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चंपालाल गौड़ की हत्या के 90 घंटे बाद भी नहीं उठाया शव, धरना जारी

चंपालाल गौड़ की हत्या के 90 घंटे बाद भी नहीं उठाया शव, धरना जारी

खींवसर(नागौर): जिले के खींवसर थाना इलाके के थांबड़िया गांव के चंपालाल गौड़ की मौत के मामले में परिजनों और ग्रामीणों ने 90 घंटे बाद भी शव नहीं उठाया है, और ना ही शव का पोस्टमार्टम करने दिया गया है. ऐसे में पुलिस और प्रशासन की ओर से आज परिजनों को अंतिम संस्कार करने के बारे में एक नोटिस थमाया गया है. नोटिस में कहा गया है कि मृत इंसान के भी कुछ मानवाधिकार होते हैं, क्योंकि मौत को 90 घंटे का समय होने जा रहा है ऐसे में शव में संक्रमण होने की संभावना काफी बढ़ गई है. इसलिए शव का अंतिम संस्कार जल्द से जल्द किया जाए. अगर परिजन इसमें कोताही करते हैं तो उन पर कानूनी कार्रवाई करने की बात भी नोटिस के जरिए कही गई है. हालांकि परिजनों ने नोटिस का जवाब भी कानूनी रूप के जानकार लोगों से सलाह कर दे दिया है. दूसरी ओर खींवसर थाने के बाहर दिया जा रहा धरना लगातार जारी है जिसमें ब्राह्मण समाज के साथ-साथ सर्व समाज के लोग भी पुलिस और प्रशासन के खिलाफ अपना विरोध जाहिर करते हुए अपनी मांगों को लेकर अड़े हैं. 

खींवसर थाना अधिकारी को निलंबित करने सहित कई मांगे: 
खींवसर थाना अधिकारी को निलंबित करने सहित कई मांगे ऐसी है जो पूरी होने के बाद ही ग्रामीण शव उठाने की बात कह रहे हैं. पुलिस ने भी कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए खींवसर में जगह-जगह पुलिस जाब्ता तैनात किया है. तकरीबन 500 जवानों के साथ साथ दो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और 20 थानाधिकारी मॉनिटरिंग के लिए भी आज खींवसर में तैनात किए गए हैं. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकुमार ने बताया कि मसले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिश की जा रही है और अगर कोई कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करेगा तो पुलिस की ओर से उसका भी माकूल जवाब दिया जाएगा ताकि शांति बनी रह सके. सांसद हनुमान बेनीवाल और खींवसर विधायक नारायण बेनीवाल ने सरकार पर हठधर्मिता का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि जब तक मांगें पूरी नही होगी, शव नही उठाया जाएगा और सरकार को मांगे नहीं मानने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. सांसद बेनीवाल ने कहा कि नोटिस देना उनका काम है और आंदोलन करना हमारा काम है. आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि खींवसर थानाधिकारी को हटाने जाने के साथ बाकी मांगे पूरी नहीं होगी और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता.  
 

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मकराना(नागौर): मकराना उपखंड के गच्छीपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम गिंगालिया में एक विवाहिता के साथ सामूहिक दुष्कर्म के बाद फांसी लगाने का मामला सामने आया है. पीड़िता के गले में गहरी चोट आई, पीड़िता ने परिजनों के साथ पुलिस मे रिपोर्ट दी है.

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ननदोई ने किया जबरदस्ती दुष्कर्म:
जानकारी के मुताबिक बडू निवासी एक विवाहिता हाल निवासी गिगालिया ने रिपोर्ट पेश कर बताया कि 4 महीने पूर्व उसका विवाह हुआ था. विवाह के डेढ़ महीने बाद जब वह पीहर लौटी तो कुछ दिन रुकने के बाद उसका पति उसे 28 फरवरी 2020 को जोधपुर ले गया. जोधपुर जाने के बाद उसका पति उसके साथ शराब पीकर मारपीट करने लगा. कुछ दिनों पूर्व जब उसके पति किसी काम से बाहर गए हुए थे, तब उसके ननदोई सेठुराम ने जबरदस्ती उसके साथ बलात्कार किया. ननदोई ने उसका मुंह कपड़े से बांधकर बलात्कार किया. 

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शराब पीकर बारी बारी से किया दुष्कर्म:
21 मार्च 2020 को उसके पति ने कोरोनावायरस के डर  से विवाहिता को गांव छोड़ दिया. पति उसी दिन मेड़ता रोड तक ट्रेन से आए तथा उसके बाद मेड़ता से पैदल गांव गिंगालिया के लिए रवाना हो गए. उसी  समय उसके पति के परिचित जीतू जो गच्छीपुरा क्षेत्र का निवासी है वो भी आ गया. रास्ते में अंधेरा होने पर विवाहिता के पति और अन्य दो व्यक्तियों ने शराब पीकर उसके साथ में बारी-बारी से बलात्कार किया. विवाहिता ने बताया गांव आते समय ही उसके दूसरे नणदोई गड्डी निवासी मोतीराम मेघवाल ने माणवा गांव की नाड़ी में पति के साथ मिलकर रस्सी से उसका गला दबाया जिससे वह बेहोश हो गई. विवाहिता को मरा समझ कर सब वहां से भाग गये. सूचना पर विवाहिता के परिजनों ने उसे संभाला और उसका उपचार करवाया. स्वस्थ होने के बाद में पीड़िता ने पुलिस थाने में रिपोर्ट दी. पुलिस ने देर रात मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

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डीडवाना(नागौर): कोरोना को लेकर लगाए गए लॉक डाउन के साइड इफेक्ट भी देखने को मिल रहे हैं. नागौर जिले के हरनावा कुचेटिया गांव की नव प्रसूता महाराष्ट्र के हिंगोली ज़िले के बॉर्डर पर फंसी हुई है. प्रसूता के पति से मिली जानकारी के अनुसार लॉक डाउन के बाद निजी कार किराए पर लेकर गांव आ रहे थे इसी दौरान हिंगोली बोर्डर पर पुलिस ने रोक लिया और कार चालक को भगा दिया और प्रसूता को 11 दिन की मासूम के साथ बीच सड़क पर उतार दिया.

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परिजनों ने नागौर ज़िला प्रशासन से भी गुहार लगाई:
प्रसव के दौरान जच्चा बच्चा को जो स्वास्थ्य सुविधाएं और खाना मिलना चाहिये वो नही मिल पा रहा हैं. ऐसे में प्रसूता और नवजात की जान को बिना कोरोना संक्रमण के भी खतरा हो सकता है. मासूम जहाँ कुपोषण की शिकार हो सकती है तो प्रसूता को भी खतरा हो सकता है. परिजनों ने नागौर ज़िला प्रशासन से भी गुहार लगाई हैं वहीं परबतसर विधायक रामनिवास गावड़िया ने भी प्रसूता को सकुशल यहां गांव के स्कूल में आइसोलेट करने की मांग जिला कलक्टर से की है.  

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कोरोना को लेकर जल्द टलेगा खतरा, काली माता अखाड़े के पांडुलिपि में उल्लेख

कोरोना को लेकर जल्द टलेगा खतरा, काली माता अखाड़े के पांडुलिपि में उल्लेख

नागौर: कोरोना महामारी घोषित की जा चुकी है और कोरोना का कहर धीरे धीरे कई देशों तक फैलकर लोगों की जाने ले चुका है भारत भी इससे अछूता नही है. भारत में अब तक कोविड 19 यानी कोरोना की वजह से 15 मौतें हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में 21 दिनों के लिए लोक डाउन कर दिया है लोगों को स्टे एट होम के निर्देश दिए गए है ताकि संक्रमण का खतरा ताला जा सके और भारत मे कम से कम लोगो की जान जाए और जो संक्रमित है उनकी जाने बचाई जा सके. वहीं कोरोना को लेकर संवत्सरी पांडुलिपि में कई गई भविष्यवाणी के अनुसार खतरा जल्द टलेगा मगर सरकार की एडवाइजरी को नागरिकों को मानना होगा ताकि संक्रमण से बचा जा सके. 

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संवत्सरी नाम की इस पांडुलिपि में भविष्यवाणी की गई: 
नागौर जिले के डीडवाना के भाटी बास स्थित प्राचीन काली माता अखाड़े में कई पुराने और प्राचीन ग्रंथ रखे है जिनमे लगभग 200 साल पुरानी एक पांडुलिपि भी है. संवत्सरी नाम की इस पांडुलिपि में भविष्यवाणी की गई है कि भारतिय संवत्सर 2076 में वायरस जनित बीमारी से महामारी फैलेगी और इससे विश्वभर में लगभग एक लाख पच्चास हजार मौतें हो सकती है! पांडुलिपि की भविष्यवाणीया लगभग सटीक निकलती है.

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कोरोना को देखते हुए जारी एडवायजरी की पूर्ण पालना कि जाए:
काली माता मंदिर के महंत योगी सोहननाथ के अनुसार कोरोना वायरस जनित संक्रमण वाला रोग है इससे सबको बचना होगा. काली माता मंदिर में आज चैत्र नवरात्रि में भी सिर्फ अकेले ही पूजा की गई है. भक्तों और श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए मनाही है. योगी ने लोगों से अपील की है कि कोरोना को देखते हुए जारी एडवायजरी की पूर्ण पालना कि जाए नियमों का पालन किया जाए ताकि संक्रमण से बचा जा सके. योगी ने यह भी कहा है कि संवत्सर 2076 में शुरू हुई यह बीमारी 2077 के शुरुआती दौर में खत्म हो जाएगी और आने वाला नव संवत्सर देशवासियों के लिए मंगलकारी होगा और खुशहाली लेकर आएगा.

विश्व जल दिवस आज, सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा इस बार का थीम क्लाइमेंट चेंज

विश्व जल दिवस आज, सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा इस बार का थीम क्लाइमेंट चेंज

नागौर: जलवायु परिवर्तन से मौसम तंत्र में आश्चर्यजनक बदलाव हो रहे हैं. इससे मानसून भी प्रभावित हो रहा है. साथ ही जल दोहन की बढ़ोतरी के कारण प्रदेश में जल संकट गहराता जा रहा है. जल संकट एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है. इस समस्या का निदान जन जागरूकता एवं जल संरक्षण ही एकमात्र एक उपाय है. आम जन को अब समझना होगा की जल है तो कल है. आज हम पेयजल के लिए नलकूप पर आश्रित हो गये है, जिससे हमारी पनघट भी सुनी सुनी सी हो गयी है अब कुए तालाब और बावडिया बिना पनघट वीरान सी हो गयी है. जल संकट को लेकर विश्व जल दिवस पर पेश है एक विशेष रिपोर्ट.

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क्लाइमेंट चेंज की वजह से भी जल संकट:
क्लाइमेंट चेंज की वजह से भी जल संकट आने वाले समय मे खड़ा हो सकता है. जल संकट को देखते हुए जल संरक्षण जरुरी हो गया है और आज जरुरत इस बात की है की जल सरंक्षण में आमजन की भागीदारी आवश्यक हो गई है आम आदमी को  जल सरंक्षण के लिए आगे आना होगा. क्यों की मानूसन का मिजाज भी साल दर साल बदल रहा है जिससे से हालात विकट होते जा रहे है. इसका सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हो रहा जिससे कृषि में नुकसान होता है और इससे भारत की अर्थ व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा हैं. इस बार विश्व जल दिवस पर यूएन द्वारा भी क्लाइमेंट चेंज थीम रखी गई है. 

राजस्थान में भी काफी बदलाव:
क्लाइमेंट चेंज की वजह से राजस्थान में भी काफी बदलाव हो रहे है. इस बार बीना मौसम ओलावृष्टि और बर्फ का गिरना, कभी अतिवृष्टि और कभी अल्पवृष्टि भी क्लाइमेंट चेंज की वजह से हो रही है. इससे किसानो को बड़ा नुकसान होता है और इसमें अर्थ व्यवस्था गड़बड़ा जाती है. मौसम विभाग समय समय पर पूर्वानुमान की सूचनाएं देता रहता है मगर किसानों तक सही समय पर सूचनाएं पंहुचे इसको लेकर काम करने की जरूरत है. ताकि किसान बदलते मौसम की वजह से नुकसान से बच सके. साथ ही बरसात के मौसम में होने वाले रन ऑफ़ को रोककर जल संग्रहण करने के साथ भूमिगत जलभूत चट्टानों में वर्षा जल को पहुँचाकर भूजल को रिचार्ज करना होगा अत्यधिक अंधांधुंध जल दोहन की वजह से जल की क्वालिटी भी जा रही है 85 फीसदी रोग जल जनित होते है ऐसे में शुद्ध पेयजल की उपलबधता काफी मायने रखती है .  

पेयजल योजनाएं भूजल आधारित:
प्रदेश की 10 फीसदी से अधिक पेयजल योजनाएं भूजल आधारित है तथा कृषि व उद्योग में भी भूजल का अत्यधिक उपयोग होने सेभूजल स्तर प्रदेश में लगातार गिरा है व भूजल गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है. नागौर जिले में भूजल स्तर गत 25 वर्षों में 50  फीट गहराई में नीचे चला गया है. प्रदेश के ज्यादातर ब्लाकों की स्थिति खराब है नागौर जिला भी डार्क जोन में है और यहा फिर भी भूजल का अँधाधुंध दोहन हो रहा है, जो आने वाले समय के लिए खतरे की घंटी है. आज जरुरत इस बात की है की आम आदमी को पानी का मूल्य समझाना होगा ! क्यों की जल है तो कल है.

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बावड़ी और तालाब को भूल चुके है:
आज हम कुवे बावड़ी और तालाब को भूल चुके है जो बदहाल है और देख रेख के आभाव में ज्यादातर रित चुके है या रीतने के कगार पर है. भू जल को अधिक से अधिक पुनर्भरण करने की जरुरत है. हमें परम्परागत जल स्रोतों की और फिर से मुड़ना होगा और अपनी पुराणी और परम्परागत कुवे बावड़ी और तालाब की और लोटना होगा ।ताकि जल संकट की एक जंग को जीत सके. नदियों को जोडक़र नहर परियोजना से जल प्रबन्धन समय की आवश्यकता है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए नरपत जोया की रिपोर्ट

कोरोना वायरस को लेकर चिकित्सा अधिकारी सतर्क, आमजन को किया जा रहा है जागरूक 

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मूण्डवा( नागौर): देशभर में कोरोना वायरस को लेकर सभी चिंतित है तो वहीं नागौर जिले के मूण्डवा खण्ड चिकित्सालय में कोरोना वायरस से बचाव के लिए अलग अलग प्रयास किए जा रहे है. यहां चिकित्सा कर्मी, आशा सहयोगीनी, नर्सिंग स्टाफ द्वारा घर घर जाकर लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है. वहीं मूण्डवा चिकित्सालय में भी कोरोना वायरस को लेकर आने वाले मरीजों के हाथ धुलाकर परिसर मे प्रवेश दिया जा रहा है. 

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कोरोना की बीमारी का बचाव ही इलाज:
साथ ही चिकित्सालय में सभी स्टाफ कोरोना वायरस से बचाव को ध्यान मे रखते हुए मार्स्क लगाए हुए नजर आये. इसके साथ ही मूण्डवा बीसीएमओ राजेश बुगासरा ने बताया कि कोरोना वायरस की बीमारी का बचाव ही इलाज है. सभी को इस समय अपने घरों में ही रहना चाहिए और जब भी घरों से बाहर निकलो तो अपने मुंह पर मार्स्क या रूमाल लगा कर निकले और समय समय पर साबुन से हाथ धोये. अधिक भीड भाड वाले इलाके में जाने से बचे. साथ ही सर्दी जा जुकाम होने पर अपने नजदीकी अस्पताल या चिकित्सक के पास जाकर सलाह लें. 

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फिलीपींस में फंसे स्टूडेंट्स ने लगाई सरकार से मदद की गुहार, सुरक्षित भारत वापसी की गुहार

 फिलीपींस में फंसे स्टूडेंट्स ने लगाई सरकार से मदद की गुहार, सुरक्षित भारत वापसी की गुहार

नागौर: नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे के बीच फिलीपींस में फंसे 1000 से ज्यादा मेडिकल स्टूडेंट की स्वदेश वापसी की सरकार से मांग की है. बेनीवाल ने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि जल्द से जल्द सभी विधार्थियो की वतन वापसी हो. वहीं दूसरी और फिलीपींस में फंसे नागौर के तीन छात्रों के परिजनों ने बुधवार को नागौर जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव को प्रधानमंत्री,विदेश मंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा और मदद की गुहार लगाई है.

नागौर के करीब 50 मेडिकल स्टूडेंट फंसे हुए हैं फिलीपींस में:
परिजनों ने बताया कि नागौर के दोनों छात्रों की भारत के बाकी छात्रों के साथ 19 मार्च की भारत वापसी की टिकट थी, लेकिन भारत सरकार ने 17 मार्च को ही फिलीपींस से आने वाली उड़ान पर रोक लगा दी और उनके बच्चे वहीं फंस गए हैं. आपको बता दें  नागौर के करीब 50 मेडिकल स्टूडेंट फिलीपींस में फंसे हुए हैं, जिनमें से दो नागौर शहर के दो स्टूडेंट नितिन भाकल और प्रवीण मिर्धा है. जिनके लिए परिजनों ने जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव को ज्ञापन सौपते हुए केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बच्चों को सुरक्षित घर लाया जाए. 

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मेडिकल की पढ़ाई करने गया था फिलीपींस:
नागौर शहर के रहने वाले नितिन भाकल की मां वसुंधरा भाकल ने बताया कि नितिन तीन साल पहले मेडिकल की पढ़ाई करने फिलीपींस गया था. मार्च में परीक्षा होने पर वह नागौर आने वाला था, लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस का खतरा आ गया और वहां की सरकार ने तीन दिन में देश छोड़कर जाने को कह दिया. नितिन और पुष्पेंद्र डूडी, रवि बसवाना, प्रदीप मेघवाल, नरेंद्र जाणी, सुरेश सारण ने 19 मार्च के टिकट भी बनवा रखे थे, लेकिन 17 मार्च को ही सरकार ने फिलीपींस से भारत आने वाली उड़ान पर रोक लगा दी. 

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खाने-पीने का भी पर्याप्त राशन नहीं:
वहीं नितिन के मामा का कहना है कि फिलीपींस में फंसे हुए स्टूडेंट्स के पास खाने-पीने का भी पर्याप्त राशन नहीं है. ऐसे में वे वहां परेशान हो रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि फिलीपींस में फंसे स्टूडेंट्स को एयरलिफ्ट कर भारत वापस लाया जाए. नितिन के पिता सुखदेव भाकल सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर हैं और अभी छत्तीसगढ़ में तैनात हैं. वहीं नागौर जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव का कहना है कि परिजनों के शॉप पर ज्ञापन को गृह मंत्रालय को प्रेषित किया जा रहा है. 

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कोरोना वायरस को लेकर सतर्कता, नगरपालिका ने शहर में करवाई फॉगिंग

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डीडवाना(नागौर): विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है. वहीं  भारत में कोरोना से बचाव को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. प्रदेश सरकार भी कोरोना के खतरे को लेकर गंभीर है, स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मॉड पर है. मंगलवार को  नागौर जिले के डीडवाना में नगरपालिका द्वारा शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में फॉगिंग करवाई गई है.

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बनाया गया आइसोलेशन वार्ड:
पालिका की टीम ने मंगलवार को कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं के चेम्बरों के साथ-साथ कोर्ट परिसर, मुख्य बस स्टैंड, निजी बस स्टैंड और अस्पताल परिसर में फॉगिंग करवाई गई. डीडवाना में प्रशासन द्वारा शहर के बांगड़ अस्पताल में भी कोरोना को देखते हुए 6 बेड का आईशोलेशन वार्ड बनाया गया है और इटली इंग्लैंड और जापान से प्रवास कर आए नागरिकों की भी जांच कर उन्हें निर्देश दिए गए है. प्रवासी नागरिकों पर विशेष निगरानी भी रखी जा रही है. 

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कोरोना वायरस का असर मतदान केन्द्रों पर, मुंह पर मास्क लगाकर ड्यूटी कर रहे हैं  तैनात सुरक्षाकर्मी 

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नागौर: प्रदेश के कई जिलों में कोरोना वायरस के खौफ के चलते मतदान जारी है. ऐसे में मुंह पर मास्क लगाकर सुरक्षाकर्मी ड्यूटी कर रहे है. नागौर जिले में चार पचायत समितियों के मतदान केन्द्रों पर दोपहर 12 बजे तक 31 प्रतिशत मतदान हुआ है. देश में कोरोना वायरस का असर व्यापार, सिनेमाघर समेत अन्य व्यवस्थाओं पर पूरी तरह से देखा जा रहा है. वहीं नागौर की 4 विधानसभाओं में रविवार को पंचायत राज चुनाव के तहत आयोजित हो रहे मतदान में भी इसका असर  देखा जा रहा है. नागौर के गुढा भगवान दास के मतदान केंद्र पर तैनात सुरक्षाकर्मी मुंह पर मास्क लगाकर अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं यहां पर आमजन में भी कोरोना वायरस को लेकर डर में देखा जा रहा है. 

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मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ कम:
यही वजह की अधिकांश से मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ कम नजर आ रही है, वहीं मतदाता भी भीड़ कम होने के बाद ही मतदान केंद्र पर पहुंचने ताकि इस वायरस से बचा जा सके. वहीं चिकित्सा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए है. इसके साथ ही यहां पर मेडिकल टीम की एक यूनिट को भी तैनात किया गया, ताकि किसी भी व्यक्ति को अगर कोरोना वायरस से जुड़े हुए लक्षण मिले तो उसका तुरंत इलाज शुरू किया जा सके. 

मतदान केन्द्र पर मत का प्रयोग:
कुचामन-में 31.06 और डीडवाना में- 30.64 और मकराना - 40.46 खींवसर- 37.28 के साथ मतदान केन्द्रों पर ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं पारम्परिक पौशाके घाघरा लूंगडी पहनकर झुण्ड बनाकर नाचते गाते मतदान केन्द्र पर अपने मत का प्रयोग करने पहुंच रही है. मतदान केन्द्र पर लम्बी लम्बी कतारे देखने को मिल रही है. मतदान केन्द्रों पर मतदान की गति धीमी चलने के कारण दोनों केन्द्रों पर मतदाताओं की लम्बी लम्बी कतारे लगी रही है. मतदान केन्द्रों पर फर्जी मतदान पर पूरी तरह से सख्ती नजर देखने को मिली है. 

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