देवस्थान विभाग जल्द ही संपत्तियों की ऑडिट कर नए सिरे से दे सकता है किराए पर

Nirmal Tiwari Published Date 2019/09/14 03:09

जयपुर: देवस्थान विभाग की अरबों रुपए की संपत्ति को औने पौने दामों में किराए पर देने के मामले में देवस्थान मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने गंभीरता से लिया है. देवस्थान विभाग जल्द ही इन संपत्तियों का ऑडिट करवाकर इन्हें नए सिरे से किराए पर दे सकता है. अभी विभाग को इन संपत्तियों के किराए से करीब 4 करोड़ रुपए सालाना ही मिल रहे हैं.  

प्रदेश में किराए योग्य कुल दो हजार 90 संपत्ति: 
प्रदेश के देवी देवताओं के पास अरबों रुपए की बेशकीमती संपत्ति है. इसके बाद भी देवों को न तो पर्याप्त भोग प्रसाद मिल रहा है और न ही उनकी खुदकी संपत्ति का वाजिब किराया. देवस्थान विभाग के पास प्रदेश में किराए योग्य कुल दो हजार 90 संपत्ति हैं इनमें से 1953 बरसों से किराए पर चल रही हैं और 137 संपत्ति कानूनी विवाद या अन्य कारणों से खाली पड़ है. संयोगवश ही सही पर यह बात एकदम सही है कि प्रदेश में देवस्थान विभाग की सर्वाधिक 464 संपति अकेले भरतपुर जिले में जहां से खुद प्रदेश के देवस्थान मंत्री आते हैं.

भरतपुर जिले में देवस्थान विभाग की 452 किराए पर चल रही: 
भरतपुर जिले में देवस्थान विभाग की कुल 464 संपत्ति हैं इनमें से 452 किराए पर चल रही हैं और शेष 12 अभी खाली पड़ी हैं. इनसे देवस्थान विभाग को सालाना 55 लाख रुपए किराए के तौर पर मिलते हैं. इनमें आवासीय और व्यावसायिक दोनों तरह की संपति शामिल हैं. इसी तरह जोधपुर जिले में 367 संपतियों से 70 लाख रुपए सालाना और जयपुर जिले में 344 संपत्तियों से सालाना एक करोड़ 12 लाख रुपए किराया मिलता है. इन संपतियों में धर्मशाला, होटल, मंदिर, दुकान और सराय सहित कई तरह की संपत्ति शामिल हैं. पूरे प्रदेश में देवस्थान विभाग की 544 आवासीय और 1498 व्यावसायिक संपत्ति हैं.

संपत्तियों पर बरसों से एक ही घर या परिवार के सदस्य काबिज: 
सूत्रों की माने तो इन संपत्तियों पर बरसों से एक ही घर या परिवार के सदस्य काबिज हैं. किराया भी इनसे नाम मात्र का लिया जा रहा है जबकि संबंधित क्षेत्र की आवासीय और व्यावसायिक किराए की दर ली जा रही दर से दस गुना तक ज्यादा है. कई संपत्तियों उनके किराएदार अदालत के आदेश पर नाम मात्र का किराया ही दे रहे हैं. अब देवस्थान मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने ऐसी संपत्तियों का ऑडिट करवाने का फैसला किया है.  किस संपत्ति का कब से किराया निर्धारित, कितने समय से किराया नहीं बढ़ाया गया इस पर भी रिपोर्ट मांगी गई है. यही नहीं विभाग अब जल्द ही इन संपत्तियों का और इनसे मिलने वाले संभावित किराए का मूल्यांकन भी करवाएगा ताकि विभाग को समुचित राजस्व मिल सके. सूत्रों की माने तो जल्द ही विभाग के अधिकारी इस तरह की रिपोर्ट बनाकर मंत्री को देंगे इसके बाद मंत्री उच्चस्तर पर अनुमति लेकर देवस्थान रिवाइवल प्लान ला सकते हैं. 
 

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