दारा सिंह एनकाउंटर मामले में आया नया मोड़, कई नेताओं के खिलाफ कोर्ट ने दिये FIR दर्ज करने के आदेश

Nizam Kantaliya Published Date 2020/01/09 18:18

जयपुर: देशभर में बहुचर्चित हुए दारासिंह एनकाउंटर केस में नये मोड़ आ गया है. मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाली दारासिंह की पत्नी सुशीलादेवी की ओर से पूर्व मंत्री राजेंद्र राठौड़, राजाराम मील, शेर सिंह पूनियां सहित कई नेताओं के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए है. जयपुर की निचली अदालत में दारा सिंह के पुत्र की ओर से पेश किए गए एक परिवाद में अब कोर्ट ने इन सभी नेताओं के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करने के आदेश दिए हैं. 

पूर्व मंत्री सहित 23 अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश:
राजस्थान की सियासत को हिला देने वाले दारासिंह एनकाउंटर केस एक बार फिर से चर्चा में आ गया है. दारासिंह के पुत्र अमित बेनीवाल की ओर से पेश किए गए परिवाद पर जयपुर की निचली अदालत ने भाजपा नेता और पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ सहित 23 अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश दिये है. परिवाद में कहा गया है कि दारासिंह की पत्नी सुशीला को डरा धमकाकर पक्षद्रोही करवाया गया था. बेनिवाल की ओर से एडवोकेट एस एस पूनिया ने अदालत में कहा है कि ये एक बड़ी राजनेतिक साज़िश थी. जिसमे मामले के सभी अभियुक्तों की सलिप्तता है. सुनवाई के बाद जज कोमल मोटयार ने बनीपार्क पुलिस को  FIR दर्ज कर जांच के आदेश दिये है. 

हाइकोर्ट से जारी हो चुके है नोटिस:
गौरतलब है कि इस एनकाउंटर केस को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने वाली दारासिंह की पत्नी सुशीलदेवी को हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है. केस की सुनवाई के दौरान सुशीलादेवी अपने बयानों से मुकर गई थी. जिसके चलते सीबीआई का केस कमजोर हुआ. सीबीआई ने इस मामले में सुशीलादेवी के साथ साथ गवाह विजेन्द्रसिंह टिलिया के खिलाफ भी हाईकोर्ट में अपील दायर की थी. 2 दिसम्बर को ही जस्टिस महेन्द्र माहेश्वरी और जस्टिस गोवर्धन बारधार की खण्डपीठ ने सीबीआई की अपील पर सुशीलादेवी को नोटिस जारी किये थे. इसी बीच अब दारासिंह के पुत्र अमित बेनीवाल ने निचली अदालत में ये परिवाद पेश केस को ही नया मोड़ दे दिया है. 

क्या है मामला:
मुखबीर की सूचना पर 23 अक्टूबर, 2006 को पुलिस ने एनकाउंटर में दारा सिंह मार गिराया था. उसकी पत्नी सुशीला देवी ने एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच के बाद 17 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट पेश की. इसमें वसुंधरा राजे सरकार के तत्कालीन केबिनेट मंत्री राजेन्द्र राठौड़ एवं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए.के.जैन, ए.पोनूच्चामी सहित 17 लोगों को सीबीआई ने आरोपित बनाया. सीबीआई ने जांच के बाद अदालत में चार्जशीट पेश कर दी. इस मामले में राजेन्द्र राठौड़, ए.के.जैन और पोनूच्चामी सहित 14 पुलिसकर्मी गिरफ्तार हुए. अप्रैल,2016 को राजेन्द्र राठौड़, ए.के.जैन और पोनूच्चामी को गिरफ्तार कर लिया गया. राठौड़ 51 दिन तक जेल में बंद रहने के बाद कोर्ट से आरोप मुक्त हुए. जैन को भी कोर्ट ने आरोप मुक्त कर दिया. केस की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 194 गवाह,705 दस्तावेज साक्ष्य पेश किए. वहीं बचाव पक्ष ने 463 दस्तावेजी साक्ष्य पेश करते हुए अपनी तरफ से कोई भी गवाह पेश नहीं किया. सुनवाई के दौरान ही एक आरोपित की मौत हो गई. एडीजे कोर्ट 14 मार्च 2018 को फैसला सुनाते हुए सभी 17 आरोपियों को बरी कर दिया. 

... संवाददाता निजाम कंटालिया की रिपोर्ट 

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