VIDEO: सावधान... जानलेवा मोबाइल गेम, 12 वर्षीय बच्चे ने फंदा लगाकर कर ली आत्महत्या

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/20 08:25

कोटा: क्या बच्चों को अकेलापन और उसे दूर करने के लिए लगा मोबाइल गेम का शौक जानलेवा कदम उठाने के लिए मजबूर कर रहा है? शिक्षा नगरी कोटा में यह सवाल हर किसी के जहन में उठा है. विज्ञान नगर में मोबाइल गेम के शौकिन 12 वर्षीय बच्चे ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली. ऐसी क्या शर्त थी, जिसने उस मासूम को यह करने के लिए मजबूर कर दिया. जिसने परिवार की सारी खुशियों पर ग्रहण लगा दिया. बच्चों में मोबाइल गेम की लत के कारण चाइल्ड लाइन से लेकर चिकित्सक तक चिंता जाहिर कर रहे है. एक खास रिपोर्ट:

मोबाइल गेम की लत छुडाने के लिए सलाह:
शिक्षानगरी कोटा का चाइल्ड लाइन का ऑफिस, जिसमें बच्चों से जुड़ी समस्याओं का समाधान होता है. इन दिनों यहां फोन कॉल्स पर अभिभावक अपने बच्चे की मोबाइल गेम की लत छुडाने के लिए सलाह ले रहे हैं, क्योंकि वह उस गेम के कारण मानसिक तनाव से गुजर रहा है. चाइल्ड लाइन सेंटर पर पिछले दो माह से कुल 11 शिकायतें मिली. जिसमें से कुछ शिकायतें ऐसी थी, जिसमें अभिभावक बच्चे की काउंसलिंग मोबाइल गेम की लत छुडवाने के लिए करवाना चाह रहे थे. 

काउसंलिंग से हल:
पुराने आंकडो की बात की जाए तो बच्चों में तनाव को लेकर वर्ष 2016-17 में 44, वर्ष 2017-18 में 25, वर्ष 2018-19 में 37 शिकायतें मिली जो किसी न किसी रुप में मानसिक तनाव से गुजर कर अपनी जिंदगी से निराश हो चुके थे. चाइल्ड लाइन के सदस्यों ने इनसे संपर्क किया और इनकी काउसंलिंग करने के साथ अभिभावकों से भी बात करके समस्याओं को दूर किया. ताकि यह गलत कदम उठाने को मजबूर नहीं हो. कोटा जिले में प्रयासों के बावजूद 12 वर्षीय बच्चे के इस जानलेवा कदम के उठाने के बाद चाइल्ड लाइन की टीम भी चिंता में है और इसके कारणो का मंथन करने में जुटे हुए हैं.

संयुक्त परिवारों के नहीं होने से अकेलापन: 
मोबाइल गेम के चक्कर में बच्चे के जान गंवाने के मामले को चिकित्सकों ने भी गंभीर माना है. चिकित्सकों का मानना है कि पहले संयुक्त परिवारों का चलन था, जिसके कारण बच्चों को अकेलापन महसूस नहीं होता था. वर्तमान में इसमे काफी बदलाव आया है. परिवार की अर्थव्यवस्था को संचालित करने के लिए अभिभावक नौकरी पेशे से जुडे रहते है और समय पर बच्चों पर ध्यान नहीं दे पाते है. जिसके कारण वह तनाव या मोबाइल का सहारा लेता है. विज्ञान नगर जैसी घटना दुबारा घटित नहीं हो, इसके लिए चाहिए कि अभिभावक बच्चों के साथ ही कुछ समय बिताएं.  

ब्लू व्हेल के बाद पबजी का खुमार:
कुछ दिनों पहले जानलेवा खेल ब्लू व्हेल ने कई बच्चों की जान ले ली थी. किसी तरह से उस पर अंकुश लगा तो अब पबजी मोबाइल गेम बच्चों का भविष्य़ खराब कर रहा है, जो चिंता का विषय है. इन मोबाइल गेम में जीतने का लालच बच्चों को उस अंधेरे की तरफ लेकर जा रहा है, जहां वापसी तभी जीत के बाद भी संभव है. अभिभावक अपने बच्चों पर नजर रखे और उन्हें हाथों में मोबाइल देने की जगह आउटडोर गेम्स में उनकी रुचि बढाए, तो इन पर रोक लगाना संभव हो सकता है. 

... कोटा संवाददाता सचिन ओझा की रिपोर्ट 

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