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नागौर में तांगा दौड़ शुरू करवाने को लेकर फिर उठी मांग

नागौर में तांगा दौड़ शुरू करवाने को लेकर फिर उठी मांग

नागौर: जिले के ऐतिहासिक मेलो मे होने वाली परम्परागत तांगा दौड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर से सुनवाई होनी है. मेलो में होने वाली तांगा दौड़ बीते कुछ वर्षों से बंद पड़ी है और पशु क्रूरता से जोड़कर इसको बंद किया गया था. लेकिन इसी बीच एक बार फिर नागौर की इस परम्परागत दौड़ को शुरू करवाने की मांग मुखर हुई है.

सरकार अध्यादेश लेकर आए: 
आज नागौर जिला प्रशासन को सर्व समाज की ओर से प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और ज्ञापन में सर्व समाज की ओर से मांग की गई है कि नागौर के ऐतिहासिक तांगा दौड़ का वजूद बचाने के लिए सरकार अध्यादेश लेकर आए. सरकार की ओर से लगाई गई पीटिशन को हाईकोर्ट जोधपुर में खारिज होने के कारण अब सुप्रीम कोर्ट मे सुनवाई अगले महीने होनी है. जानकारी के अनुसार तांगा दौड़ के लिए लगातार हो रही मांग पर राज्य सरकार की ओर से SLP दायर की गई थी और जिला प्रशासन ने अपना पक्ष रखते हुए दौड़ को लेकर रूट चाट बनाकर पेश किया था सुप्रीम कोर्ट में स्टेट सरकार ने रिकॉलिंग के लिए एप्लीकेशन लगाई थी. इस पर अब हाईकोर्ट में सुनवाई होना बाकी है.

सर्वसमाज ने कलक्टर को ज्ञापन देकर रखी मांग: 
नागौर में साल 2014 से तांगा दौड पर रोक लगी है. नागौर जिला कलक्टर को तांगा दौड़ संघर्ष समिति और सर्व समाज द्वारा दिए ज्ञापन में तमिलनाडु के जलीकट्टू का हवाला देते हुए कहा की जब जलीकट्टू के लिए अध्यादेश लाकर शुरू किया जा सकता है तो फिर नागौर की तांगा दौड़ को शुरू क्यों नहीं किया जा सकता. ज्ञापन में मांग की है कि सरकार अध्यादेश लाकर जनभावना को ध्यान में रखते हुए तांगा दौड़ को फिर से शुरू करें.

...नरपत ज़ोया संवाददाता 1st इंडिया न्यूज नागौर 

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नागौर: राजस्थान के कई जिलों में टिड्डी दल का हमला जारी है. बीते एक सप्ताह से नागौर में भी टिड्डी दल का हमला जारी है और लगातार 3 दिनों से डीडवाना उपखण्ड क्षेत्र में टिड्डियों का हमला जारी है. टिड्डियों द्वारा फसलों और पेड़ पौधों को भारी नुकसान पंहुचाया जा रहा है. रविवार सुबह केंद्र से आई कृषि विभाग के अधिकारियों की 14 टीमें लगातार टिड्डी मारने और भगाने के प्रयास में जुटी हुई है. वहीं रविवार को डीडवाना विधायक चेतन डूडी भी अधिकारियों के साथ दौलतपुरा गांव में टिड्डियों द्वारा किये गए नुकसान का जायजा लेने पहुंचे. विधायक डूडी ने केंद्र से आये टीम के अधिकारियों से मुलाकात कर जानकारी और क्षेत्र का मौका मुआयना भी किया गया.

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कृषि मंत्री लालचंद कटारिया से की बात:
वहीं प्रदेश के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया से फ़ोन पर बात कर यहां के कर्मचारियों के स्थानांतरण पर रोक एवं नुकसान की आशंका को मध्यनजर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग भी की गई है. डूडी ने मौके पर पंहुचे कृषि अधिकारियों से आंकलन करवाने के आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए. वहीं डूडी ने टिड्डियों को लेकर जिला कलेक्टर से भी वार्ता कर क्षेत्र में टिड्डी पर नियंत्रण को लेकर चर्चा की गई.

फसलों और पेड़ पौधों को टिड्डी से बचाएं:
डूडी ने इस दौरान किसानों से भी अपील करते हुए कहा है कि 8 किलोमीटर लंबे और चार किलोमीटर चौड़े इस टिड्डी दल पर कृषि विभाग द्वारा अकेले नियंत्रण नही किया जा सकता है. किसानों से अपील करते हुए कहा है कि किसान अपने अपने खेतों में टिड्डी भगाने का प्रयास करे और फसलों और पेड़ पौधों को टिड्डी से बचाएं ताकि बड़े नुकसान से बचा जा सके. टिड्डडी दल डीडवाना के आसपास बीती रात से बैठा है और सबह तीन बजे ही टीमों ने स्प्रे कर इसको मारने का प्रयास शुरू किया गया. दिन उगने के बाद टिड्डियों का दल उड़कर आसमान में चला जाता है जिसको मारना मुश्किल हो जाता है और स्प्रे काम नही करता है.

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एक पिता की अनूठी पहल, प्रवासी बेटे के आइसोलेशन के लिए बना दिया सर्व सुविधाओं युक्त ढाई दिन का झोपड़ा

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डीडवाना: एक पिता ने अपने प्रवासी बेटे को संस्थागत क्वारंटाइन में दूर स्कूल में जाने से बचाने के लिए एक अनूठी पहल की. मामला नागौर जिले के जायल के खेराट गांव का है. जहां पर एक पिता ने अपने प्रवासी बेटे के क्वारंटाइन के लिए गांव पहुंचने से पहले ही ढाई दिन में सुविधाओं युक्त एक झोंपड़ा घर बना दिया. ताकि दोनों बेटे और बहू पोतों के साथ उसमें रह सकें. 

खाने पीने और रहने की समस्या पर जताई चिंता:
खेराट ग़ांव के मोहन लाल सिद्ध के दो बेटे और बड़े बेटे की पत्नी और दो बच्चे छत्तीसगढ़ के रायपुर से ग़ांव आना चाह रहे थे. बड़े बेटे ने पिता से आने पर प्रशासन द्वारा व्यवस्था के बारे मे पूछा तो मोहनलाल ने स्थानीय बीएलओ और प्रशासन से इसकी जानकारी ली तो प्रशासन की तरफ से दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को इंस्टिट्यूशनल क्वारंटाइन की बात कही गई. जिसपर मोहनलाल ने बेटे पोतों को घर से दूर स्कूल में रखने की पर वहां होने वाली खाने पीने और रहने की समस्या को लेकर असुविधा को लेकर चिंता जताते हुए प्रशासन से बेटे के लिए दूसरी व्यवस्था की गुहार लगाई तो उपखण्ड अधिकारी ने अलग झोंपड़ा बनाने की सलाह दी.

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सर्व सुविधाओं युक्त बनाया झोंपड़ा:
जिसको मोहनलाल ने मान तो लिया, लेकिन दो दिन बाद ही परिवार समेत बेटा आने वाला था और व्यवस्था ना हुई तो बेटे को स्कूल में रख देंगे, इस चिंता से पिता ने महज ढाई दिन के समय मे सर्व सुविधाओं युक्त झोंपड़ा बना दिया, जिसमें ना केवल विद्युत कनेक्शन बल्कि कूलर पंखे के साथ साथ मोबाइल चार्जिंग की व्यवस्था और सोने के लिए खाट बना दी. प्रशासन से स्वीकृति के बाद मोहनलाल के दोनों बेटों बहु और पोतों को घर के बाहर बने इस झोंपड़े में रहने की इजाजत दे दी गई.

लोगों को जागरूकता का संदेश:
इनके खाने पीने के लिए अलग बर्तन आदि की व्यवस्था मोहनलाल ने कर दी, ताकि घर के बर्तनों का उपयोग ना करे, जिससे संक्रमण का खतरा ना रहे. एकतरफ जहां पढ़े लिखे लोग कोरोना संक्रमण और क्वारंटाइन के प्रति लापरवाही करते देखा जा सकता है ऐसे में एक अनपढ़ वृद्ध पिता की यह अनूठी पहल सबको दांतो तले अंगुली थामने को मजबूर करती है दूसरी तरफ लोगों को जागरूकता का संदेश भी देती है. 

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रियांबड़ी: उपखंड मुख्यालय स्थित बस स्टैंड पर लगे सब्जी ठेलों के सामने शनिवार दोपहर में सड़क किनारे खड़ी हुई बुलेट में अचानक आग लग गई. आसपास के लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो सके. थोड़ी ही देर में आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि उससे 8 फीट ऊंची लपटें उठने लगीं. आग की लपटें देख और टंकी फटने के डर से लोग उसके पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे. 

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अचानक से बुलेट में से निकलने लगा धुआं :
सूचना पर आसपास के घरों की और दुकानों की छतों पर से लोगों ने पानी डाल कर जब तक आग पर काबू पाया, बुलेट जलकर खाक हो चुकी थी. जानकारी के अनुसार बस स्टेशन पर सब्जी खरीदने आये एक युवक की बुलेट बस स्टैंड पर लगे सब्जी ठेलों के सामने खड़ी हुई थी. अचानक से बुलेट में से धुआं निकलने लगा. इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता उसमें आग लग गई.

करीब 20 मिनिट तक जलती रही बुलेट:
थोड़ी ही देर में आग की ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं. इस दौरान बुलेट के आसपास कई और वाहन भी खड़े हुए थे, लेकिन आग देखकर किसी की हिम्मत उसके पास जाने की नहीं हो रही थी. शुरुआत में कुछ लोगों ने पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया गया, पर कोई फायदा नहीं हुआ. आग की लपटे बढ़ने लगी. टंकी फटने के डर से सड़क के दोनों और लोग दूर से ही सारा नजारा देखते रहे. करीब 20 मिनिट तक बुलेट से आग की लपटे निकलती रहीं. आखिरकार कुछ लोगों ने हिम्मत कर छतों पर से बुलेट पर पानी डाला.

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टिड्डी दल के खात्मे को लेकर नागौर के कृषि विभाग के अधिकारियों ने तैयार किया एक्शन प्लान, 5 टीमों का किया गठन

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नागौर: पाकिस्तान से आए कई अलग टिड्डी दल ने नागौर जिले में जमकर तबाही मचाई है. अब टिड्डी दल को समाप्त करने के लिए प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह से सतर्क नज़र आ रहा है. गुरुवार को कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव और  नागौर के प्रभारी सचिव नरेशपाल गंगवार ने नागौर जिला कलेक्ट्रेट सभागार में कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर टिड्डी दल के खात्मे को लेकर एक्शन प्लान तैयार किया है.

किसानों की फसलों को हुआ नुकसान:
जिला प्रशासन ने टिड्डी दल से निपटने के लिए तैयारियां के बारे में जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव ने विस्तृत कार्य योजना की जानकारी दी. इस बैठक में टिड्डी के द्वारा जिले में किसानों की फसलों को पहुंचाये गए नुकसान को लेकर चर्चा की गई. इसके साथ ही टिड्डियों को समाप्त करने के लिए पांच टीमों का गठन किया गया.कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव तथा नागौर के प्रभारी सचिव नरेशपाल गंगवार ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि यह टिड्डी दल पाकिस्तान, अफ्रीका के इलाके से भारत में प्रवेश कर सकता है.

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कई जिलों में हुआ टिड्डी दल: 
डेजर्ट के इलाके बाडमेर से होते हुए नागौर सहित कई जिलों में टिड्डी दल का हमला हुआ है. नियन्त्रण दल द्वारा उनके ऊपर पेस्टिसाइड का स्प्रे करके नष्ट्र कार्य किया जा रहा है केन्द्र सरकार अब डॉन कैमरें की उपलब्धता करवाएंगी टिड्डी दल को समूल नष्ट करके किसानों को राहत देने का प्रयास जारी है. नागौर जिले में टिड्डी के दल ने खिवसर ,मकराना ,मेडता,नागौर व आज जायल में नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि टिड्डी के दल को कंट्रोल करने के लिए विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी कार्ययोजना बना ली गई है.

किसानों को अलर्ट रहने के दिए निर्देश:
इसके साथ ही अब कृषि विभाग की ओर से रात्रि को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हुए स्प्रे का छिड़काव कर टिड्डी दल  समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा.टिड्डी बड़ी आपदा के रूप में पनप चुकी है, इससे अब अगले बड़े हमले से पहले किसानों को अलर्ट रहने के लिए आगाह किया है. उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि अगर कहीं भी टिड्डी दल देखने और होने की सूचना प्राप्त होती है तो वे तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों को सूचित करें.

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सादगीपूर्ण मनाई महाराणा प्रताप जयंती, राजपूत सभा भवन के छात्रावास में मनाई जयंती

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डीडवाना: नागौर के ​डीडवाना में शनिवार को महाराणा प्र​ताप की जयंती सादगी से मनाई गई. हर वर्ष महाराणा प्र​ताप की जयंती पर राजपूत समाज की ओर से बड़े आयोजन किए जाते है. लेकिन इस वर्ष पूरे देश में कोरोना वायरस से बचाव के लिए लॉकडाउन है. तो ऐसे में सभी बडे आयोजनों पर रोक है. साथ ही सोशल डिस्टेंसिंग की पालना जरूरी है.

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पुष्पांजलि कार्यक्रम हुआ आयोजित:
लॉक डाउन की पालना के लिए राजपूत समाज द्वारा राजपूत सभा भवन में महाराणा प्रताप जयंती के आयोजन सादगीपूर्ण तरीके से राजपूत छात्रावास में किया गया. जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए महाराणा प्रताप की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर जयंती मनाई गई. 

रक्तदान शिविर का आयोजन:
वहीं पिछले दिनों लोकडाउन की वजह से बांगड ब्लड बैंक में आसपास के क्षेत्रों में ब्लड डोनेशन कैम्प ना होने की वजह से रक्त की कमी महसूस की जा रही थी, जिसके लिए राजपूत समाज के युवाओं ने शनिवार को महाराणा प्रताप जयंती पर ब्लड डोनेशन करके ब्लड बैंक में ब्लड की कमी पूर्ति करने का प्रयास भी किया. 

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नागौर: पश्चिमी राजस्थान के रास्ते जैसलमेर से नागौर बड़ा टिड्डी दल नागौर तक पहुंच गया है. नागौर में खींवसर विधानसभा क्षेत्र में पहुंचा और उसके बाद मुंडवा क्षेत्र में टिड्डी दल ने किसानों के खेतों में नुकसान पहुंचना शुरू किया है. 

टिड्डी ने किया हरे खेजड़ी के पेड़ों की पत्तियों को चट:
खतों में कुछ जो फसलें बाकी थी, उनको नुकसान हुआ है वहीं खेतो में पड़े चारे को भी टिड्डी दल ने चट कर दिया है. वहीं अब टिड्डी हरे खेजड़ी के पेड़ों की पत्तियों को चट कर रही है. वहीं छोटे पेड़ पौधे भी टिड्डी की वजह से नुकसान पहुंच रहा है. स्थानीय किसानों ने बताया कि टिड्डी दल ने ईनाणा रूपाथल रेन क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान किया गया है. 

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लंबे अरसे बाद क्षेत्र में टिड्डी दल आया:
ग्रामीणों ने बताया कि टिड्डी दल आने की सूचना प्रशासन को दी तो प्रशासन द्वारा स्प्रे कर दवाई का छिड़काव करवाया गया है. जिससे टिड्डी दल यहां से हटकर आगे रवाना हो गया है. वहीं टिड्डी ने तालाबों के पानी को भी गन्दा कर दिया गया है. ग्रामीणों ने बताया कि एक लंबे अरसे बाद क्षेत्र में टिड्डी दल आया है. ग्रामीण भी पीपे और बर्तनों को बजाकर टिड्डी दल भगाने का प्रयास कर रहे है. 

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राशन डीलरों के खराब गेहूं बांटने पर हुआ हंगामा, कार्ड धारकों ने गेहूं लेने से किया इनकार

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कुचामनसिटी: गोदामों में खराब हो चुके गेहूं को राशन डीलरों को सप्लाई कर राशन धारकों में बांटा जा रहा है. यह सिलसिला काफी समय से चल रहा है और गोदामों में सड़ा हुआ गेहूं पहुंच रहा है. अब जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की तरफ से शहर में  गेहूं भेज दिया गया. जब इसे लोगों में बांटा जा रहा था तो वार्डवासियों ने हंगामा कर दिया. लोगों ने मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की है.

कार्ड धारकों ने गेहूं लेने से किया इनकार:
खराब गेहूं मामले में एक राशन डीलर चन्द्रशेखर ने बताते हुए कहा कि गेहूं बांटने के लिए आया था. इसमें अधिकतर गेहूं खराब निकल रहा है. गेहूं में गांठ बनी थी तो उसमें फफूंदी लगी थी. कार्ड धारकों ने लेने से मना कर दिया. डीलर का कहना है कि गेहूं खराब आने की जानकारी विभाग को दी गई है, लेकिन उसके बावजूद कुछ नहीं किया जा रहा है. कुचामन शहर के राशन डीलरों पर बीपीएल और एपीएल कार्ड धारकों को वितरित करने के लिए गेहूं पहुंचा था.

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सड़ा हुआ निकला गेहूं:
गेहूं के बोरे को खोला गया तो उनमें से सड़ा गेहूं निकला. वह गेहूं पूरी तरह से खराब हो चुका था, जिसमें फफूंदी लगने के साथ ही गांठ बनी थी. इसके बावजूद गरीबों को बुलाकर उस गेहूं को राशन में बांटना शुरू कर दिया गया. इस तरह खराब गेहूं मिलने पर राशन लेने के लिए पहुंचे वार्डवासी भड़क गए और सरकार और विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. राशन कार्ड धारक जलालुद्दीन का कहना था कि परिवार को खिलाने के लिए राशन लेकर जाते हैं. इस तरह का राशन खिलाएंगे तो परिवार बीमार हो जाएगा. उन्हें अच्छा गेहूं मुहैया करवाया जाए, तभी राशन लेंगे.

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लॉकडाउन: सादगी से मना भगवान नृसिंह का प्राकट्योत्सव, 125 साल से हो रही रम्मत नहीं हो पाई

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नागौर: भगवान नृसिंह के प्राकट्योत्सव पर जिले के बंशीवाला मंदिर में हर साल होने वाली ऐतिहासिक रम्मत कोरोना वायरस के कारण नहीं हो पाई. करीब 125 साल में पहली बार ऐसा हुआ है. जिले की यह रम्मत प्रसिद्ध है और देश के कोने-कोने से प्रवासी हर हाल यह रम्मत देखने आते हैं.

125 साल पहली बार नहीं हुई रम्मत:
कोरोना वायरस ने न केवल हमारे रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित किया है बल्कि कई सामाजिक और एतिहासिक परंपराएं भी इस साल महामारी के कारण टूटी हैं. भगवान नृसिंह के प्राकट्योत्सव के मौके पर हर साल नागौर के बंशीवाल मंदिर में ऐतिहासिक रम्मत होती है लेकिन 125 साल में इस साल पहली बार लॉकडाउन के चलते यह रम्मत नहीं हो पाई.भगवान के प्राकट्योत्सव के मौके पर मंदिर के पुजारियों ने नृसिंह विग्रह को मंदिर में विराजमान कर आरती की.

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नृसिंह भगवान का प्राकट्योत्सव मनाया गया:
नृसिंह जयंती के मौके पर नागौर में सुबह से ही इस रम्मत की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. हर गली-मोहल्ले में कुछ लोग हरिण्यकश्यप के मलुकों का स्वांग धारण कर घूमते रहते हैं. लॉकडाउन के कारण मंदिर आमजन के लिए बंद है. कोरोना महामारी फैलने के खतरे के चलते सभी धार्मिक आयोजन भी नहीं हो रहे हैं. इस बीच नृसिंह त्रयोदशी के मौके पर भगवान नृसिंह के विग्रह को मंदिर के गर्भगृह में विराजमान कर पूजा अर्चना की गई और आरती हुई. इसी तरह अन्य मंदिरों में भी नृसिंह भगवान का प्राकट्योत्सव मनाया गया.

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