MP में सितमगारी पिता को बेटी ने सिखाया सबक, घर में कैद करने, मारने पीटने, स्कूल छुड़वानें के आरोप

MP में सितमगारी पिता को बेटी ने सिखाया सबक, घर में कैद करने, मारने पीटने,  स्कूल छुड़वानें के आरोप

भिंड: पुरानी कहावत है कि पूत कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता कहने का मतलब यह है कि इतिहास के पन्नों में बेटे बेटियों के कपूत होने के प्रमाण मिले है. किंतु मां बाप बुरे हो नहीं सुना. किंतु इस कलयुग में सब कुछ संभव हो रहा है. ऐसे में मध्यप्रदेश के भिंड में एक कलयुगी पिता को अपनी ही 10 वर्ष की बेटी का मारने और उस पर सितम करने के आरोप लगे है. 

साढ़े चार महीने पहले हो गई थी मां की मौत:
जानकारी के अनुसार भिंड में 10 साल की बेटी ने पिता के खिलाफ मारपीट और प्रताड़ित करने की शिकायत की है. पिता ने गुरुवार को बस स्टैंड पर उसकी पिटाई की थी. इसके बाद वह सीधे वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी के पास पहुंच गई. और बड़ी ही मासूमियत से बोली- अंकल मेरे पिता मुझे पीटते हैं. मुझे घर में कैद करके रख है. घर से नहीं निकलने देते हैं. बताया कि बच्ची की मां की साढ़े चार महीने पहले मौत हो गई थी.

बच्ची को चाइल्ड लाइन को सौंपा:
इसके बाद पुलिस जवान ने पिता को हिरासत में ले लिया और बेटी को चाइल्ड लाइन भेज दिया गया है. मामला देहता थाना क्षेत्र के सुंदरपुरा गांव का है. बच्ची की मां की मौत साढ़े चार महीने पहले हो गई थी. तभी से पिता बलवीर सिंह शाक्य उसे प्रताड़ित करने लगा. उसकी पढ़ाई छुड़ा दी. यहां तक की बेटी को घर से बाहर खेलने भी जाने नहीं देता था. बात-बात पर पिटाई करता था.

पुलिस जवान को देखकर बच्ची में आई हिम्मत:
भिंड बस स्टैंड पर भी गुरुवार दोपहर 12 बजे किसी बात पर पिता ने बच्ची की पिटाई कर दी. बस स्टैंड पर तैनात पुलिस जवान शैलेंद्र द्विवेदी को देखकर उसको हिम्मत आ गई. वह सीधे शैलेंद्र के पास पहुंची और शिकायत कर दी. इसके बाद पुलिस जवान ने FRV को सूचना दी. चाइल्ड लाइन को बालिका सुपुर्द कर दिया. हालांकि पिता के खिलाफ पुलिस ने अब तक FIR दर्ज नहीं की है.

5वीं में पढ़ने वाली बेटी का दर्द, उसकी ही जुबानी
कुछ महीने पहले मेरी मां का निधन हो गया. अब परिवार में मैं और मेरे पिता ही हैं. मां की मौत के बाद पिता ने मुझे घर के अंदर बंधक-सा बनाकर रखा है. जरा भी घर से बाहर निकलने नहीं देते हैं. बात-बात पर पिटाई करते हैं. कहते हैं कि घर का काम करो. मेरी पढ़ाई भी छुड़वा दी है. अगर खेलने के लिए घर से बाहर निकलती हूं तो मेरी पिटाई करते हैं. शर्म है ऐसे पिता पर जिसने पिता के नाम को कलंकित कर दिया.

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