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नवरात्र में मिली निराशा, पिछले साल की तुलना में 30 से 70 फीसदी तक घटा व्यापार

नवरात्र में मिली निराशा, पिछले साल की तुलना में 30 से 70 फीसदी तक घटा व्यापार

जयपुर: व्यापारिक मंदी का सामना कर रहे छोटे-बड़े कारोबारियों के लिए यह नवरात्र खुशियों के स्थान पर गम ज्यादा दे गया. नवरात्र पर ग्राहकी की उम्मीद में सजाया गया माल शहर के बाजारों की दुकानों और शो-रूम में यथावत पड़ा रहा और ग्राहक डिस्काउंट के फेर में ऑनलाइन खरीदकर बैठ गए. क्या रहा इस नवरात्र पर बाजार का हाल, एक्सक्लूसिव खबर:

ऑन लाइन साइटों से पारम्परिक कारोबार को जोरदार झटका:
अच्छे मानसून के कारण इस नवरात्र पर व्यापार में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन ऑन लाइन साइटों ने पारम्परिक कारोबार को जोरदार झटका दिया. बाजार में कुछ ऐसे भी कारोबार है, जहां ऑन लाइन खरीद का अधिक असर भी नहीं है, लेकिन वहां भी कमजोर ग्राहकी दिखाई दी. सामान्यत: नवरात्र की शुरुआत से दीपावली के बीच होने वाले कारोबार को व्यापार के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है. इसका कारण है कि पूरे साल में होने वाले कुल टर्न ओवर का 40% हिस्सा इस एक माह में ही हो जाता है, लेकिन नवरात्र में हुए कारोबार ने कारोबारियों को काफी निराश किया. 

ऑनलाइन साइटों से चल रही गला काट प्रतिस्पर्धा:
नवरात्र पर खरीद की उम्मीद में इलेक्ट्रोनिक और मोबाइल फोन निर्माता कम्पनियों ने अनेक नई खुबियों के उत्पाद भी बाजार में उतारे, नए फीचर भी जोड़े, कीमताें में कमी की. खरीददारों के लिए वित्तीय सुविधाएं तक उपलब्ध कराई, लेकिन इसके बावजूद बाजार में खरीद करने के लिए ग्राहक आए ही नहीं. मोबाइल कारोबारियों का कहना है कि पारम्परिक बाजार और ऑन लाइन मार्केट  में अब और कड़ी प्रतिस्पर्धा हो रही है. इसके बावजूद पारम्परिक बाजार में सभी तरह की सेवाएं व सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद खरीद का अभाव है. जयपुर के बाजारों की बात करें तो यह माना जा रहा है कि जयपुर में मोबाइल फोन की बिक्री में करीब 30 फीसदी और इलेक्ट्रोनिक उपकरण आदि की बिक्री में 70 फीसदी तक की गिरावट इस बार नवरात्र पर नजर आई. ऑनलाइन साइटों से चल रही गला काट प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भी बाजार दीपावली पर अच्छे कारोबार की उम्मीद तो कर रहा है, लेकिन बिना कैमरे के सामने आए व्यापारी खुद स्वीकारते हैं कि यह उम्मीद पूरी होगी, इसमें पूरा संदेह हैं. 

लग्जरी आइटमों का बाजार खराब:
नवरात्र पर जरूरत की वस्तुओं से अधिक बाजार लग्जरी आइटमों का खराब रहा. ज्वैलरी कारोबार की बात करें तो इस साल सोने व चांदी के भावों में आई तेजी के कारण जयपुर के अधिकतर ज्वैलर्स के शो-रूमों पर नवरात्र के पूरे नौ दिनों में अधिकतर समय सन्नाटा ही पसरा रहा. ज्वैलर्स के शो-रूम पर सेल्स से जुड़े कर्मचारियों का तो यहां तक दावा रहा है कि 9 दिन में से दो-तीन दिन तो ऐसे भी निकले, जिनमें अहसास ही नहीं हुआ कि अभी नवरात्र भी चल रहे हैं. इसी तरह बाजार में ब्राण्डेड रेडीमेड गारमेंट शो-रूम संचालकों का तो यहां तक कहना है कि अधिक मूल्य के रेडीमेड ब्राण्डेड कपड़ों की बिक्री तो आकर्षक स्कीमों के बावजूद गति नहीं पकड़ सकी. कपड़ा कारोबारियों का कहना है कि बाजार में व्यापारी नए स्टॉक व उम्मीदों के साथ तैयार बैठा है. बाजार में पैसा तो हैं, लेकिन ग्राहकों की खरीददारी की भावना नहीं है. उम्मीद तो यही है कि इस साल भी व्यापार में सुधार होगा. 

सुविधाएं होने के बावजूद बाजार से ग्राहक गायब:
जयपुर के प्रमुख काराेबारी मानते हैं कि नवरात्र में बाजार में आई गिरावट का कारण मंदी से ज्यादा ऑनलाइन कारोबार करने वाली साइटों की करतूत हैं. इनका कहना है कि बाजार में ग्राहकों को सभी तरह की सुविधाएं होने के बावजूद बाजार से ग्राहक गायब है. कारोबारी अब मोदी सरकार से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि ऑनलाइन साइटों की ओर से दिए जाने वाले भारी भरकम डिस्काउंट की पोल खुलेगी और ऑनलाइन के नाम पर ग्राहकों से होने से वाली चीटिंग से ग्राहक खुद भी सबक लेंगे और पारम्परिक रूप से होने वाले कारोबार के दिन वापस फिर जाएंगे. 

... संवाददाता विमल कोठारी की रिपोर्ट 

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VIDEO: पेट्रोल और डीजल के नाम पर लूट! 300 प्रतिशत टैक्स वसूल रही सरकार, आमजन अभी तक खेल से अनजान

जयपुर: क्या आपको पता है जिस पेट्रोल के लिए आप प्रति लीटर 87 रुपए 55 पैसे चुका रहे हो उसकी वास्तविक कीमत महज 26 रुपए एक पैसे और डीजल की 28 रुपए 11 पैसे है. जी हां केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पेट्रोल, डीज़ल पर 300 फीसदी तक ज्यादा टैक्स वसूल रही हैं. पेट्रोल, डीज़ल की आसमान छूती कीमतों से त्रस्त प्रदेश की जनता को आज हम बताने जा रहे हैं पेट्रोल, डीज़ल पर टैक्स को अनसुलझा खेल, जिससे आमजन अभी तक अनजान थे. फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की खास रिपोर्ट:

पेट्रोल
पेट्रोल बेस प्राइज़                26.01 रुपए
सेंट्रल एक्साइज़                  32.98 रुपए
स्टेट वैट                            22.41 रुपए
रोड सैस                              1.50 रुपए
 लाइसेंस फीस प्रति लीटर           19 पैसे
डीलर कमीशन पर वैट          1.27 रुपए
डीलर कमीशन                    3.19 रुपए
कुल                              87.55 रुपए

डीज़ल
डीज़ल बेस प्राइज़                  28.11 रुपए
सेंट्रल एक्साइज़                     31.83 रुपए
स्टेट वैट                              16.78 रुपए
रोड सैस                                1.75 रुपए
लाइसेंस फीस प्रति लीटर             16 पैसे
डीलर कमीशन पर वैट                62 पैसे
डीलर कमीशन                       2.05 रुपए
कुल                                    81.30 रुपए

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट:
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बाद भी देश और प्रदेश में पेट्रोल, डीज़ल के भाव कम होने का नाम ही नहीं ले रहे. पेट्रोल, डीज़ल की कीमतों में वृद्धि से रोटी, कपड़ा और मकान सबकुछ महंगा हो चुका है. अब सवाल उठता है कि क्या पेट्रोल, डीज़ल की वास्तविक कीमत वही हैं. जो हम जेब से चुका रहे हैं या फिर इनमें भी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कमाई का जरिया तय कर चुकी हैं. जी हां पेट्रोल, डीज़ल की वास्तविक कीमत हमारे द्वारा चुकाई जा रही कीमतों से तीन सौ प्रतिशत तक कम हैं. फिर क्या कारण है कि हमारी जेब से वास्तविक कीमतों से तीन गुना तक ज्यादा वसूला जा रहा है.

खान महाघूसकाण्ड: पूर्व IAS अशोक सिंघवी को बड़ा झटका, राजस्थान हाईकोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

पेट्रोल की मूल कीमत:
इस सवाल का जवाब केंद्र और राज्य सरकारों के उन टैक्स में छुपा है जिसकी आम जनता को जानकारी नहीं. दरअसल अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की भारतीय पॉकेट की कीमत 38 डॉलर प्रति बैरल तक है. इस कीमत से देश में पेट्रोल की मूल कीमत 26 रुपए एक पैसे है. इस पर केंद्र सरकार हमसे केंद्रीय उत्पाद शुल्क के तौर पर प्रति लीटर 32 रुपए 98 पैसे वसूल रही है और राज्य सरकार 22 रुपए 41 पैसे. इसके अलावा रोड सैस, लाइसेंस फीस, डीलर कमीशन पर वैट और डीलर का कमीशन भी इसमें जोड़ दिया जाए तो पेट्रोल पर हम मूल कीमत के बाद 61 रुपए 54 पैसे प्रति लीटर ज्यादा दे रहे हैं.

राज्य सरकार ने बढ़ाया दो बार वैट: 
इसी तरह डीज़ल की बेस प्राइस 28 रुपए 11 पैसे प्रति लीटर है जिस पर हमसे केंद्र और राज्य सरकार मिलकर 53 रुपए 19 पैस तक टैक्स वसूल रहे हैं. कोरोना संकट के दौर में राज्य सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर दो बार वैट बढ़ाया है. प्रदेश में अब पेट्रोल पर 38 फीसदी और डीज़ल पर 30 फीसदी वैट है. अब बात रकें पड़ौसी राज्यों में पेट्रोल डीज़ल की तो हालत और खराब दिखाई देती है. हरियाणा, पंजाब, गुजरात और यूपी के मुकाबले राजस्थान में पेअ्रोल, डीज़ल पर टैक्स 10 रुपए तक ज्यादा है. इससे हमारे ट्रांसपोर्टर ही नहीं दूसरे राज्यों के ट्रांसपोर्टर भी डीज़ल राजस्थान की अपेक्षा पड़ौसी राज्यों से ले रहे हैं. इससे प्रदेश में पेट्रोलियम की बिक्री 50 फीसदी से ज्यादा गिरी है. उम्मीद की जानी चाहिए कि राज्य सरकार भी पड़ौसी राज्यों की तुलना में जल्द ही पेट्रोल, डीज़ल के दामों में प्रदेश की जनता को राहत देगी ताकि कोरोना संकट के दौर में आमजन को राहत मिल सके. 

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VIDEO: पर्यटन पर 'कोरोना का ग्रहण', राजधानी में सामान्य दिनों में 1 दिन में आने वाले पर्यटक पूरे प्रदेश में 1 महीने में दिखाई दिए

जयपुर: कोरोना के हमले ने देश और प्रदेश में पर्यटन ढांचे को झकझोर कर रख दिया है. जितने पर्यटक राजधानी जयपुर में सामान्य दिनों में 1 दिन में आया करते थे उतने पर्यटक पूरे प्रदेश में 1 महीने में दिखाई दिए हैं. राज्य सरकार ने रिवाइवल प्लान भी बनाया है और कोविड-19 रिलीफ पैकेज भी जारी करने की तैयारी कर ली है लेकिन सैलानियों में आज भी कोरोना कब है कम नहीं हुआ है. 

VIDEO: ब्यूरोक्रेसी में 3 दिन बाद सस्पेंस खत्म, पूर्व सीएस डीबी गुप्ता अब सीएम के सलाहकार 

जयपुर के स्मारक देश और दुनिया में प्रसिद्धि हासिल कर चुके:  
राजस्थान को पर्यटन का प्रदेश माना जाता है राजधानी जयपुर के स्मारक देश और दुनिया में इतनी प्रसिद्धि हासिल कर चुके है की गूगल पर भी एक क्लिक करो तो एक-एक स्मारक के लाखों पेज खुल जाते हैं. प्रदेश में पर्यटन ढांचा इतना मजबूत हुआ करता था जिस पर स्वाइन फ्लू, जीका, एंथ्रेक्स, सार्स और न जाने कितने वायरस आक्रमण कर चुके हैं लेकिन राजस्थान के पर्यटन ढांचे को टस से मस भी नहीं कर पाए. लेकिन इस बार देश और प्रदेश के पर्यटन पर जिस कोरोना नाम के वायरस ने हमला किया है उसके आगे  प्रदेश का पर्यटन ढांचा दरकता दिखाई दे रहा है.

अनलॉक वन में 1 जून को प्रदेश के पर्यटन स्थलों को शुरू:
कोरोना संकट के चलते प्रदेश में 18 मार्च को सभी पर्यटन स्थल जिनमें मॉन्यूमेंट, म्यूजियम, नेशनल पार्क, बायोलॉजिकल पार्क, सफारी सभी को बंद कर दिया गया था. यही नहीं टूरिज्म इंडस्ट्री से जुड़े तमाम स्टेक होल्डर जिनमें होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट्स, हाथी गांव जैसे तमाम पर्यटन से जुड़े स्थलों को भी बंद कर दिया गया था. इससे पर्यटन उद्योग को अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. आखिर अनलॉक वन में 1 जून को प्रदेश के पर्यटन स्थलों को शुरू कर दिया गया. इसके बाद 8 जून से तमाम होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन से जुड़े अन्य स्थल भी सैलानियों के लिए खोल दिए गए. लेकिन 1 जून से 30 जून तक के पहले 1 महीने में पर्यटन स्थलों पर माहौल निराशाजनक ही रहा. राजधानी में के कुल 8 स्मारक और संग्रहालयों पर 1 महीने में महज 5269 पर्यटक पहुंचे. जबकि राजधानी के बाहर के प्रदेश के मॉन्यूमेंट और म्यूजियम जिनकी संख्या 24 है उन पर महज 3537 पर्यटक ही 1 महीने में पहुंचे. इसका सीधा मतलब है प्रदेश में जून के महीने में पर्यटकों की संख्या महज 8806 रही जो राजस्थान जैसे पर्यटन के प्रदेश के लिए कतई उत्साहजनक नहीं है. एक महीने में 8806 पर्यटकों का आंकड़ा इसलिए भी निराशाजनक है क्योंकि आमतौर पर ऑफ सीजन में इतने पर्यटक महज एक दिन में राजधानी में दिखाई देते रहे हैं. लेकिन कोरोना के हमले के आगे पर्यटन पूरी तरह पस्त हो गया है. 

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सर्वाधिक पर्यटक विश्व विरासत में शुमार आमेर में पहुंचे:
राजधानी में 1 महीने में सर्वाधिक पर्यटक विश्व विरासत में शुमार आमेर में पहुंचे. आमेर में पर्यटकों की संख्या 1 महीने में 1585 रहीं जबकि नाहरगढ़ यह आंकड़ा 1326 के स्तर पर रहा. राजधानी के बाहर सर्वाधिक पर्यटक 901 अलवर में पहुंचे जबकि चित्तौड़ 500 और अजमेर में पर्यटकों की संख्या 369 रही. प्रदेश में पर्यटन उद्योग से प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से 10 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं जिनमें छोटे-छोटे वेंडर, हॉकर से लेकर गाइड, महावत, लोक कलाकार और बड़े स्तर पर होटल, रिसोर्ट संचालक तक शामिल हैं. कोरोना संक्रमण का इन सभी पर बुरा असर हुआ है अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश के बाद प्रदेश के पर्यटन और देवस्थान मंत्री विश्वेंद्र सिंह और विभाग के प्रमुख सचिव आलोक गुप्ता सहित तमाम अधिकारी इस प्रयास में जुटे हुए हैं कि प्रदेश में सुरक्षित और स्वास्थ्य पर माहौल तैयार कर पर्यटन को वापस मुख्यधारा में लाया जाए. सभी का प्रयास है कि सितंबर में शुरू होने वाले पर्यटन सत्र से पहले प्रदेश में इस तरह का माहौल तैयार किया जाए जिससे घरेलू पर्यटक ज्यादा से ज्यादा संख्या में राजस्थान आएं. 
 

बढ़ने के बजाय घट रहीं फ्लाइट्स! जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स के संचालन में कमी

बढ़ने के बजाय घट रहीं फ्लाइट्स! जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स के संचालन में कमी

जयपुर: जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स के संचालन में लगातार कमी दिख रही है. फ्लाइट्स का संचालन प्रारंभ हुए 40 दिन पूरे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं दिख रही है. यात्री नहीं बढ़ने के कारण एयरलाइंस भी फ्लाइट नहीं बढ़ा रही हैं. बड़ी संख्या में फ्लाइट्स को रद्द किया जा रहा है. दरअसल जयपुर एयरपोर्ट पर 25 मई से फ्लाइट शुरू हुई थी. चार एयरलाइंस ने जयपुर एयरपोर्ट से 20 फ्लाइट संचालित करने का शेड्यूल दिया था.

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उम्मीद थी कि जल्द ही बढ़ेंगी फ्लाइट्स:
पहले दिन मात्र 8 फ्लाइट के साथ शुरुआत हुई थी. शुरुआती सप्ताह में फ्लाइट्स की संख्या 15 तक जा पहुंची थी. इससे उम्मीद थी कि जल्द ही फ्लाइट्स बढ़ेंगी और हवाई यात्रा अपनी पुरानी गति में लौट आएगी. लेकिन 40 दिन बीतने पर भी पहले सप्ताह जैसी ही स्थिति दिख रही है. इसके विपरीत पिछले 7 दिन में यात्रियों की संख्या में कमी देखी जा रही है. आपको बता दें कि जयपुर एयरपोर्ट से इंडिगो और स्पाइसजेट ने 9-9 फ्लाइट शुरू करने का शेड्यूल दिया है. जबकि एयर एशिया और एयर इंडिया ने 3-3 फ्लाइट संचालित करने का शेड्यूल दिया हुआ है.

स्पाइसजेट एयरलाइन सबसे ज्यादा रद्द:
इन दिनों स्पाइसजेट एयरलाइन सबसे ज्यादा फ्लाइट रद्द कर रही है. स्पाइसजेट की 9 में से रोज मात्र 3 से 4 फ्लाइट ही चल रही हैं. यानी स्पाइसजेट औसतन 5 से 6 फ्लाइट रद्द कर रही है. एयर इंडिया रोजाना 1 या 2 फ्लाइट, एयर एशिया 1 फ्लाइट और इंडिगो भी 1 से 2 फ्लाइट रद्द कर रही है. इसके कारण इन फ्लाइट्स में टिकट बुकिंग करने वाले यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है. आपको बता दें कि 22 जून को सर्वाधिक 17 फ्लाइट संचालित हुई थी. इससे पहले 19 जून को 16 फ्लाइट का संचालन हुआ था. जबकि लॉकडाउन से पहले जयपुर एयरपोर्ट से रोज औसतन 63 फ्लाइट संचालित हो रही थीं.

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पिछले 7 दिन का यह रहा फ्लाइट संचालन का ट्रेंड
-28 जून को 15 फ्लाइट संचालित, 7 फ्लाइट रद्द
-29 जून को 15 फ्लाइट संचालित, 9 फ्लाइट रद्द
-30 जून को 15 फ्लाइट संचालित, 9 फ्लाइट रद्द
-1 जुलाई को 14 फ्लाइट संचालित, 8 फ्लाइट रद्द
-2 जुलाई को 12 फ्लाइट संचालित, 12 फ्लाइट रद्द
-3 जुलाई को 10 फ्लाइट संचालित, 12 हुई रद्द
-4 जुलाई को आज 14 फ्लाइट संचालित, 10 हैं आज रद्द

...फर्स्ट इंडिया के लिए काशीराम चौधरी की रिपोर्ट

VIDEO: हाउसिंग बोर्ड ने धमाकेदार परफॉर्मेंस से अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ा, 12 दिन में ही 1213 आवासों की नीलामी

जयपुर: कोरोना काल जैसे बड़े संकट में भी हाउसिंग बोर्ड ने अपनी धमाकेदार परफॉर्मेंस से अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है. बोर्ड ने किश्तों में आवास योजना से नया कीर्तिमान बनाते हुए महज 12 दिन में ही 1213 आवासों की नीलामी की है. 

सहकारी बैंकों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के परिवीक्षा वेतन में की वृद्धि

आवासों के ई ऑक्शन का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया: 
रियल एस्टेट मार्केट के किंग हाउसिंग बोर्ड ने अपनी धमाकेदार परफॉर्मेंस से कम अवधि में आवासों के ई ऑक्शन का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है. बोर्ड ने सितंबर महीने में चलाई ई ऑक्शन योजना से महज 35 दिनों में 1010 मकानों की नीलामी कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया था. वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने बोर्ड के इस रिकॉर्ड को मान्यता दी थी. 

यह योजना बोर्ड के इतिहास की सबसे सफल:
अब बोर्ड ने अपने ही उस विश्व रिकॉर्ड को तोड़ दिया है और यह कमाल हुआ है बोर्ड कमिश्नर पवन अरोड़ा की सटीक प्लानिंग के बाद लांच हुई किश्तों में आवास योजना से. लांच होने से पहले ही प्रदेश भर में चर्चित हो चुकी यह योजना बोर्ड के इतिहास की सबसे सफल और लोकप्रिय योजना मानी जा रही है. मकान की कीमत का 10 फीसदी दीजिए और गृह प्रवेश कीजिए के ध्येय वाक्य से लांच हुई इस योजना से बोर्ड ने सिर्फ 12 दिन में ही 1213 आवासों की नीलामी कर अपना ही बनाया हुआ विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है. 1213 आवासों की नीलामी से हाउसिंग बोर्ड ने 12 दिन में ही 178 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है. 

बोर्ड का यह प्रदर्शन किसी जादू से कम नहीं:
कोरोना काल मे जब हर तरह के बाजार की हालत खराब है तब बोर्ड का यह प्रदर्शन किसी जादू से कम नहीं है. इस योजना के अभी तक के 4 बुधवारों में बोर्ड को बहुत भारी रेस्पॉन्स मिला है. कमिश्नर पवन अरोड़ा की तरफ से ग्राहकों को सहूलियत देने के लिए प्रयासों से भी इस योजना में लोगों का रुझान बढ़ा है. कमिश्नर पवन अरोड़ा ने इस बड़ी कामयाबी का श्रेय टीम वर्क को देते हुए कहा है कि ग्राहक बोर्ड के लिए भगवान की तरह है. आने वाले दिनों में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और UDH मंत्री शांति धारीवाल के हर किसी को आवास उपलब्ध कराने के मिशन को सफल बनाने के लिए बोर्ड ऐसे ही काम करता रहेगा. 

योजना के माध्यम से आवास लेने की लोगों में होड़: 
किश्तों में आवास योजना की बात करें तो ऐसा लगता है कि प्रदेशभर में इस योजना के माध्यम से आवास लेने की लोगों में होड़ लग गई है. आकर्षक लोकेशनों पर सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ 50 फीसदी तक की छूट पर 13 वर्ष की आसान मासिक किश्तों में आवास मिलना किसी के लिए भी एक सपने से कम नहीं है. 

किश्तों में आवास योजना से अब तक ऐसे हुई नीलामियां: 
- पहले बुधवार को 381 सम्पत्तियां बिकीं, जिससे 58 करोड 22 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ. 
- दूसरे बुधवार को 320 सम्पत्तियां बिकीं, जिससे 45 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ.
- तीसरे बुधवार को 257 सम्पत्तियां बिकी, जिससे मंडल को 34 करोड़ रूपये का राजस्व मिला.
- इस बुधवार को 255 सम्पत्तियां बिकीं और मंडल ने 41 करोड़ रूपये का राजस्व प्राप्त किया. 

बंगला खाली करने के नोटिस के बाद लखनऊ शिफ्ट होंगी प्रियंका गांधी, हो चुकी व्यवस्था !  

हाउसिंग बोर्ड की किश्तों में आवास योजना में सिर्फ जयपुर या अन्य बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि छोटे कस्बों में भी अच्छी संख्या में मकानों की नीलामी हो रही है. कोरोना काल मे भी आवासों की नीलामी से अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़कर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर बोर्ड ने रियल एस्टेट जगत में अपनी बादशाहत लंबे समय तक कायम रखने के संकेत दे दिए हैं.

...फर्स्ट इंडिया के लिए शिवेंद्र परमार की रिपोर्ट

Boycott China: चीन को एक और झटका, देश के हाइवे प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियां होंगी बैन

Boycott China: चीन को एक और झटका, देश के हाइवे प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियां होंगी बैन

नई दिल्ली: भारत-चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद के चलते भारत लगातार आर्थिक मोर्चे पर चीन को झटके दे रहा है. चीन की 59 एप्स पर प्रतिबंध लगाने के बाद आज केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बड़ी जानकारी देते हुए बताया कि भारत सभी हाइवे प्रोजेक्ट्स में चीनी कंपनियों को बैन करने की तैयारी कर रहा है. चीनी कंपनियों को संयुक्त उद्यम पार्टनर (JV) के रूप में भी काम नहीं करने दिया जाएगा.

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जॉइंट वेंचर के रास्ते भी रोक दिया जाएगा: 
गडकरी ने कहा कि इतना ही नहीं अगर कोई चाइनीज कंपनी जॉइंट वेंचर के रास्ते भी राजमार्ग परियोजनाओं में एंट्री की कोशिश करेगी तो उसे भी रोक दिया जाएगा. इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित करेगी कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के विभिन्न क्षेत्रों में चीनी निवेशकों से कोई रिश्ता न रखा जाए.

नियमों में ढील देने की नीति बनाई जाएगी:
उन्होंने कहा कि जल्द ही चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने और भारतीय कंपनियों को राजमार्ग परियोजनाओं में भागीदारी के लिए उनकी पात्रता मानदंड का विस्तार करने के लिए नियमों में ढील देने की नीति बनाई जाएगी. गडकरी ने कहा कि वर्तमान में कुछ परियोजनाएँ जो बहुत पहले शुरू की गई थीं उनमें कुछ चीनी साझेदार शामिल थे उन पर यह लागू नहीं होगा, नया निर्णय वर्तमान और भविष्य की निविदाओं में लागू किया जाएगा. 

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चीन से हिंसक झड़प में देश के 20 वीर जवान शहीद हो गए थे:
गौरतलब है कि भारत-चीन नियंत्रण रेखा पर हुई हिंसक झड़प में हमारे देश के 20 वीर जवान शहीद हो गए थे, जिसके बाद से ही देश में चीन विरोधी माहौल चरम पर है. चीनी कंपनियों और चीनी माल के बहिष्कार तक की बात होने लगी है.


 

1 दिन की शांति के बाद फिर बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत, जानिए क्या हो गए हैं भाव

1 दिन की शांति के बाद फिर बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत, जानिए क्या हो गए हैं भाव

जयपुर: 1 दिन की शांति के बाद पेट्रोल-डीजल ने आज फिर से गर्मी दिखाना शुरू कर दिया. आज पेट्रोल 6 पैसे और डीजल 13 पैसे की बढ़त के साथ शुरू हुआ. भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि जारी है इससे आमजन मुश्किल में पड़ गया है. संकट के इस दौर में पेट्रोल-डीजल आम आदमी की पकड़ से बाहर होता जा रहा है. एक तरफ तो पिछले 23 दिन में कीमतों में वृद्धि का दौर जारी है दूसरी तरफ राज्य सरकार भी लॉकडाउन अवधि में 2 बार पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा चुकी है. 

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23 दिन से कीमतों में वृद्धि का दौर:  
कोरोना संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी देश और प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि का दौर जारी है. पिछले 23 दिनों में जिस तरह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो रही है उससे ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार का तेल कंपनियों पर नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो चुका है. तेल कंपनियां ढाई महीने शांत बैठने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बाद भी अपना मार्जिन बढ़ाने के लिए पिछले 23 दिन से कीमतों में वृद्धि का दौर शुरू कर चुकी हैं. 

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23 दिन में पेट्रोल 9.77 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ: 
7 जून को पेट्रोल-डीजल में वृद्धि का दौर शुरू हुआ जो आज 29 जून तक जारी है. इस अवधि में पिछले 23 दिन में पेट्रोल जहां 9.77 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है वहीं डीजल की कीमतों में भी 10.94 रुपए की वृद्धि हुई है. पेट्रोल के दाम 87.59 रुपए के स्तर पर पहुंच गए हैं. वहीं डीजल के दाम में भी 81.34 रुपए का मुकाम हासिल किया है. इसका सीधा मतलब है कि भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में जहां लोगों के रोजगार छिन रहे हैं, वेतन भत्तों में कमी आई है उस दौर में पेट्रोल-डीजल की दरें बढ़ाकर आम आदमी की मानों कमर तोड़ दी गई है. 

1 दिन की शांति के बाद फिर बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत, जानिए क्या हो गए हैं भाव

1 दिन की शांति के बाद फिर बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत, जानिए क्या हो गए हैं भाव

जयपुर: 1 दिन की शांति के बाद पेट्रोल-डीजल ने आज फिर से गर्मी दिखाना शुरू कर दिया. आज पेट्रोल 6 पैसे और डीजल 13 पैसे की बढ़त के साथ शुरू हुआ. भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि जारी है इससे आमजन मुश्किल में पड़ गया है. संकट के इस दौर में पेट्रोल-डीजल आम आदमी की पकड़ से बाहर होता जा रहा है. एक तरफ तो पिछले 23 दिन में कीमतों में वृद्धि का दौर जारी है दूसरी तरफ राज्य सरकार भी लॉकडाउन अवधि में 2 बार पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा चुकी है. 

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23 दिन से कीमतों में वृद्धि का दौर:  
कोरोना संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी देश और प्रदेश में पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि का दौर जारी है. पिछले 23 दिनों में जिस तरह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि हो रही है उससे ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार का तेल कंपनियों पर नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो चुका है. तेल कंपनियां ढाई महीने शांत बैठने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बाद भी अपना मार्जिन बढ़ाने के लिए पिछले 23 दिन से कीमतों में वृद्धि का दौर शुरू कर चुकी हैं. 

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23 दिन में पेट्रोल 9.77 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ: 
7 जून को पेट्रोल-डीजल में वृद्धि का दौर शुरू हुआ जो आज 29 जून तक जारी है. इस अवधि में पिछले 23 दिन में पेट्रोल जहां 9.77 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है वहीं डीजल की कीमतों में भी 10.94 रुपए की वृद्धि हुई है. पेट्रोल के दाम 87.59 रुपए के स्तर पर पहुंच गए हैं. वहीं डीजल के दाम में भी 81.34 रुपए का मुकाम हासिल किया है. इसका सीधा मतलब है कि भीषण गर्मी और कोरोना संकट के दौर में जहां लोगों के रोजगार छिन रहे हैं, वेतन भत्तों में कमी आई है उस दौर में पेट्रोल-डीजल की दरें बढ़ाकर आम आदमी की मानों कमर तोड़ दी गई है. 

जैसलमेर में पर्यटन व्यवसाय की दुकाने पड़ी सुनी, लाखों का हो रहा नुकसान

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जैसलमेर: पर्यटननगरी के नाम से मशहूर जैसलमेर के पर्यटन व्यवसाय को विश्वव्यापी महामारी कोरोना के चलते सर्वाधिक नुकसान पहुंचने की आशंका गहराने लगी है. पर्यटन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि जब तक कोरोना के उपचार की वैक्सीन सर्वसुलभ नहीं हो जाती तब तक जैसलमेर में पर्यटन को राहत मिलना संभव दिखाई नहीं देता.

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10 हजार से ज्यादा लोगों के सामने आजीविका का संकट: 
जैसलमेर के होटल व्यवसायी और सम के रिसोर्ट्स संचालकों से लेकर पर्यटन से सीधे जुड़े 10 हजार से ज्यादा लोगों के सामने आजीविका का अपूर्व संकट इस महामारी ने खड़ा कर दिया है. उन्ही में से हेंडीक्राफ्ट दूकान व्यवसाइयो को भारी परेशानी खड़ी हो गई है. 

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लाखों रुपये का सामान दुकानों में धूल फांक रहा:
लाखों रुपये का सामान दुकानों में धूल फांक रहा वही हेंडीक्राफ्ट दूकान व्यवसाइयो के कर्ज के तले दब रहे है दूकान का किराया, बिजली और घर चलाना मुश्किल हो रहा है. करोड़ों रुपए के विदेशों के ऑर्डर पहले ही निरस्त हो चुके थे, साथ ही देश में कोरोना के प्रवेश के साथ ही स्थानीय व्यापारियों ने हाथ खड़े कर दिए. 

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