बढ़ती साइबर ठगी का शिकार होता उपभोक्ता, मामलों से बचती पुलिस

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/05/17 02:24

नोहर: तकनीकों का विकास हमारी जीवनशैली को सरल बनाने के उद्देश्य से हुआ था, लेकिन वर्तमान में यही तकनीक अपराध का जरिया बनती जा रही है. इससे आमजन यह सोचने को मजबूर हो गया है कि वह आधुनिकता के साथ कदमताल करे या फिर उसी पूराने ढर्रे पर चलता हुआ खुद को सुरक्षित रखे.

एटीएम क्लोन, फर्जी फोन कॉलस और मनी ट्रांसफर जैसे माध्यमों से लोग रोज किसी न किसी रूप में ठगी के शिकार हो रहे हैं, लेकिन पुलिस ऐसे मामलों में रूचि नहीं दिखाती जिससे पीडि़त की अधिक मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है. क्योंकि मामला साइबर क्राइम से जुड़ा हुआ होता है और अधिकांश जिलों में पुलिस के साइबर क्राइम थाने नहीं है. तो ऐसे में मामले की तह तक पहुंचने में ही पुलिस को भारी माथा पच्ची करनी पड़ती है. इससे परेशान पुलिस ऐसे मामलों में रूचि नहीं दिखाती. नतीजन साइबर क्राइम से जुड़े मामले महज एप्लीकेशन तक सिमट कर रह जाते हैं.

बैंकिग साइबर क्राइम से जुड़े मामलों की बात करें तो अकेले नोहर थाना में गत सालभर में ही एक दर्जन मामले सामने आ चुके हैं. ये संख्या तो केवल दर्ज मामलों की है जबकि अनेक मामले तो दर्ज ही नहीं हो पाते। ऐसे में लोग आए दिन साइबर ठगी के शिकार हो रहे हैं.

क्यों बचती है पुलिस ऐसे मामलों से?

बैंकिग साइबर क्राइम से जुड़ा मामला सामने आने पर पुलिस बचती सी नजर आती है. इसका मुख्य कारण यह है कि साइबर क्राइम से निपटने के लिए पुलिस की अलग शाखा होती है. उसमें विशेष तौर पर प्रशिक्षित टीम कार्य करती है. लेकिन सभी जिला या थानास्तर पर यह सुविधा नहीं हैं. इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस को अधिक माथापच्ची करनी पड़ती है और वो भी अक्सर बेनतीजा। तो पुलिस ऐसे मामलों से किनारा करती ही नजर आती है.

जागरुकता ही है बचाव
साइबर क्राइम को रोकने के लिए हमारी जागरुकता ही बचाव का काम करती है. बैंकिग साइबर क्राइम मामलों में देखने को मिलता है कि एटीएम प्रयोग के दौरान हम अनजान व्यक्ति की मदद ले लेते हैं जो हमारे लिए ठगी का कारण साबित होती है. इसके अलावा फर्जी फोन कॉल्स के कारण भी हम ठगे जाते हैं. ऐसे कॉल करने वाले का हम बातों ही बातों हमारी बैंक से जुड़ी गोपनीय जानकारी बता देते हैं जिस कारण हमारे अकाउंट से रकम ट्रांसफर कर ली जाती है. अगर हम इन मामलों में थोड़ा सा भी ऐतिहात बरतें तो हम साइबर ठगी के शिकार होने से बच सकते हैं.

ऐसे हुए लोग ठगी के शिकार
12 मई 2019 को नोहर के प्रकाशचंद्र अग्रवाल के पास फर्जी कॉल आया. ठग ने किसी परिचित का नाम बताकर अपने अकाउंट में एक लाख रुपए डलवाने की बात कही. पेटीएम और फोन पे के माध्यम से करीब 65 हजार रुपए ट्रांसफर करने के बाद जब रुपये पहुंचने की पुष्टि की गई तो संबंधित व्यक्ति ने ऐसी फोन से इंकार कर दिया. इसके बाद प्रकाशचंद्र ने पड़ताल की तो मामला ठगी का निकला. अब प्रकाशचंद्र मामला दर्ज करवाने के लिए पुलिस थाने के चक्कर लगा रहा है, लेकिन पुलिस यह कहकर टरका रही है कि यह आपकी लापरवाही से हुआ है.
गांव चारणवासी निवासी जगदीश मेघवाल 1 अप्रेल 2019 को एटीएम से रुपए निकलवाने आया. एटीएम ऑपरेट करने के लिए एक अज्ञात शख्स की मदद ली तो करीब एक लाख 15 हजार की चंपत लग गई। मामला एक्सिस बैंक एटीएम का है.

कपड़ा व्यापारी चंपालाल राणिया को फोन कॉल से करीब 30 हजार की चंपत लगी। नगर पालिका कर्मचारी पवन कुमार के खाते से किसी अज्ञात व्यक्ति ने दिल्ली बैठे 60 हजार रुपए निकलवा लिए। घटना जनवरी 2019 की है। 28 अक्टूबर 2018 को सुखराम मेघवाल के एटीएम का क्लोन बनाकर 99 हजार 726 रुपए का चुना लगा दिया गया।

यहां मिली पुलिस को सफलता
एटीएम बदलकर ठगी करने के मामले में पुलिस ने सीकर जिले के नीमकाथाना के गांव न्यौराना 20 वर्षिय बी.टेक के छात्र मनीष मीणा को पकड़ा। मनीष ने गंगानगर, चूरू, हनुमानगढ़, बीकानेर, हनुमानगढ़, सिरसा, नारनौल, डबवाली, झुंझुनू, रावतसर और नोहर में करीब 20 लाख रुपए से अधिक की वारदात करनी कबूली। मनीष के पिता राजस्थान पुलिस से एएसआई हैं।

वर्ष 2018 के एक मामले में पुलिस ने नोहर के वार्ड़ 5 निवासी अयूब खान को गिरफ्तार किया। दो मामलों में अयूब ने एटीएम बदलकर 80,400 और 14,500 रुपए निकाले थे। पुलिस अयूब से महज 2500 रुपए की रिकवरी ही कर पाई।

यहां की गैंग रहती है सक्रिय
एटीएम बदलकर ठगी के मामलों में हरियाणा क्षेत्र के हांसी, करनाल, सोहना, बाटा, दिल्ली, यूपी के कई जिलों की गैंग सक्रिय रहती हैं। जबकि फर्जी फोन कॉल्स के मामलों में झारखंड के गिरोह सक्रिय होनें की सूचना है।

हनुमानगढ़ के नोहर से रोहताश सैनी की रिपोर्ट
 

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