Live News »

Delhi Election Result: AAP की ऐतिहासिक जीत, दिल्ली की जनता बोली और 5 साल लगे रहो केजरीवाल

Delhi Election Result: AAP की ऐतिहासिक जीत, दिल्ली की जनता बोली और 5 साल लगे रहो केजरीवाल

नई दिल्ली: दिल्ली कि सभी 70 सीटों के विधानसभा चुनाव के परिणाम आ चुके है. इस चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी पिछले एक साल से तैयारी में लगी हुई थी. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कि सरकार ने इस चुनाव में स्थानीय मुद्दों पर ज़ोर दिया. फिर चाहे बात बिजली की हो या पानी की, इन्हें बार-बार मुद्दा बनाया गया.आम आदमी पार्टी शुरू से जानती थी, कि बिजली और पानी जैसे मुद्दे दिल्ली कि जनता को प्रभावित करेगी, ऐसे में इसका असर वोट पर भी दिखेगा.दिल्ली की जनता ने हर मुद्दे पर गौर करने के बाद यह भरोसा जताया है. आज फिर तीसरी बार दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार को जिताया. वही केजरीवाल ने इस ऐतिहासिक जीत को जनता की जीत बताया.

OMG! Swiggy से ऑर्डर की हुई कचौरी में निकला मरा हुआ चूहा

दिल्ली के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन रहा है और कुल हुए मतदान में से पार्टी को पांच फीसदी से भी कम वोट मिले हैं. कांग्रेस के 63 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई है.

Delhi Elections: दिल्ली में कांग्रेस का खराब प्रदर्शन, उम्मीदवारों की जमानत खतरे में
- आम आदमी पार्टी के इमरान हुसैन बल्‍लीमारान सीट से 36,172 वोटों से जीते. AAP उम्‍मीदवार सौरभ भारद्वाज ग्रेटर कैलाश सीट से 16,809 वोटों से जीते. वहीं हरि नगर सीट से राज कुमारी ढिल्‍लों 20,131 वोटों जीतीं.

- मॉडल टाउन विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी आप के उम्‍मीदवार अखिलेश पति त्रिपाठी 11133 वोटों से जीते.

Delhi Election: पीएम मोदी ने केजरीवाल को दी जीत की बधाई, दिल्ली कि जनता के आकांक्षाओं पर उतरे

ओखला विधान सभा : 71,807 वोटों से जीते अमानतुल्लाह खान, दिल्ली में सबसे बड़े मार्जि‍न से जीत. 130347 वोट मिले आप को. 58540 वोट मिले भाजपा को, वही 5103 कांग्रेस को वोट मिले.  
 

और पढ़ें

Most Related Stories

Rajasthan: राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायक खरीद फरोख्त प्रकरण में SOG ने दर्ज किया मुकदमा

Rajasthan: राज्यसभा चुनाव के दौरान विधायक खरीद फरोख्त प्रकरण में SOG ने दर्ज किया मुकदमा

जयपुर: राज्यसभा चुनाव के बीस दिन बाद राजस्थान में विधायकों की खरीद-फरोख्त का मामला फिर गरमा रहा है. आज SOG ने मुकदमा दर्ज किया है. राज्यसभा चुनाव से पहले मुख्य सचेतक महेश जोशी ने परिवाद दिया था. परिवाद की जांच में कुछ मोबाइल नंबर सामने आए थे. उन्हीं मोबाइल नंबरों की जांच के बाद SOG ने परिवाद को सही माना है. अब खुद SOG की ओर से ही मुकदमा दर्ज किया गया है. अब SOG के वरिष्ठ अधिकारी मामले की जांच करेंगे. 

राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप 

बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी: 
गौरतलब है कि महेश जोशी ने राज्यसभा चुनाव के दौरान पुलिस महानिदेशक, एसीबी से एक आधिकारिक शिकायत की थी और उन बीजेपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी, जो धनबल के जरिए निर्दलीय विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रहे थे. 

राजस्थान में सरकार को अस्थिर करने की कोशिश:
महेश जोशी ने डीजी कि एसीबी को संबोधित अपने पत्र में कहा था, 'हमें अपने विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि मध्यप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक की तर्ज पर बीजेपी, कांग्रेस के विधायकों के साथ ही हमारी सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायकों को लालच देकर राजस्थान में सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है.

सीएम गहलोत के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप: 
वहीं इससे पहले आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भाजपा विधायक अशोक लाहोटी, सुभाष पूनिया, रामलाल शर्मा और निर्मल कुमावत ने विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है. विधायकों ने इसको लेकर विधानसभा सचिव को पत्र सौंपा है. इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के भी हस्ताक्षर है. आरोप में मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को कोट किया गया है. इस बारे में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कटारिया के कक्ष में एक बड़ी बैठक भी हुई है. 

सतीश पूनिया पर भी विशेषाधिकार हनन आरोप:
निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने भी बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया. लोढ़ा ने शिकायत में कहा है कि, सतीश पूनिया ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान 23 विधायकों को वोट के बदले खान, रिको प्लॉट देने और कैश ट्रांजैक्शन से लाभान्वित किया गया है. 

विधायक अनिता भदेल कोरोना पॉजिटिव, 2 दिन पहले आयीं थीं भाजपा प्रदेश कार्यालय 

21 जून को विधानसभा में दी थी शिकायत:
दरअसल, कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय संयम लोढ़ा ने पूनिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत 21 जून को विधानसभा में दी थी. विधानसभा सचिवालय ने अध्यक्ष के समक्ष फाइल पुटअप किया था. ऐसे में अब दोनों ही मामलों में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. 

विधायक अनिता भदेल कोरोना पॉजिटिव, 2 दिन पहले आयीं थीं भाजपा प्रदेश कार्यालय

विधायक अनिता भदेल कोरोना पॉजिटिव, 2 दिन पहले आयीं थीं भाजपा प्रदेश कार्यालय

जयपुर: प्रदेश में लगातार पैर पसार रहा कोरोना अब जनप्रतिनिधियों के लिए भी खतरा बनता जा रहा है. अजमेर दक्षिण से भाजपा विधायक अनीता भदेल भी कोरोना पॉजिटिव मिली है. कोरोना संक्रमण के लक्षण पाए जाने के बाद उन्होंने खुद को होम आइसोलेट कर लिया है. वहीं भदेल के कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद भाजपाइयों में भी खलबली मच गई है. 

राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप 

2 दिन पहले भाजपा कार्यालय तक आयीं थीं अनिता भदेल: 
दरअसल, अनिता भदले 2 दिन पहले ही भाजपा कार्यालय तक आयीं थी. इसी बात को लेकर फिलहाल भाजपा प्रदेश कार्यालय में कई लोगों के चिंता की लकीरें हैं. सूत्रों की मानें तो दर्जनभर कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों से उनकी सामान्य मुलाकात हुई थी. हालांकि प्रेदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने मुलाकात नहीं हुई थी. लेकिन फिलहाल उनके संपर्क में आने वाला हर कोई खुद को क्वॉरंटीन कर रहा है. इससे पहले जितेन्द्र गोठवाल भी कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार राजेंद्र राठौड़, रामचरण बोहरा, सुशील कटारा व अन्य लोगों से उनकी मुलाकात हुई थी. ऐेसे में उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने खुद की जांच भी करवाई है. सांसद रामचरण बोहरा भी जांच करवाएंगे. इससे पहले जितेन्द्र गोठवाल भी कोरोना पॉजिटिव आ चुके हैं. 

जयपुर: मुख्यमंत्री निवास को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस कंट्रोल रूम में आया फोन 

कोरोना का शिकार होने वाली पहली जनप्रतिनिधि नहीं:
वहीं विधायक अनीता भदले से पहले भी कई जनप्रतिनिधि कोरोना की चपेट में आ चुके हैं. भदले से पहले पाली के सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक जोराराम कुमावत, पाली विधायक जेपी चंदेलिया और बाड़ी विधायक गिरिराज मलिंगा भी कोरोना की जद में आ चुके हैं. 

HARYANA : सीएम मनोहर लाल खट्टर ने की पीएम मोदी से मुलाकात, कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

HARYANA : सीएम मनोहर लाल खट्टर ने की पीएम मोदी से मुलाकात, कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दिल्ली दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे. इस दौरान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर अहम चर्चा हुई. मुख्यमंत्री खट्टर ने पहले ही प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का समय ले रखा था. जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पद के नाम की घोषणा कर सकती है. 

सीएम गहलोत ने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं में कमी लाने के दिए निर्देश, कहा-लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों पर हो कड़ी कार्रवाई

जेपी नड्‌डा से भी की थी मुलाकात:
हरियाणा में प्रदेशाध्यक्ष के नाम पर पेंच फंसा हुआ है. इससे पहले गुरुवार को सीएम मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली में ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से मुलाकात की थी. सीएम खट्टर ने नए प्रदेशाध्यक्ष और बरौदा उप चुनाव को लेकर चर्चा की थी.

नई नियुक्तियों को लेकर भी हुआ गहन मंथन:
जानकारी के मुताबिक इसके अलावा प्रदेश में नई नियुक्तियों को लेकर गहन मंथन हुआ था. राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ बातचीत के बाद सीएम खट्टर ने कहा कि जल्द ही नए प्रदेशाध्यक्ष का ऐलान किया जाएगा. इसमें अब देरी नहीं होनी चाहिए. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उन्होंने साफ किया कि फिलहाल ऐसी कोई योजना ही नहीं है. 

VIDEO: आबकारी विभाग का स्पेशल ऑपरेशन, अवैध शराब के काले कारोबार पर कसा शिकंजा

HARYANA : सीएम मनोहर लाल खट्टर ने की पीएम मोदी से मुलाकात, कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

HARYANA : सीएम मनोहर लाल खट्टर ने की पीएम मोदी से मुलाकात, कई अहम मुद्दों पर हुई चर्चा

नई दिल्ली: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर दिल्ली दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे. इस दौरान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष और प्रदेश से जुड़े मुद्दों पर अहम चर्चा हुई. मुख्यमंत्री खट्टर ने पहले ही प्रधानमंत्री मोदी से मिलने का समय ले रखा था. जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष पद के नाम की घोषणा कर सकती है. 

VIDEO: आबकारी विभाग का स्पेशल ऑपरेशन, अवैध शराब के काले कारोबार पर कसा शिकंजा

जेपी नड्‌डा से भी की थी मुलाकात:
हरियाणा में प्रदेशाध्यक्ष के नाम पर पेंच फंसा हुआ है. इससे पहले गुरुवार को सीएम मनोहर लाल खट्टर ने दिल्ली में ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा से मुलाकात की थी. सीएम खट्टर ने नए प्रदेशाध्यक्ष और बरौदा उप चुनाव को लेकर चर्चा की थी.

नई नियुक्तियों को लेकर भी हुआ गहन मंथन:
जानकारी के मुताबिक इसके अलावा प्रदेश में नई नियुक्तियों को लेकर गहन मंथन हुआ था. राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ बातचीत के बाद सीएम खट्टर ने कहा कि जल्द ही नए प्रदेशाध्यक्ष का ऐलान किया जाएगा. इसमें अब देरी नहीं होनी चाहिए. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उन्होंने साफ किया कि फिलहाल ऐसी कोई योजना ही नहीं है. 

सीएम गहलोत ने प्रदेश में सड़क दुर्घटनाएं में कमी लाने के दिए निर्देश, कहा-लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों पर हो कड़ी कार्रवाई

राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप

राज्यसभा चुनाव के बाद परवान चढ़ती आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स, अब मुख्यमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का आरोप

जयपुर: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव के बाद भी आरोप-प्रत्यारोप की पॉलिटिक्स परवान चढ़ती नजर आ रही है. अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ भाजपा विधायक अशोक लाहोटी, सुभाष पूनिया, रामलाल शर्मा और निर्मल कुमावत ने विशेषाधिकार हनन का आरोप लगाया है. विधायकों ने इसको लेकर विधानसभा सचिव को पत्र सौंपा है. इस पर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया के भी हस्ताक्षर है. 

जयपुर: मुख्यमंत्री निवास को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस कंट्रोल रूम में आया फोन 

मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को किया गया कोट: 
ऐसे में अब आखिर विशेषाधिकार हनन बनता है या नहीं इस पर विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. आरोप में मुख्यमंत्री के 35 करोड़ वाले बयान को कोट किया गया है. इस बारे में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कटारिया के कक्ष में एक बड़ी बैठक भी हुई है. 

संयम लोढ़ा ने सतीश पूनिया पर लगाया था विशेषाधिकार हनन का आरोप:
वहीं इससे पहले निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने भी बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया पर विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया. लोढ़ा ने शिकायत में कहा है कि, सतीश पूनिया ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान 23 विधायकों को वोट के बदले खान, रिको प्लॉट देने और कैश ट्रांजैक्शन से लाभान्वित किया गया है.

21 जून को विधानसभा में दी थी शिकायत:
दरअसल, कांग्रेस सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय संयम लोढ़ा ने पूनिया के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की शिकायत 21 जून को विधानसभा में दी थी. विधानसभा सचिवालय ने अध्यक्ष के समक्ष फाइल पुटअप किया था. ऐसे में अब दोनों ही मामलों में विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को फैसला करना है. 

क्या है विशेषाधिकार हनन?
देश में विधानसभा, विधानपरिषद और संसद के सदस्यों के पास कुछ विशेष अधिकार होते हैं, ताकि वे प्रभावी ढंग से अपने कर्तव्यों को पूरा कर सके. जब सदन में इन विशेषाधिकारों का हनन होता है या इन अधिकारों के खिलाफ कोई कार्य किया जाता है, तो उसे विशेषाधिकार हनन कहते हैं. इसकी स्पीकर को की गई लिखित शिकायत को विशेषाधिकार हनन नोटिस कहते हैं.

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय

कैसे लाया जा सकता है विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव?
नोटिस के आधार पर स्पीकर की मंजूरी से सदन में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया जा सकता है. विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव संसद के किसी सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, जब उसे लगता है कि सदन में झूठे तथ्य पेश करके सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया गया है या किया जा रहा है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सुनिल शर्मा रिपोर्ट

अखिलेश, प्रियंका, दिग्विजय और सुरजेवाला ने उठाए विकास दुबे के एनकाउंटर पर सवाल, जमकर साधा निशाना

अखिलेश, प्रियंका, दिग्विजय और सुरजेवाला ने उठाए विकास दुबे के एनकाउंटर पर सवाल, जमकर साधा निशाना

लखनऊ: विकास दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद विपक्ष की ओर से लगातार एक के बाद एक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही है. सबसे पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसको लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है. 

वहीं विकास दुबे के मारे जाने की खबर के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक बार फिर सवाल उठाए हैं. प्रियंका ने ट्वीट कर कहा कि अपराधी का अंत हो गया, अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?

इसके साथ ही कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिसका शक था वह हो गया. विकास दुबे का किन किन राजनैतिक लोगों से, पुलिस व अन्य शासकीय अधिकारियों से उसका संपर्क था, अब उजागर नहीं हो पाएगा. पिछले 3-4 दिनों में विकास दुबे के 2 अन्य साथियों का भी एनकाउंटर हुआ है लेकिन तीनों एनकाउंटर का पैटर्न एक समान क्यों है?

विकास दुबे के मारे जाने की खबर के बाद ऱणदीप सुरजेवाला ने कहा कि विकास दुबे एनकाउंटर में मारा गया. कई लोगों ने पहले ही ये आशंका जताई थी. पर अनेकों सवाल छूट गए. उन्होंने पूछा- अगर उसे भागना ही था, तो उज्जैन में सरेंडर ही क्यों किया? उस अपराधी के पास क्या राज थे जो सत्ता-शासन से गठजोड़ को उजागर करते? पिछले 10 दिनों की कॉल डिटेल्ज़ जारी क्यों नहीं?

दूसरी ओर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कल जब विकास को जिंदा पकड़ा गया तो भी विपक्ष सवाल उठा रहा था आज जब मारा गया तब भी विपक्ष सवाल उठा रहा है.

विकास दुबे एनकाउंटर को लेकर अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा- कार नहीं पलटी, सरकार पलटने से बचाई गयी

विकास दुबे एनकाउंटर को लेकर अखिलेश यादव ने कसा तंज, कहा- कार नहीं पलटी, सरकार पलटने से बचाई गयी

लखनऊ: आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मास्टरमाइंड विकास दुबे का एनकाउंटर में अंत हो गया है. विकास दुबे का एनकाउंटर होते ही अब राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आना शुरू हो गई है. सबसे पहले समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इसको लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है. 

विकास दुबे ने की थी पुलिसकर्मी की पिस्‍टल छीनने की कोशिश, पुलिस वैन पलटी और फिर खेल खत्म 

गिरफ्तारी पर खड़े किए थे सवाल: 
इससे पहले भी अखिलेश यादव ने गुरुवार को विकास दुबे की गिरफ्तारी पर सवाल खड़े किए थे. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था कि ख़बर आ रही है कि ‘कानपुर-काण्ड’ का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है. अगर ये सच है तो सरकार साफ़ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ़्तारी. साथ ही उसके मोबाइल की CDR सार्वजनिक करे जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके.

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय 

विकास दुबे ने पुलिस के एक जवान से हथियार छिनने का किया प्रयास: 
बता दें कि आठ पुलिसकर्मियों की हत्या का मास्टरमाइंड विकास दुबे का एनकाउंटर में अंत हो गया है. विकास को कमर में गोली लगी है जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. एनकाउंटर में STF के दो जवान भी घायल हुए हैं. दरअसल, कानपुर आते ही पुलिस के गाड़ी रास्ते में पलट गई. इसी दौरान विकास दुबे ने पुलिस के एक जवान से हथियार छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसे 3 गोलियां लगीं. 


 

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय

कांग्रेस का 'मिशन पंचायत '! अदालती आदेशों के बाद पायलट कैंप सक्रिय

जयपुर: पंचायत चुनावों को लेकर अदालती आदेश ने कांग्रेस की अंदरूनी सियासत को उफान पर ला दिया है. पहले से ही पंचायत चुनाव समय पर कराने की सोच रखने वाले डिप्टी सी एम और पीसीसी चीफ सचिन पायलट ने सक्रियता बढ़ा दी है, वे ग्रामीण विकास और पंचायती राज महकमे के मंत्री भी है. गांव की राजनीति करने की पसंद रखने वाले पायलट की शायद ये सोच है कि उनके प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहते हुये पंचायत चुनाव भी हो जाये. 

विकास दुबे ने की थी पुलिसकर्मी की पिस्‍टल छीनने की कोशिश, पुलिस वैन पलटी और फिर खेल खत्म

कांग्रेस के अंदर की सियासत को उफान पर:
अक्टूबर तक पंचायत चुनाव कराये जाने के सर्वोच्च अदालत के फरमान ने राज्य की कांग्रेस के अंदर की सियासत को उफान पर ला दिया. डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट पक्ष धर रहे है पंचायत चुनाव सही वक्त पर कराने के लेकिन कोविड के कारण ऐसा नहीं हो पाया था. जाहिर है पायलट कैम्प की सोच है कि पीसीसी अध्यक्ष पद पर काबिज रहते हुये पंचायत ओर निकाय दोनों चुनाव संपन्न हो जाये.

कांग्रेस के लिये यह सदैव पसंदीदा चुनाव कहे जाते रहे: 
सरपंच, पंच, पटेल, प्रधान और प्रमुख.. कांग्रेस के लिये यह सदैव पसंदीदा चुनाव कहे जाते रहे है. कांग्रेस पार्टी इन चुनावों को दमखम से साथ लड़ती है. पहला टारगेट होता है विचारधारा आधारित सरपंच और फिर प्रधान और जिला प्रमुख जीते. गांव और किसान की सियासत पर सदैव कांग्रेस का फोकस रहा है. पायलट कैम्प चाहता है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी जल्द ही पंचायतीराज चुनाव को लेकर जिला और पंचायत स्तर पर चुनाव पर्यवेक्षक या प्रभारी की नियुक्ति करेगी. सचिन पायलट कैम्प की गणित .

--- समय पर पंचायत चुनाव हो जाये 
---प्रदेश कांग्रेस की कमान सचिन पायलट के हाथों में रहे
---संगठन चीफ होने से टिकट वितरण में पूरा दखल रहे
----पंचायत चुनाव में जीत का क्रेडिट खाते में आये 
---समर्थक प्रमुख और प्रधान बनाने में मिले कामयाबी
--स्व जातीय वोटों का साथ मिलने का भरोसा 

VIDEO: अजमेर में सोनोग्राफी करवाने गई युवती के साथ छेड़छाड़, युवक की लात-घूंसों और चप्पलों से की पिटाई

गहलोत सरकार में सचिन पायलट के पास ग्रामीण विकास और पंचायती राज महकमा है. पसंद के मुताबिक पायलट ने ये महकमा चुना था जिससे ग्रामीण राजनीति में धाक कायम रहे. जाहिर है सत्ता में होने के कारण और ग्रामीण इलाकों में पकड़ के कारण पंचायत चुनावों में कांग्रेस को बड़ी जीत मिल सकती है.  लिहाजा है जंग है इस विजय का श्रेय लेने की. सब कुछ टिका है पीसीसी के नये भविष्य पर.

... फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

Open Covid-19