VIDEO: कोरोना की दूसरी लहर का विकास परियोजना पर बुरा असर, चल रहे प्रोजेक्टस की रफ्तार पड़ी मंद

VIDEO: कोरोना की दूसरी लहर का विकास परियोजना पर बुरा असर, चल रहे प्रोजेक्टस की रफ्तार पड़ी मंद

जयपुर: कोरोना के बढ़ते संक्रमण और उसके कारण लागू लॉकडॉउन का शहर की विकास परियोजना पर प्रतिकूल असर पड़ा है. इसके कारण जल्द पूरे होने वाले प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही,वहीं कुछ प्रोजेक्ट्स तो अब तक मौके पर शुरू ही नहीं हो पाए हैं. आपको बता दें कि कोरोना के प्रदेश में बढ़ते संक्रमण के कारण 19 अप्रेल से लॉकडाउन लागू है. यह लॉक डाउन 24 मई तक लागू रहेगा. इस तिथि के बाद क्या स्थिति रहेगी, उस बारे में अभी कुछ स्थिति स्पष्ट नहीं हैं. ऐसे में कोराना संक्रमण और इसके चलते लागू लॉकडाउन के कारण जयपुर विकास प्राधिकरण की ओर से चल रही विकास परियोजना की रफ्तार बुरी तरह प्रभावित हो रही है. आपको बताते हैं इसके पीछे प्रमुख कारण क्या हैं.

प्रोजेक्ट में देरी के कारण:
-बड़ी संख्या में मजदूर काम पर नहीं आ रहे हैं
-एक तिहाई से भी कम मजदूरों से ही काम चलाना पड़ रहा है
-लेबर व अन्य तकनीकी स्टाफ बड़ी संख्या में कोरोना के संक्रमण का शिकार है
-प्रोजेक्ट में काम आने वाली आवश्यक सामग्री की उपलब्धता आसान नहीं हैं
-कोई मशीनरी अगर खराब हो गई तो उसके दुरूस्त करने की फिलहाल व्यवस्था नहीं हैं
-प्रोजेक्ट में लगे कुछ अभियंता भी कोरोना का शिकार हो गए

जयपुर विकास प्राधिकरण के जो प्रोजेक्ट्स इस साल पूरे होने वाले थे उनका काम पूरा हाेने में अभी 4 से 6 महीने और लगेंगे. वहीं ऐसे प्रोजेक्ट्स भी हैं जिनमें जेडीए ने कार्यादेश भी जारी कर लिए लेकिन इनका काम मौके पर अब तक शुरू नहीं हो पाया है. आपको बताते हैं कि कोरोना के कारण किस प्रोजेक्ट पर क्या असर पड़ा है. 

सोढाला एलिवेटेड रोड:
-करीब 250 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे सोढाला एलिवेटेड रोड का काम इसी वर्ष 30 जून तक पूरा होना था
-हांलांकि रेलवे लाइन पर सेगमेंट डालने का काम पूरा हो गया है
-लेकिन कोरोना के कारण अब प्रोजेक्ट पूरा होने में 4 से 6 महीने  का समय और लगने की संभावना है

झोटवाड़ा एलिवेटेड रोड:
-करीब 108 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे झोटवाड़ा एलिवेटेड रोड का काम इसी वर्ष के अंत तक पूरा होना था.
-लेकिन कोरोना के प्रभाव के कारण इसमें भी 4 से 6 महीने की देरी संभव है.

रामनिवास बाग भूमिगत पार्किंग विस्तार:
-करीब 95 करोड़ रुपए की लागत के इस प्रोजेक्ट में खुदाई का काम शुरू ही हुआ था.
-इसके बाद कोरोना के बढ़ते संक्रमण का इस प्रोजेक्ट पर खासा असर पड़ा है.
-इस प्रोजेक्ट की अनुबंधित फर्म के मुख्य डिजाइनर की कोराेना संक्रमण के कारण मौत हो गई.
-फर्म के अभियंता और उनका कोरोना का शिकार हो गया.
-जेडीए के प्रोजेक्ट कनिष्ठ अभियंता भी कोरोना से संक्रमित हो गए.
-इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की डेडलाइन अगस्त 2023 है.
-लेकिन मौजूदा हालातों को देखते हुए इस प्रोजेक्ट में भी करीब 4 महीने की देरी हो सकती है.

सिविल लाइन रेलवे ओवरब्रिज:
-करीब 36 करोड़ रुपए लागत के इस प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए जेडीए ने अनुबंधित फर्म को कार्यादेश जारी कर दिया था.
-लेकिन कोरोना के चलते फर्म अब तक मौके पर काम शुरू ही नहीं कर पाई है.
-प्रोजेक्ट के पूरा होने की डेडलाइन अक्टूबर 2022 के तीन से चार महीने और खिसकने के आसार है.

बस्सी रेलवे ओवरब्रिज:
-रेलवे लाइन पर सेगमेंट डालने की अनुमति नहीं मिलने के चलते पहले यह प्रोजेक्ट 8 से 10 महीने से प्रभावित है.
-48 करोड़ रुपए लागत के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने की डेडलाइन इस जुलाई में थी.
-रेलवे की अनुमति नहीं मिलने व कोरोना के कारण इसके पूरा होने 4 से 6 महीने और लग सकते हैं.

कोरोना की इस दूसरी लहर ने अधिकतर क्षेत्रों पर प्रतिकूल असर डाला है. ऐसे में विकास परियोजना पर प्रभाव पड़ना लाजिमी है. उम्मीद की जानी चाहिए कि ये संकट के दिन जल्द खत्म होंगे और समयबद्ध कार्यक्रम बनाकर इन परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा.

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