

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यह थाना अपने आप में मिसाल बना हुआ:  
देश के अमूमन लगभग हर थाना क्षेत्र में प्रतिदिन हत्या, बलात्कार और चोरी-डकैती के मामले बड़ी संख्या में दर्ज होते रहते हैं. वहीं, राजस्थान के जैसलमेर से लगती अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर एक ऐसा पुलिस थाना मौजूद है जो अपने आपमें काफी अनूठा है. जी हां, इस पुलिस थाने में पूरे साल एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता है. अगर कभी एक दो मामले दर्ज होते भी हैं तो वो भी छोटी-मोटी चोरी का. पिछले 27 सालों में 1993 में पुलिस थाना शुरू होने के बाद यानी अभी तक एक भी बलात्कार का मामला दर्ज नहीं हुआ है. हत्या तो बहुत दूर की बात है. यह थाना अपने आप में मिसाल बना हुआ है. इस थाने का नाम शाहगढ़ बल्ज है. यह थाना राजस्थान के जैसलमेर से लगती अन्तर्राष्ट्रीय सीमा के मात्र 15 किलोमीटर पर बना हुआ है. इस थाने में 27 सालों से धारा 302 यानी हत्या का मुकदमा व 307 यानी हत्या के प्रयास का एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. इस थाने के आसपास ढांणियों में रहने वाले ग्रामीण इतने प्रेम व भाई चारे के साथ यहां रहते हैं कि 27 सालों में मात्र यहां करीब 60 मुकदमे ही दर्ज हुए हैं. इस वर्ष 6 महीनों में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. न ही कभी किसी महिला और पुरुष कैदी को थाने की जेल में कैद रखा गया. 

महिला और पुरुष बैरक भी अपराधियों के लिए तरस रही: 
भारत-पाक सीमा के निकट शाहगढ़ बल्ज पर बना हुआ थाना सचमुच एक ऐसी मिसाल बना हुआ है. जहां अपराध का दूर-दूर तक वास्ता नहीं है. इस थाने की सबसे बड़ी दिलचस्प बात यह है कि शाहगढ़ क्षेत्र में इस थाने की एक मात्र बिल्डिंग बनी हुई है. आसपास कई गांव, कई कस्बे हैं, जहां करीब 4000 की आबादी वाले इस क्षेत्र में ग्रामीण दूर-दूर ढांणियों में रहते हैं. इस थाने की बिल्डिंग में बने हुए महिला और पुरुष बैरक भी अपराधियों के लिए तरस रही है. जानकारी के मुताबिक, महिला बैरक में आज तक किसी महिला कैदी को नहीं रखा गया है क्योंकि किसी महिला-पुरुष पर गंभीर अपराध का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. यही स्थिति पुरुष बैरक की भी बनी हुई है. हालांकि, इस थाने की एक समस्या है कि यहां आवागमन के साधन नहीं हैं. जैसलमेर शहर जाना हो तो वहां से गुजरने वाले बी.एस.एफ के वाहनों में लिफ्ट लेकर ही आगे जाया जा सकता है.

अब तक करीब 60 मुकदमे ही इस थाने में दर्ज हुए:
इस थाने पर इंस्पेक्टर सहित कुल 15 पुलिसकर्मियों की स्ट्रेन्थ हैं लेकिन यहां वर्तमान में एक सब इंस्पेक्टर सहित 9 पुलिसकर्मी तैनात है. 1995 में तारबंदी से पूर्व सीमा पार होने वाली तस्करी व सीमाई अपराध घटित होते रहते थे लेकिन तारबंदी के बाद से तस्करी और अन्य अवांछनीय गतिविधियों में विराम लग गया है. 1993 में इस थाने की स्थापना हुई थी तब से लेकर अब तक करीब 60 मुकदमे ही इस थाने में दर्ज हुए हैं. पिछले कुछ सालों का आंकड़ा देखे तो इस थाने में 2005 में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. 2006 में एक, 2007 में दो, 2008 में एक 2009 में जीरो, 2010 में जीरो, 2011 में एक, 2012 में चार, 2013 में दो, 2014 में दो, 2015 में तीन मुकदमे दर्ज हुए जबकि 2016 में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. 2019 में 2 मुकदमे दर्ज हुए थे जबकि इस साल अभी तक एक भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है. ये अपराध रहित थाना पूरे देश में एक मिसाल बना हुआ है. 

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कई साल बीत जाने के बावजूद भी मुकदमे दर्ज नहीं होते:
शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है. सबसे बड़ी बात है कि 60 मुकदमे में एक भी केस दुष्कर्म का नहीं है. थाना वीरान मरस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई आदमी मुश्किल से ही नजर आता है. यहां रिपोर्ट दर्ज कराना भी मुश्किल काम है, क्योंकि थाने तक पहुंचने में करीब एक डेढ़ घंटा लगता है. वहीं इस थाने में तैनात पुलिसकर्मी और थाने के आसपास रहने वाले ग्रामीण बताते हैं कि यहां पर कई साल बीत जाने के बावजूद भी मुकदमे दर्ज नहीं होते. छोटे-मोटे मामले मिल बैठ कर निपटा लेते हैं. 

कल से शुरू होगी एलडीसी की काउंसलिंग, विभाग ने सभी तैयारियां की पूर्ण

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जैसलमेर: जिले में शिक्षा विभाग द्वारा कनिष्ठ सहायक के पद पर 2018 की सीधी भर्ती में चयन के बाद जिला आवंटन होने पर आगामी 8 से 10 जुलाई तक काउंसलिंग आयोजित कर चयनित अभ्यर्थियों को ज्वाइनिंग दी जाएगी. राबाउमावि जैसलमेर में 8 से 10 जुलाई तक आयोजित काउंसलिंग में 133 चयनित अभ्यर्थी भाग लेंगे. यह पहला मौका होगा जब शिक्षा विभाग में कनिष्ठ लिपिकों के सभी पद भर जाएंगे. इन चयनित अभ्यर्थियों को शिक्षा विभाग के कार्यालयों तथा विद्यालयों में ज्वाइनिंग दी जाएगी. 

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8 से 10 जुलाई तक काउंसलिंग का आयोजन किया जाएगा: 
जैसलमेर में 133 चयनित अभ्यर्थियों के लिए 8 से 10 जुलाई तक काउंसलिंग का आयोजन किया जाएगा. काउंसलिंग में सुबह 8 से 10 बजे तक रजिस्ट्रेशन तथा उसके बाद अभ्यर्थी की काउंसलिंग होगी. 8 जुलाई को वरियता क्रमांक 1 से 45 तक में दिव्यांग, एकल महिला, पति-पत्नि पूर्व से राज्य सेवा, 9 जुलाई को वरियता क्रमांक 46 से 90 तक तथा 10 जुलाई को वरियता क्रमांक 91 से 133 तक की काउंसलिंग आयोजित की जाएगी. अगर 8 से शुरू हो रही काउंसलिंग में सभी चयनित अभ्यर्थी भाग लेते तो ऐसा पहली बार होगा जब शिक्षा विभाग में एलडीसी के सभी पद भर जाएंगे.

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शिक्षा विभाग में कनिष्ठ लिपिकों के 133 पद रिक्त:
इससे पहले शिक्षा विभाग में कर्मचारियों के पद खाली थे. जैसलमेर के शिक्षा विभाग में कनिष्ठ लिपिकों के 133 पद रिक्त है. जिसे अब काउंसलिंग के माध्यम से भरा जाएगा. प्रदेश के अलग अलग जिलों से 133 अभ्यर्थी जैसलमेर में काउंसलिंग करवाने आएंगे. इसके बाद शिक्षा विभाग द्वारा काउंसलिंग के आधार पर अभ्यर्थियों को ज्वाइनिंग दी जाएगी. 

हवा में उड़ती आफत टिड्डियों को लेकर विभाग अलर्ट, अगस्त में पाकिस्तान के रास्ते देश में एंट्री करेगा करोड़ों टिड्डियों का दल

हवा में उड़ती आफत टिड्डियों को लेकर विभाग अलर्ट, अगस्त में पाकिस्तान के रास्ते देश में एंट्री करेगा करोड़ों टिड्डियों का दल

जैसलमेर: पाकिस्तान के रास्ते भारत आया टिड्डी दल फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. खासतौर पर राजस्थान के कई जिलों में इनका असर सबसे ज्यादा है. कई किलोमीटर लंबे टिड्डी दल राजस्थान के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में बार-बार हमला कर रहे हैं. टिड्डी दल के हमले से अब पाकिस्तान बॉर्डर से लगे राजस्थान के जिलों में किसानों पर आफत आ गई है. अब अगस्त में एक बार फिर पाकिस्तान के रास्ते कारोड़ों टिड्डियों का दल भारत में आ सकता है. राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त में टिड्डी दल के हमलों में बढ़ोतरी हो सकती है. मानसून का सीजन शुरू हो चुका है, और बारिश में टिड्डियां ज्यादा अंडे देती हैं. 

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अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी:  
टिड्डी दलों के हमले से अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है. राजस्थान के कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अब हमले ज्यादा बड़े और लगातार होंगे. इन हमलों से यदि प्रदेश की 10 प्रतिशत फसल भी बर्बाद हुई तो नुकसान का आंकड़ा लगभग 4 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है. कृषि विशेषज्ञों एवं अधिकारियों की आशंका और अब तक हुए हमलों को ध्यान में रखते हुए टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने हेलीकॉप्टर से कीटनाशक स्प्रे कराने का प्रबंध किया है. वहीं राज्य सरकार जमीनी स्तर पर कीटनाशक का स्प्रे कराने के साथ ही अन्य आवश्यक कदम उठा रही है. फायर ब्रिगेड, ड्रोन व ट्रेक्टर का सहारा लेकर इन पर नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है. 

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टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई:
जैसलमेर में टिड्डी नियंत्रण अधिकारी राजेश कुमार व कृषि उपनिदेशक राधेश्याम नारवाल ने बताया कि जैसलमेर जिले में आज  टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई. जैसलमेर जिले के धनाना क्षेत्र में 140 आर.डी क्षेत्र में हेलिकॉप्टर से कीटनाशक का स्प्रे कर 50 से ज्यादा हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण किया गया. इसके साथ ही जिले में रविवार को कुल 351 हेक्टेयर क्षेत्र मे टिड्डी नियंत्रण किया गया जिनमें पोकरण, डेलासर, एकां, अमीरों की बस्ती प्रमुख रूप से शामिल है. उन्होंने बताया कि जैसलमेर में 908 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण की कार्यवाही की गई. जिले के मुल्ताना, फतेहगढ़, बांधा, ओला, सोढ़ाकर पोकरण, दूधिया आदि क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर, ड्रोन, व्हीकल माउंटेन स्प्रेयर के जरिए टिड्डी नियंत्रण किया गया. 

सीमा पार से आई टिड्डियों पर 'एयर स्ट्राइक' जारी

सीमा पार से आई टिड्डियों पर 'एयर स्ट्राइक' जारी

जैसलमेर: पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान से आने वाले टिड्डी दलों पर जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर से धावा जारी है. जैसलमेर जिले में टिड्डी नियंत्रण में अब हैलिकॉप्टर की मदद भी ली जा रही है. रविवार को जिले के 140 आरडी क्षेत्र में  हैलिकॉप्टर से कीटनाशक का स्प्रे कर टिड्डी नियंत्रण किया गया. टिड्डियों के पड़ाव की सूचना विभाग को मिलने के बाद किसानों की फसलों व अन्य वनस्पति के लिए आतंक का सबब बने इन अवांछित मेहमानों पर एयर स्ट्राइक की जा रही है.

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हेलीकॉप्टर में पेस्टिसाइड और जरूरी पानी का बंदोबस्त किया गया: 
जिले में निजी कंपनी के एक हेलीकॉप्टर ने शनिवार सुबह जैसलमेर के पुलिस लाइन मैदान में बने हेलीपैड से उड़ान भरी. इससे पहले वहां हेलीकॉप्टर में पेस्टिसाइड और जरूरी पानी का बंदोबस्त किया गया. टिड्डी नियंत्रण अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जिले के विभिन्न स्थानों पर कुल 351 हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण कार्य किया गया. इसमें अमीरों की बस्ती में 25 हैक्टेयर, 138 से 162 आरडी में 80 हैक्टेयर, डेलासर में 60 हैक्टेयर तथा एका, पोकरण में 150 हैक्टेयर में नियंत्रण किया गया. इसी प्रकार ड्रोन से 36 हैक्टेयर में टिड्डी नियंत्रण किया गया. इनमें डेलासर में 20 हैक्टेयर तथा एका, पोकरण में 16 हैक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन से टिड्डी नियंत्रण कार्य को अंजाम दिया गया. 

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