मेडिकल सेक्टर की गतिविधियों के विकास के लिए दी जाएगी छूट, राजस्थान सरकार ने जारी किए आदेश

मेडिकल सेक्टर की गतिविधियों के विकास के लिए दी जाएगी छूट, राजस्थान सरकार ने जारी किए आदेश

जयपुर: फर्स्ट इंडिया न्यूज की खबर पर एक बार फिर मुहर लगी है प्रदेश में मेडिकल आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए अशोक गहलोत सरकार ने कई प्रकार की छूट दी है आज इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिए गए हैं. 

फर्स्ट इंडिया न्यूज़ में 29 जनवरी को एक्सक्लूसिव खबर प्रसारित की थी. इस खबर में खुलासा किया गया था कि प्रदेश की अशोक गहलोत सरकार की ओर से जल्द ही विशेष प्रोत्साहन योजना लागू की जाएगी. इस योजना के तहत मेडिकल सेक्टर की गतिविधियों को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की छूट का ऐलान किया जाएगा. इस संबंध में नगरीय विकास विभाग ने प्रस्ताव मंत्री शांति धारीवाल को भेजा था. फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की खबर एक बार फिर सही साबित हुई. मंत्री शांति धारीवाल की स्वीकृति के बाद सोमवार को विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं. आपको बताते हैं इस योजना के तहत किस प्रकार नियमों में शिथिलता और विभिन्न छूट दिया जाना प्रस्तावित है. 

- मेडिकल सेक्टर के तहत आने वाली गतिविधियों को व्यापक जनहित मानते हुए उन्हें शहरों के मास्टर प्लान में दर्शाए विभिन्न भू उपयोगों में अनुज्ञेय किया जा सकेगा.

- लेकिन इकोलॉजिकल, इको सेंसेटव पार्क,खुले मैदान आदि भू उपयोग में यह छूट नहीं दी जाएगी.  

- मौजूदा आवासीय योजना में यह गतिविधियां उसी भूमि पर करने की इजाजत दी जाएगी जिस भूमि का भू उपयोग मास्टर प्लान में वाणिज्यक, मिश्रित या संस्थानिक है.  

- ऐसी गतिविधियों के लिए भू उपयोग परिवर्तन शुल्क, भू रूपांतरण शुल्क और भवन मानचित्र अनुमोदन शुल्क में छूट दिया जाना प्रस्तावित है.  
- इन मामलों में लीज राशि में छूट और भू रूपांतरण की प्रीमियम राशि में छूट के लिए अधिसूचना जारी की जाएगी. 

यह विशेष प्रोत्साहन योजना मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल, मेडिकल कॉलेज, क्लीनिक, डिस्पेंसरी, मेडिकल यूनिवर्सिटी आदि की स्थापना या विस्तार के लिए लागू की जाएगी. इस योजना के दायरे में एलोपैथी के साथ ही आयुर्वेद, प्राकृतिक, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के संस्थान भी शामिल होंगे. 

आपको बताते हैं कि यह तमाम प्रकार की छूटें किन शर्तों पर मिलेगी...

- विशेष प्रोत्साहन योजना का लाभ लेने के लिए यह जरूरी होगा कि चिकित्सा संस्थानों की स्थापना या उनके विस्तार के प्रस्ताव संबंधित निकाय में 31 मार्च 2022 तक प्रस्तुत कर दिए गए हो.  

- प्रोजेक्ट दिसंबर 2025 तक पूरा करना जरूरी होगा, ऐसा नहीं किया तो दी गई छूट की राशि की ब्याज सहित वसूली होगी.  

- अस्पतालों को राज्य सरकार के मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना का लाभ लोगों को देना होगा.  

- क्षेत्र विशेष की आवश्यकता के अनुरूप सुविधाओं का आकलन करते हुए प्राप्त प्रस्तावों का तकनीकी परीक्षण संबंधित नगर नियोजक के माध्यम से किया जाएगा. 

- इस योजना को लागू करने से पहले ऐसे ही किसी मामले में कोई राशि निकायों में जमा करा दी गई है तो उसे वापस नहीं किया जाएगा. 

प्रदेश में मेडिकल सेक्टर में निजी निवेश को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव को जिस गति से मंजूर करते हुए अशोक गहलोत सरकार ने इसे लागू करने के आदेश जारी किए हैं. उससे यह पता चलता है कि मामले में सरकार कितनी गंभीर है? साथ ही यह भी पता चलता है कि प्रदेश को मेडिकल का हब बनाने का सरकार का संकल्प कितना दृढ़ है?

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