आपसी सहमति बिना नहीं हो सकता धारा 370 हटाए जाने पर फैसला : सुशील मोदी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/02/22 06:23

पटना। धारा 370 को लेकर बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान पर डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। डिप्टी सीएम ने कहा कि साल 1954 में राष्ट्रपति के एक आदेश के बाद संविधान में जोड़े गए अनुच्छेद 370 को लेकर हर पार्टी का अपना-अपना मत है। ऐसे में जब तक आपस में कोई सहमति नहीं बनती, तब तक कोई फैसला नहीं हो सकता। बता दें कि इससे पूर्व सीएम नीतीश कुमार ने कहा था कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के संदर्भ में हम कभी नहीं सोच सकते।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने कहा कि अनुच्छेद 370 को लेकर जेडीयू का पहले से ही अपना स्टैंड रहा है। लेकिन इसको लेकर हर पार्टी का अपना-अपना मत है और आपसी सहमति के बिना कोई फैसला नहीं हो सकता। 

गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने गुरुवार को पटना शहर स्थित जदयू कार्यालय में व्यवसायी और समाजसेवी नरेंद्र सिंह के पार्टी में शामिल होने के अवसर पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वे जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के खिलाफ हैं, क्योंकि आतंकी गतिविधि रोकने के लिए धारा 370 को हटाने की जरुरत नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पुलवामा हमले के बाद कश्मीर के लोगों को लेकर गलत अवधारना नहीं बनानी चाहिए।

अनुच्छेद 370 को हटाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर किए जाने तथा उनकी सहयोगी पार्टी भाजपा के कई नेताओं द्वारा मांग किए जाने के बीच नीतीश ने कहा कि इस मुद्दे पर हमारी पार्टी का रुख स्पष्ट है। उन्होंने कहा कि एक आतंकवादी हमला हुआ है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के अलावा जो भी दोषी हैं, उन्हें दंडित करने के लिए जो भी कार्रवाई संभव है, वह की जानी चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जम्मू और कश्मीर को एक प्रावधान से वंचित किया जाना चाहिए।

क्या है अनुच्छेद 370 :
साल 1954 में राष्ट्रपति के एक आदेश के बाद संविधान में यह अनुच्छेद जोड़ा गया था, जो जम्मू एवं कश्मीर के लोगों को विशेषाधिकार प्रदान करता है और राज्य विधानसभा को कोई भी कानून बनाने का अधिकार देता है, जिसकी वैधता को चुनौती नहीं दी जा सकती। इस अनुच्छेद के तहत जम्मू—कश्मीर के लोगों को छोड़कर बाकी भारतीय नागरिकों को राज्य में अचल संपत्ति खरीदने, सरकारी नौकरी पाने और राज्य सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ लेने से रोका गया है।
 

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