सरकारी स्कूल में प्रवेश के लिए दो सौ रुपए का विकास शुल्क

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/07/03 09:07

ब्यावर (अजमेर)। देशभर में जहां एक और बेटियों को पढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही है। विशेष प्रकार के पैकेज उपलब्ध करवाए जाकर उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में बेटियों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है लेकिन शहर के एक सरकारी स्कूल में बेटियों के प्रवेश के लिए दो सौ रुपए की विकास शुल्क मांगा जा रहा है। विकास शुल्क के अभाव में सात-आठ बेटियों का प्रवेश नहीं हो पा रहा है। मामला राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बलाड़ से जुडा है।

जानकारी के अनुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय लोधा का बाडिया से पांचवी कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जब लड़कियां टीसी लेकर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बलाड़ पहुंची तो वहां के संस्था प्रधान पदमचंद जैन विकास ने शुल्क के नाम पर दो सौ रूपए की मांग करी। वहीं अभिभावकों ने आरोप लगाया कि, "लोधा का बाडिया स्कूल में कम्प्यूटर ऑपरेटर नहीं होने के कारण संस्था प्रधान सिकन्दर काठात हाथ से ही टीसी काटकर दे रहे है और वहीं टीसी लेकर जब हम बलाड़ स्कूल पहुंच रहे है तो संस्था प्रधान विकास शुल्क के नाम पर दो सौ रुपए देने के बाद ही प्रवेश देने पर अड़े है।" मंगलवार को कुछ अभिभावक पुन: लोधा का बाडिया स्कूल पहुंचे और संस्था प्रधान सिकन्दर काठात को आप बीती सुनाई तो उन्होंने बताया कि,"हाथ से कटी हुई टीसी भी मान्य है।" जिस पर उपस्थित अभिभावकों ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के संस्था प्रधान के खिलाफ आक्रोश जताया है।

उधर इस संबंध में संस्था प्रधान जैन से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि, "किसी भी अभिभावक पर विकास शुल्क देने का दबाव नहीं बनाया गया है। केवल सरकारी निर्देशों के कारण ऐच्छिक रूप से विकास शुल्क के लिए बोला गया है। वहीं हाथ से कटी टीसी भी स्वीकार की जा रही है लेकिन उसे निर्धारित फार्मेट में मांगा जा रहा है। अभी भी स्कूल में सीटें खाली है जो भी आएगा उसे प्रवेश दिया जाएगा।"  

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