28 दिसंबर नगी दिवस पर विशेष: पाक के ना'पाक' इरादे हुए थे नैस्तोनाबूद

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/12/28 03:43

श्रीकरणपुर(श्रीगंगानगर)। 1971 का भारत-पाक युद्ध आज भी बहुत से लोगों की स्मृति में है सभी यही जानते हैं कि इस युद्ध में पाकिस्तान को बड़ी हार का सामना करना पड़ा लेकिन युद्ध विराम के बाद ऐसा क्या हुआ कि 47 साल बीतने के बाद भी भारतीय सेना इस दिन प्रतिवर्ष एक विशेष दिवस के रूप में मनाती है। आज भी नग्गी दिवस पर नग्गी गाँव मे शहीद स्मारक पर 1971 युद्ध मे शहीद हुए सैनिकों को सेना के बिरगेडियर HBग्रामोउपाध्याय व कर्नल AK सिंह ने श्रधांजलि दी व पिछले एक सप्ताह से कस्बे में नग्गी दिवस पर चल रहे कार्यक्रमो में रहे विजेताओं को पुरस्कार से समानित किया गया। साथ ही आपको बताना चाहंगे की यह आयोजन श्रीगंगानगर जिले की श्रीकरणपुर तहसील के गांव 36H नग्गी में मनाया जाता है ,सबसे बड़ी बात यह है कि पिछले 5 साल से सेना के इस आयोजन में आमजन की सहभागिता भी बढ़ गई है ।

आपको बता दें कि सन 1971 का भारत-पाक युद्ध समाप्त हुए 10 दिन बीत चुके थे सीमा पर तैनात सेना लौट चुकी थी किसी को भी यह घुमान नहीं था कि युद्ध में करारी हार होने के बाद पाकिस्तान सेना भारतीय सेना में घुसकर भूमि पर कब्जा करने का दुस्साहस भी करेगी यह घटना घटी श्रीकरणपुर तहसील के गांव 36h नग्गी गाँव में, पाकिस्तानी सेना अपने नापाक इरादों के साथ भारतीय सीमा में घुसी और रेतीले धोरों से ढके गाँव नग्गी के 1 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा जमा लिया । भारतीय सेना को इस बात का पता चला तो दुश्मन के कब्जे से भारतीय क्षेत्र को मुक्त करवाने की लिए चार पैरा बटालियन को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई तब आदेश मिलने पर 4 पैरा बटालियन 28 दिसंबर की सुबह 4:00 बजे हमला बोला 2 घंटे की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना को फिर पराजय का मुंह देखना पड़ा और पाकिस्तानी सैनिक भाग खड़े हुए।

जी हां आपको बताना चाहंगे कि इस युद्ध के दौरान कुछ ऐसी घटनाएं भी घटित हुई जो आज भी विशेषकर याद की जाती है ग्रामीणों ने बताया कि सन् 1971 में नग्गी की एक घटना को याद कर आज भी लोग भावुक हो उठते हैं युद्ध के दौरान सीमा पर भारतीय टैंक नहीं पहुंचने पर सैन्य अधिकारी चिंतित थे ऐसे में एक ग्रामीण की सलाह पर आसपास गांव से आए फर्गुसन ट्रेक्टरओं के साइलेंसर निकाल कर दो-तीन दिन तक पाकिस्तानी सेना को भ्रमित किया गया।

आयोजन में आने वाले सैन्य अधिकारी यह भी यह कहना कभी नहीं भूलते कि उस समय लोगों ने सेना की मदद नहीं की होती तो शायद कोई मंजर और होता और आपको यह भी बताना चाहेंगे कि यह युद्ध रेतीले धोरों में होने के कारण यह लड़ाई भारतीय सेना के इतिहास में सैंड ड्यून्स के नाम से दर्ज हुई, साथ ही आपको बताना चाहेंगे कि भारतीय सेना के आक्रमण को विफल करने के लिए पाकिस्तानी सेना ने तोप से 72 गोले बरसाए जिससे 4 पैरा बटालियन के 4 अधिकारी व 21 जवान शहीद हो गए इस वजह से आज भी उन शहीदों की याद में भारतीय सेना इस दिन नग्गी दिवस के रूप में मनाती है।

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