VIDEO: ट्रैफिक नियमों में सख्ती के बावजूद नहीं रुक रहे सड़क हादसे, हर साल 10 हजार मौतें

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/28 11:59

जयपुर: राजस्थान में सड़क हादसाें से जुड़े मई माह तक के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चिंताजनक हैं. पुलिस एवं परिवहन विभाग के सड़क सुरक्षा जागरुकता अभियान के बाद भी सडक हादसों पर ब्रेक नहीं लग रहा है. हादसों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. कैसे बढ़े हैं आकड़े, क्या परिवहन व पुलिस के सभी उपाय साबित हो रहे हैं विफल, देखिए ये खास रिपोर्ट:

सड़क दुर्घटनाओं में मौत और घायलों की संख्या बढ़ी:
प्रदेश में पिछले कई सालों का एक ट्रेंड बना हुआ है कि औसतन दस हजार लोगों की मौत सड़क हादसों के चलते होना अवश्यंभावी है. यानी कितने ही प्रयास किए जाएं, सड़क हादसों में होने वाली मृत्यु की यह संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है. लेकिन इस वर्ष तो हालात और ज्यादा खराब हैं. दरअसल पिछले 3 सालों में जब सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्या थोड़ी कम हो रही थी, वहीं इस बार अब तक के आंकड़ों में यह बढ़ी हुई दिखाई दे रही है. इस वर्ष जनवरी से मई माह तक के जो आंकड़े सामने आए हैं. उनमें यह साफ हो रहा है कि इस बार न केवल हादसों की संख्या बढ़ रही है. साथ ही हादसाें में होने वाली मौतों और घायलों की संख्या भी बढ़ रही है. इन आंकड़ों ने परिवहन विभाग के साथ-साथ राज्य सरकार के लिए चिंता बढ़ा दी है.  

इस तरह बढ़े हादसे और मौतें:
—वर्ष 2018 में जनवरी से मई तक 4411 लाेगाें की मौत हुई
—इस वर्ष जनवरी से मई तक मौतों की संख्या 4614 हुई
—यानी 5 माह में पिछले साल से 203 मौतें ज्यादा हुईं
—2018 में मई माह तक घायल 9892 थे, इस वर्ष 10194 घायल हुए
—2018 में मई तक कुल 9753 हादसे हुए, इस वर्ष 10346 हादसे हुए

जानिए प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के हाल:
वर्ष : सड़क हादसे : हादसों में घायल : हादसों में मौत

2016 : 23066 : 24103 : 10465
2017 : 22112 : 22071 : 10444
2018 : 21743 : 21547 : 10320

पिछले 2 साल में 53700 वाहनचालकों के लाइसेंस निलंबित:
ऐसा नहीं है कि परिवहन विभाग सड़क हादसों को रोकने या कम करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठा रहा है. सड़क सुरक्षा जागरुकता अभियान चलाने, ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए विभाग कई तरह के प्रयास कर रहा है. यहां तक कि जो लोग ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्ती की जा रही है. दरअसल ट्रैफिक पुलिस द्वारा वाहन चलाने में गलती मिलने पर परिवहन विभाग को सम्बंधित वाहन चालक का लाइसेंस निलंबित करने के लिए अनुशंसा की जाती है. इस पर लाइसेंस सेक्शन के जिला परिवहन अधिकारी लाइसेंस धारक काे सुनवाई के लिए नाेटिस जारी करता है. सुनवाई के बाद अधिकतम 6 माह के लिए लाइसेंस निलंबित किया जाता है. निलंबन अवधि में व्यक्ति वाहन चलाता है ताे उसे बिना लाइसेंस माना जाएगा. क्लेम नहीं मिलेगा. लाइसेंस निलंबित होने के बाद वाहन चलाते पाए जाने पर 500 रुपए के जुर्माने का प्रावधान है. नए मोटर व्हीकल अमेंडमेंट बिल में इसे बढ़ाकर 10 हजार रुपए किया जा रहा है. 

नियम तोड़े, तो लाइसेंस होगा निलंबित:
—मोबाइल पर बात करने, दुर्घटना करने, तेज स्पीड में वाहन चलाने
—शराब पीकर वाहन चलाने, रेड लाइट क्राॅस करने
—गलत दिशा में वाहन चलाने पर ट्रैफिक पुलिस कर रही कार्रवाई
—पुलिस की अनुशंसा पर RTO ने 53 हजार 700 लाेगाें के लाइसेंस निलंबित किए
—वर्ष 2017 में पुलिस ने 30 हजार लाइसेंस निलंबन की अनुशंसा की
—इनमें से 26 हजार 400 वाहन चालकों के लाइसेंस निलंबित किए
—वर्ष में 2018 में 31 हजार अनुशंसा में से 27 हजार 300 लाइसेंस निलंबित किए

हाल ही में राजधानी जयपुर में हुए खतरनाक सड़क हादसों ने ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के साथ ही शहर की एजेंसियों जेडीए व नगर निगम के सामने भी सवाल उठा दिए हैं कि आखिर रोड इंजीनियरिंग सम्बंधी खामी है या फिर ट्रैफिक पुलिस के नियमों में और सख्ती की आवश्यकता है. कुल मिलाकर बढ़ते हादसे हर किसी के लिए चिंताजनक हैं, जिन्हें प्रदेशवासी खुद की जागरुकता दिखाकर भी कम करने में सहयोग दे सकते हैं. 

... संवाददाता काशीराम चौधरी की रिपोर्ट 

 

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