जयपुर VIDEO:  जयपुर को 'लेपर्ड कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड' बनाने की मांग, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO:  जयपुर को 'लेपर्ड कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड' बनाने की मांग, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: अपने स्थापत्य और गौरवशाली इतिहास के लिए दुनियाभर में मशहूर की जयपुर की अब नई पहचान बनने लगी है. शहर के बीच अरावली की सुरम्य वादियों में लेपर्ड संरक्षण में हम दुनिया में नई नजीर पेश कर रहे हैं. ऐसे में अब दुनियाभर में जयपुर की पहचान लेपर्ड कैपिटल ऑफ वर्ल्ड के तोर पर भी होने लगी है. जयपुर में झालाना, आमागढ़, नाहरगढ़ और अचरोल को मिलाकर लेपर्ड्स की संख्या 75 के करीब पहुंच गई है. अब वन्यजीव प्रेमी जयपुर को सरकार द्वारा आधिकारिक तौर पर लेपर्ड कैपिटल ऑफ वर्ल्ड घोषित करवाने की मुहिम चला रहे हैं. 

झालाना में महज 21 वर्ग किलोमीटर के वन क्षेत्र में करीब 45 लेपर्ड, गलता, आमागढ़-काली बेरी के करीब 18 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 15 से 20 लेपर्ड और नाहरगढ़ वन क्षेत्र में भी करीब 15 लेपर्ड का विचरण है. इन सभी की पहचान कैमरा ट्रेप में हुई है. वन विभाग की संगठित मेहनत को ही परिणाम है कि झालाना में जो ग्रासलैंड विकसित की गई और प्रे बेस बढ़ाने पर कार्य हुआ उससे न केवल यहां लेपर्ड्स की संख्या बढ़ी वरन पर्यावरण सुधार और भूजल स्तर बढने जैसी महत्वपूर्ण घटना भी हुई. 

दरअसल वन एवं पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी के नेतृत्व में विभाग के अफसरों ने भी समन्वित प्रयास किए हैं. हाल में ही वन विभाग के प्रमुख सचिव का पद संभालने के बाद जिस तरह से शिखर अग्रवाल ने वन और वन्यजीव संरक्षण की दिशा में तेजी से कार्य किया उससे साफ है कि विभाग वन और वन्यजीव संरक्षण में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता. पीसीसीएफ हॉफ डॉ डीएन पांडे, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिंदम तोमर, डीएएफओ अजय चित्तोड़ा और रेंजर जनेश्वर चौधरी सहित पूरी टीम की झालाना और आमागढ़ को  लेकर मेहनत रंग लाने लगी है. वन विभाग ने झालाना से सरिस्का तक जो एक वृहद लेपर्ड कॉरिडोर विकसित करने की सोच पर काम किया उसके अब परिणाम आने लगे हैं. जयपुर दुनिया का एक मात्र ऐसा शहर है जहां झालाना और आमागढ़ के तौर पर दो लेपर्ड सफारी, नाहरगढ़ में लॉयन सफारी और आमेर व कुंडा में हाथी सफारी का पर्यटक आनंद उठा सकते हैं. 

जल्द ही नाहरगढ़ में टाइगर और बर्ड सफारी तथा मायला बाग ओर औधीरामसगर क्षेत्र में लेपर्ड सफारी भी शुरू करने की योजना है. शहरीकरण के साथ वन विकास की जयपुर जैसी मिसाल दुनिया में कहीं देखने को नहीं मिलती. इसलिए जयपुर अब अर्बन वाइल्डलाइफ ट्यूरिज्म का नया हब बनने गया है. ऐसे में वन्यजीव प्रमियों में मांग उठने लगी है कि जयपुर को राज्य सरकार द्वारा जल्द ही 'लेपर्ड कैपिटल ऑफ वर्ल्ड' घोषित किया जाए ताकि लेपर्ड संरक्षण में और अधिक तकनीकी व ठोस प्रयास शुरू हो सकें. दरअसल स्टेट वाइल्डलाइफ बोर्ड के सदस्य सुनील मेहता ने इस मामले में राज्य सरकार को पत्र लिखकर जल्द ही जयपुर को 'लेपर्ड कैपिटल ऑफ वर्ल्ड' घोषित करने की मांग की है.

दरअसल मुंबई के संजय गांधी नेशनल पार्क में 87 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में महज 26 लेपर्ड हैं. इसके बावजूद वहां की सरकार मुंबई को लेपर्ड कैपिटल घोषित कर चुकी है. दूसरी ओर जयपुर के झालाना में मात्र 20  वर्ग किलोमीटर में ही 45  के करीब लेपर्ड्स होने के बावजूद हम पीेछे नजर आ रहे हैं. ऐसे में अब स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य सुनील मेहता, धीरेंद्र गोधा, सरिसका फाउंडेशन के अध्यक्ष दिनेश दुर्रानी, वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट धीरज कपूर और अन्य वन्यजीव प्रेमियों ने जयपुर को 'लेपर्ड कैपिटल ऑफ वर्ल्ड' मुहिम शुरु की है. 

धीरेंद्र गोधा का कहना है कि महज 21 वर्ग किलोमीटर में करीब 45 लेपर्ड होने से 'लेपर्ड कैपिटल ऑफ वर्ल्ड' के तौर पर जयपुर का दावा सबसे मजबूत है. इस मामले में दिनेश दुर्रानी कहते हैं 'जयपुर के लेपर्ड कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड घोषित होने से लेपर्ड व अन्य वन्यजीवों के सरंक्षण और पर्यावरण सुधार जैसे काम तो होंगे ही लोगों को रोजगार मिलेगा और जयपुर दुनियाभर में लेपर्ड संरक्षण की दिशा में मिसाल कायम करेगा.

अर्बन वाइल्डलाइफ को अभी तक चिडियाघर में सींखचों के पीदे कैद वन्यजीवों के तौर पर देखा जाता था लेकिन जिस तरह जयपुर में लेपर्ड कंजर्वेशन के काम हुए हैं उसने साबित कर दिया कि वन और वन्यजीवों के सरंक्षण से कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सकता है. प्रदूषण से शहर को बचाने के लिए वनों को ढाल बनाया जा सकता है और गिरते भूजल स्तर को वापस रिचार्ज किया जा सकता है. और जयपुर में ये सब संभव हुआ है लेपर्ड सफारी से. इसलिए जयपुर को अब  लेपर्ड कैपिटल ऑफ वर्ल्ड' घोषित करने में सरकार को देर नहीं  करनी चाहिए.

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