happy Holi 2020: डीडवाना की डोलची मार अनूठी होली, राज की गेर नाम से भी है प्रसिद्ध

happy Holi 2020: डीडवाना की डोलची मार अनूठी होली, राज की गेर नाम से भी है प्रसिद्ध

डीडवाना(नागौर): हर जगह की अपनी अपनी परम्पराएं, रीती रिवाज और संस्कृति होती है, देशभर में होली की भी अलग-अलग परम्पराएं है कही की लठ मार होली प्रसिद्ध है, ऐसी ही ख़ास और अनूठी होली की परंपरा है डीडवाना की डोलची मार होली. डोलची मार होली देशभर में डीडवाना और बीकानेर में ही खेली जाती है आइये इस अनूठी होली का आनंद लेते है.डीडवाना शहर में निकलने वाली ऐतिहासिक डोल्ची मार होली (राज कि गैर) आज भी जारी है. आज से कुछ सालो पहले इस होली में काफी अनूठापन था जो अब नजर नहीं आता है. 

पूरे नगर की करते है परिक्रमा:
मगर आज भी हाकम को डोलची मार कर विधिवत रूप से डीडवाना उपखंड कार्यालय से शुरू होकर शहर भर मे खेली जाने वाली इस होली कि अनूठी परंपरा चल रही है और यहा के नागरिक जो पहले कभी हाकम के साथ होली खेलते थे अब आजाद भारत के अधिकारियों के साथ होली खेलते है.धुलंडी के दिन  रंगों से सराबोर होने के बाद सरकार के हाकम (उपखंड अधिकारी ) इस गेर की शुरुवात करते है. प्रथम डोलची हाकम के लगाने के बाद ये गेर कचहरी से शुरू होकर नगर भ्रमण करते हुए सभी डोलची मार गेरीयों को वहां से सभी टोलियां एक साथ निकलती है पूरे नगर की परिक्रमा के लिए जिसे गैर कहा जाता है. 

महाराजाओं के वक्त से है गैर का प्रचलन:
डोलची गैर को खेलने के लिए विदेशों तक में बसे डीडवाना के प्रवासी लोग यहाँ खींचे चले आते है. इस गैर का प्रचलन राजा महाराजाओं के समय से है तत्कालीन हाकम को डोलची मार कर इस गैर की शुरुआत की जाती है. लौहे के डिब्बे को विशष तरीके से काटकर डोलची का आकार दिया जाता है, उसमें पानी और रंग भरकर गैर खेलने वाले एक दूसरे पर मारते हैं जिसकी मार काफी तेज होती है. इस डोलची गैर को खेलने के लिए विदेशों तक में बसे डीडवाना के प्रवासी लोग यहाँ खींचे चले आते हैं.

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डोलची की मार असहनीय होते हुए भी लोग इसका आनंद लेते हैं जिसके पिच्छे लोगों की मान्यता है की डोलची की मार खाने के बाद साल भर तक मार खाने वाले को कमर का दर्द नहीं होता. मगर इसका असली मकसद सिर्फ यह है कि आम आदमी और अधिकारियों के बिच कि दुरिया मिटाना है इससे अधिकारियों भी आम आदमी के दुःख दर्द और खुशियों का अहसास कर सके. कुछ भी कहो मगर यह होली आम आदमी के लिए खास होली है. 

यहां की परम्पराएं और लोक संस्कृति हटकर:
डोलची मार होली की इस अनूठी परंपरा को लेकर होली खेलने वाले लोगों में इस दिन का इन्तजार रहता है और इसको लेकर काफी उत्साह भी रहता है एक और यह परम्परा जंहा अधिकारी और आम आदमी की बराबरी से सम्बन्ध करवाती है तो दूसरी और सामाजिक भेदभाव भी मिटाकर एक दूसरे को जोड़ती है. भारत विविधताओं का देश है यहां की परम्पराएं और लोक संस्कृति हटकर है बीते कुछ वर्षों में इनमे कुछ कमी आ रही है लोगो का उत्साह कुछ कम होता जा रहा है जरूरत इस बात की है कि इन परम्पराओ के संरक्षण का प्रयास हो ताकि भारत की विविधताओं वाली रंग बिरंगी छटा युही बनी रहे.

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नरपत ज़ोया फ़र्स्ट इंडिया न्यूज डीडवाना

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