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भारत में भी जीन थेरेपी को लेकर हुई चर्चा, नवीन तकनीक बचा रही लोगों की जान

भारत में भी जीन थेरेपी को लेकर हुई चर्चा, नवीन तकनीक बचा रही लोगों की जान

जैसलमेर: किसी जमाने में भगवान की इच्छा मान कर किसी भी इंसान की मौत का शोक मनाया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं है. जी हां चिकित्सा के क्षेत्र में दुनियाभर में नई नई तकनीकों का इजाद होना मानव जीवन के लिये उम्र बढ़ाने वाला साबित हो रहा है और दुनियाभर के कई वैज्ञानिक चिकित्सा की नई नई तकनीकों का इजाद कर मनुष्य की उम्र को बढ़ा रहे हैं. वैज्ञानिकों के इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि किसी जमाने में असाध्य मानी जाने वाली टीबी, कैंसर, हार्ट, लीवर की बीमारियों का आज दुनियाभर में सफल इलाज हो रहा है और इन बीमारियों से अकाल ही काल का ग्रास होने वाले लोगों की संख्या में भी काफी कमी आई है. एक तरह से यह भी कहा जा सकता है कि आज के वैज्ञानिक चिकित्सा के क्षेत्र में कई मामलों में भगवान से मुकाबला ही कर रहे है.  

जीन थेरेपी चिकित्सा की नवीनतम तकनीक: 
चिकित्सा की इन्हीं पद्धतियों में से एक पद्धति है जीन थेरेपी जिसे आजकल नवीनतम तकनीक के रूप में प्रयोग में लाया जा रहा है. हालांकि भारत में अभीतक इस थेरेपी पर काम होना आरम्भ नहीं हुआ है लेकिन दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिक इस नवीन तकनीक से असाध्य रोगों से लोगों की जान बचा रहे हैं. इसी जीन थेरेपी को लेकर सरहदी जिले जैसलमेर में चल रहे डॉक्टर्स के एक सेमिनार में चर्चा हुई जहां पर देश ही नहीं वरन दुनियाभर के बेहतरीन चिकित्सकों ने हिस्सा लिया. इस सेमिनार में हिस्सा लेने पहुंची एक महिला चिकित्सक अर्पिता लाखोटिया जो की यूएस में अपनी प्रेक्टिस कर रही है ने जीन थेरेपी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हमारे शरीर में हजारों बीमारियां ऐसी है जो या तो किसी जीन की संरचना में आये विकार के परिणामस्वरूप होती है या फिर किसी आवश्यक जीन की अनुपस्थिति के कारण. 

जीन चिकित्सा के अंतर्गत मुख्य रूप से तीन विधिया प्रयोग में लाई जाती है: 
जैव प्रौद्योगिकी की सहायता से ऐसी बीमारियों का उपचार अब संभव हो गया है. जीन चिकित्सा के माध्यम से अनुपस्थित अथवा विकृत जीन की पहचान करके उसे काटकर उसकी जगह दोषमुक्त जीन को प्रतिस्थापित कर दिया जाता है. उन्होंने बताया कि जीन चिकित्सा के अंतर्गत मुख्य रूप से तीन विधिया प्रयोग में लाई जाती है जिसमें जीन प्रतिस्थापन जीन सुधार जीन ऑग्मेंटेशन प्रमुख है. उन्होंने बताया कि विकृत अथवा दोषमुक्त जीन के स्थान पर विकृतीं जीन को प्रतिस्थापित करने की प्रक्रिया जीन प्रतिस्थापन कहलाती है जबकि जीन करेक्शन के अंतर्गत जीन में आय आणविक विकारो को थोड़ा परिवर्तित करके उसे ठीक किया जाता है. कोशिका के अंतर्गत विकृत जीन के साथ एक पूरी तरह से कार्य करने वाले जीन को डाल दिया जाता है जो स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए विकारो को दूर कर देता है इस विधि को जीन ऑग्मेंटेशन कहा जाता है. 

जीन चिकित्सा के लाभ: 
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान द्वारा मेटा .स्टेटिक मेलानोमा का उपचार.
- माइलॉयड कोशिकाओं को प्रभावित करने वाले रोगों का उपचार.
- पार्किसन रोग का उपचार.
- हंटिंगटन कोइया का उपचार.
- थैलेसेमिया ए सिस्टिक फाइब्रोसिस और कैंसर के कुछ प्रकारो का उपचार.
- चुहिया में सिकल रोग का सफलतापूर्वक उपचान किया गया है.
- एस. सी. आई. डी. सी. सीवियर कंबाइड डिफिसियेंसी या बबल ब्वाय रोग के उपचार का विकास 2002 में किया गया. 

जैसलमेर में हुई चिकित्सकों की इस महत्वपूर्ण सेमिनार में विभिन्न विषयों को लेकर दुनियाभर के चिकित्सकों ने अपने अनुभवों को साझा किया ताकि चिकित्सा के क्षेत्र में आमजन को बेहतर लाभ मिल सके. वहीं जैसलमेर जैसी जगह पर इस तरह की सेमिनार यहां के चिकित्सकों के लिये भी किसी वरदान से कम नहीं है. इस तरह के चिकित्सकीय आयोजनों से जहां एक ही प्लेटफार्म पर दुनियाभर की चिकित्सकीय विधियों को जानने का मौका मिलता है. वहीं दुनियाभर में चल रही श्रेष्ठतम तकनीकों से भी चिकित्सकों को रूबरू होने का मौका मिलता है. जैसलमेर में चल रही इस सेमिनार में विभिन्न तकनीकों के बीच जीन थेरेपी को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हुई और इसे जल्द ही भारत में आरम्भ करने को लेकर भी चिकित्सकों के बीच विचार विमर्श किया गया ताकि दुनिया की श्रेष्ठ तकनीक से भारत की बड़ी आबादी को चिकित्सा की नई तकनीकों का लाभ दिलवाया जा सके.  

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दशहरा का पर्व आज, लेकिन आज नहीं होगा रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ का दहन 

 दशहरा का पर्व आज, लेकिन आज नहीं होगा रावण, कुम्भकरण और मेघनाथ का दहन 

जयपुर: देश के जाति एवं गौरव को बढ़ाने वाले उसकी महान संस्कृति की परम्पराओं और भीत्तरी ऊर्जा के प्रतीक विभिन्न त्यौहार मनाए जाते हैं. शरद ऋतु के एक ऐसे ही विशिष्ट त्यौहारों में से एक है दशहरा. यह आश्विन मास की शुक्ला दशमी को बड़े उत्साह ,उल्लास और उमंग के साथ मनाया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना संक्रमण के चलते जिला प्रशासन और नगर परिषद के संयुक्त तत्वाधान में हर साल आयोजित होने वाला दशहरे मेले का इस बार आयोजन नहीं होगा.

आमजन के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए मेले पर लगाई रोक:
जिला प्रशासन ने इस बार कोरोना संक्रमण के हालात को काबू में रखने और आमजन के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस मेले पर रोक लगाई है. ऐसे में इस बार दशहरे पर हर साल की भांति स्थानीय शहीद पूनम सिंह स्टेडियम में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन और आतिशबाजी नहीं होगी. कलेक्टर आशीष मोदी ने बताया कि कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सबसे अधिक आवश्यक है सतर्कता. कोरोना वायरस की चेन को तोड़ने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बेहद जरूरी है. 

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जिले में दशहरे मेले का आयोजन स्थगित:
एक दूसरे से दूरी बनाकर ही कोरोना वायरस के संक्रमण पर रोक लगाई जा सकती है. ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करने के लिए जिले में दशहरे मेले का आयोजन स्थगित किया गया है. साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि, कोरोना महामारी को देखते हुए दशहरा और दीपावली का त्यौहार अपने परिवार के साथ सुरक्षित तरीके से घर में ही मनाएं. गौरतलब है कि हर बार जैसलमेर में बुराई पर अच्छाई की जीत के पर्व दशहरे के अवसर पर शहीद पूनम सिंह स्टेडियम में मेले का आयोजन होता था. जिसमें अन्य जिलों से आए कारीगरों द्वारा निर्मित रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के आदमकद के पुतलों का दहन किया जाता था. साथ ही इस मेले में भारी संख्या में लोगों पहुंचते थे.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सूर्य​वीर सिंह तंवर की रिपोर्ट

जैसलमेर: राजकीय जवाहर अस्पताल का ब्लड बैंक खाली, थैलेसीमिया के मरीजों के सामने खड़ी हो रही परेशानी

जैसलमेर: राजकीय जवाहर अस्पताल का ब्लड बैंक खाली, थैलेसीमिया के मरीजों के सामने खड़ी हो रही परेशानी

जैसलमेर: जिले के जवाहर अस्पताल में इन दिनों ब्लड बैंक में खून की कमी आ रही है. इससे बीमार मरीजों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जैसलमेर में इन दिनों थैलीसिमिया से ग्रसित बच्चों को खून की आवश्यकता है. अब तक खून की व्यवस्था जवाहर अस्पताल के ब्लड बैंक से ही कर दी गई. लेकिन कोरोना के कारण रक्तदाताओं के नहीं आने से अब ब्लड बैंक में खून की कमी आ रही है. 

खून के कुछ नमूनों में कमी आनी शुरू हो गई:  
ब्लड स्पेशलिस्ट के अनुसार किसी व्यक्ति से लिए गए खून का उपयोग अधिकतम 35 दिन में करना जरूरी होता है. 35 दिन के बाद लिया गया खून उपयोग योग्य नही रहता. इससे लॉकडाउन से पहले ब्लड बैंक में पर्याप्त मात्रा में खून की उपलब्धता थी. लेकिन जैसे जैसे लोगों को खून की जरूरत पड़ी वैसे वैसे ब्लड बैंक से खून लिया जाता है. लेकिन उसकी एवज में दूसरा खून भी नहीं मिला. इससे अब खून के कुछ नमूनों में कमी आनी शुरू हो गई है. जैसलमेर में पहले की तुलना में पिछले कुछ सालों में रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ी है. जिससे थैलीसीमिया से ग्रसित बच्चों को राहत मिली थी. थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों व उनके परिजनों को खून के लिए मशक्कत नहीं करनी पड़ती थी. लेकिन अब लॉकडाउन होने से रक्तदाता अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं. जिससे थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों के जान पर बन आई है. हालांकि अभी भी ब्लड बैंक के पास खून उपलब्ध है. लेकिन खून के कुछ नमूने अब खत्म होने की कगार तक पहुंच गए है. इससे आगामी समय में समस्या खड़ी हो जाएगी. 

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रक्तदाताओं के नहीं आने से खून मिलने का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा: 
अस्पताल के रक्त कोष में जहां हर महीने 300 से 350 यूनिट रक्त प्राप्त होता था. लॉकडाउन के चलते रक्तदाताओं के नहीं आने से खून मिलने का ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है. हालांकि उपयोग का आंकड़ा कम हुआ है. लेकिन प्रसूता, थैलीसीमिया व दुर्घटना में खून की जरूरत रहती है. ब्लड बैंक के तकनीकी सहायक ने बताया की अस्पताल के ब्लड बैंक में खून पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है. लेकिन यहीं स्थिति रही तो आगामी समय में कुछ नमूनों के ब्लड खत्म हो सकते हैं. रक्तदाताओं से संपर्क किया जा रहा है. फिलहाल बी निगेटिव खून की आवश्यकता है. अगर कोई रक्तदान करना चाहे तो मेरे मोबाइल नंबर 9413314230 पर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. 

सैन्य शस्त्र परिक्षण का फिर साक्षी बना जैसलमेर, थार के रेगिस्तान में मिसाइल नाग के एडवांस वर्जन का सफल परीक्षण 

सैन्य शस्त्र परिक्षण का फिर साक्षी बना जैसलमेर, थार के रेगिस्तान में मिसाइल नाग के एडवांस वर्जन का सफल परीक्षण 

जैसलमेर: राजस्थान में थार के रेगिस्तान में एंटी टैंक मिसाइल नाग के उन्नत वर्जन का परीक्षण किया गया. भारत ने गुरुवार को एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल-नाग–का अंतिम परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर सभी परीक्षण एकदम सटीक रहे. डीआरडीओ की ओर से विकसित और भारत डॉयनामिक्स लिमिटेड की तरफ से निर्मित नाग मिसाइल का परीक्षण सेना के अधिकारियों ने किया. यह मिसाइल सेना की ओर से तय मापदंडों पर एकदम खरी उतरी.

सेना ने जांची एंटी टैंक मिसाइल नाग की मारक क्षमता:
सैन्य सूत्रों का कहना है कि वैज्ञानिकों की उपस्थिति में सेना ने एंटी टैंक मिसाइल नाग की मारक क्षमता जांची. इस क्षेत्र में अलग-अलग मौसम में नाग मिसाइल के पूर्व में भी परीक्षण किए जा चुके हैं. रक्षा मंत्रालय नाग मिसाइल को सेना के लिए खरीदने का ऑर्डर पहले ही दे चुका है. नाग मिसाइल के उन्नत वर्जन में इंफ्रारेड सिस्टम लगाया गया है. इसकी मदद से यह मिसाइलअब अपने लक्ष्य को आसानी से पहचान कर सकती है। इस कारण अब इस मिसाइल की इतनी सटीकता है कि इसे फायर एंड फोरगेट कहा जाने लगा है.

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जल्द ही किया जाएगा मिसाइल को भारतीय सेना में शामिल:
इस मिसाइल को जल्द ही भारतीय सेना में शामिल किया जाएगा. 2008 में, रक्षा मंत्रालय ने सेना के लिए 300 नाग मिसाइलों और 25 मिसाइल वाहकों की खरीद की मंजूरी दी थी. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बताया कि परीक्षण सुबह 6.45 बजे राजस्थान के पोखरण क्षेत्र फायरिंग रेंज में किया गया. मिसाइल को वास्तविक वारहेड के साथ एकीकृत किया गया था और एक टैंक लक्ष्य निर्धारित सीमा पर रखा गया था. यह नाग मिसाइल कैरियर नामिका (एनएएमआईसीए) से लॉन्च किया गया.

मिसाइल दिन और रात में दुश्मन टैंकों के साथ लड़ने में सक्षम:
डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया यह मिसाइल दिन और रात में दुश्मन टैंकों के साथ लड़ने में सक्षम है. नाग मिसाइल वाहक नामिका एक इन्फैन्ट्री कॉम्बैट व्हीकल बीएमपी2 आधारित प्रणाली है. अब यह उत्पादन चरण में प्रवेश करेगा. मिसाइल का उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) द्वारा किया जाएगा, जबकि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री मेडक नामिका का उत्पादन करेगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और भारतीय सेना को के सफल परीक्षण के लिए बधाई दी है. मिसाइल के उत्पादन चरण तक लाने में डीआरडीओ के चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी का अहम योगदान है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए सुर्यवीर सिंह तंवर की रिपोर्ट

पति को नींद की गोलियां खिलाने के बाद पत्थर सिर पर मारा, पूछताछ में आरोपी पत्नी का खुलासा, पत्नी की मां व प्रेमी गिरफ्तार

पति को नींद की गोलियां खिलाने के बाद पत्थर सिर पर मारा, पूछताछ में आरोपी पत्नी का खुलासा, पत्नी की मां व प्रेमी गिरफ्तार

जैसलमेर: जिले के सांकड़ा क्षेत्र के माधोपुरा गांव की मेघवालों की ढाणी में पत्नी द्वारा पति की हत्या करने के मामले में आरोपी पत्नी के इस षड़यंत्र में उसकी मां व प्रेमी भी शामिल था. गौरतलब है कि रविवार को इस मामले का खुलासा हुआ था. मृतक कौशलाराम के परिजनों ने इस संबंध में सांकड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी. मृतक के पिता की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मृतक की पत्नी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया था.

पूछताछ में पत्नी ने सारा सच कबूला: 
कौशलाराम के परिजन रविवार की सुबह जब उठे तो उन्हें कौशलाराम का शव पलंग पर पड़ा मिला. आसपास खून भी बिखरा था. ऐसे में परिजनों को उसकी पत्नी पर ही संदेह था तो उन्होंने उसके खिलाफ मामला दर्ज करवा दिया. मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी डॉ. अजयसिंह ने मौका मुआयना किया और हत्या का मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने गिरफ्तार पत्नी ने पूछताछ की तो उसने हत्या करना स्वीकार करने के साथ-साथ सारा सच कबूल कर लिया. 

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पहले खुद ने नींद की गोली लेकर की जांच:
इस पूरे मामले में नाबालिग किशोरी की मां सुआदेवी पत्नी मोटाराम भी शामिल थी. उसने ही अपनी बेटी को नींद की गोलियां लाकर दी ताकि वह अपने पति को खिलाकर उसे सुला दे और बाद में उसकी हत्या कर दें. नाबालिग किशोरी ने पहले एक गोली लेकर यह जांच की कितनी देर तक नींद आती है. फिर अगले दिन अपने पति को खाने में गोलियां मिलाकर खिला दी. पूछताछ में यह सामने आया है कि आरोपी पत्नी का अपने पिता के साथ काम करने वाले एक युवक के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था. दोनों एक दूसरे से शादी करना चाहते थे लेकिन उसके माता-पिता ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी. आरोपी ने बताया कि उसकी जिस लड़के के साथ शादी हुई थी वह शराबी था. उनकी शादी तीन माह पहले ही हुई थी. 

पंचायत चुनाव में भीड़ जुटाने पर मोहनगढ़ व भणियाणा में दो गिरफ्तार, मामला दर्ज

पंचायत चुनाव में भीड़ जुटाने पर मोहनगढ़ व भणियाणा में दो गिरफ्तार, मामला दर्ज

जैसलमेर: पंचायत चुनाव के दौरान कोविड- 19 के नियमों की पालना नहीं करने पर पुलिस द्वारा मोहनगढ़ व भणियाणा में कार्रवाई कर 1-1 युवक को गिरफ्तार किया गया. एसपी डॉ. अजयसिंह के आदेशानुसार एएसपी राकेश बैरवा के निर्देशन में पुलिस थाना मोहनगढ़ में उनि विशनसिंह मय पुलिस जाब्ता द्वारा 113 आरडी एसबीएस के पास चक 31 पर किरताराम पुत्र घमंडाराम निवासी 31 एसबीएस जवाहर नगर के खिलाफ बिना अनुमति भीड़ एकत्रित करने पर प्रकरण दर्ज किया.

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मतदान बूथ पर से 150 व्यक्ति एकत्रित हो रखे थे :
पुलिस थाना भणियाणा के हल्का क्षेत्र में थानाधिकारी पुलिस थाना भणियाणा उनि जसराज मय जाब्ता द्वारा दौरान हल्का गस्त करते बागथल पहुंचे तो मतदान बूथ के बाएं साइड एक टेंट में 100 से 150 व्यक्ति एकत्रित हो रखे थे. जिनसे पता किया गया तो महिला प्रत्याशी के मतदाताओं की भीड़ थी. भीड़ के संबंध में परमिशन नहीं होने पर पुलिस थाना भणियाणा में महिला प्रत्याशी के खिलाफ आपदा प्रबंधक अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया. 

स्वर्णनगरी के पीले पत्थर को विश्वस्तर पर मिलेगी पहचान !

स्वर्णनगरी के पीले पत्थर को विश्वस्तर पर मिलेगी पहचान !

जैसलमेर: देश के पश्चिमी छोर पर बसा सरहदी जिला जैसलमेर जो अपने विशाल रेगिस्तान और अपनी विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के चलते काले पानी के रूप में जाना जाता था. लेकिन समय और परिस्थितयों के बदलने के साथ साथ जैसलमेर ने अपनी पुरानी पहचान के इतर नई पहचान गढ़ना आरम्भ कर दिया जिसमें पर्यटन के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों के रूप में जिला विकास की रफ्तार के साथ कदमताल करने लगा है. वैसे तो देश दुनिया से सोने के समान चमकने वाली स्वर्णनगरी को देखने हर साल लाखों की संख्या में लोग आते हैं. इस पीले पत्थर को देख आश्चर्यचकित हो जाते हैं जिसको वह कभी भूल नहीं पाते है लेकिन अब इस पत्थर को और चार चाँद लगने वाले हैं.  

विभिन्न स्तरों पर प्रयास शुरू हो गए:  
जैसलमेर के प्रसिद्ध पीले पत्थर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास शुरू हो गए हैं. जैसलमेर से राज्य सरकार को पत्र लिखकर पीले पत्थर के राष्ट्रीय प्रचार की मांग की है. इसके अलावा, कई भूविज्ञानी पत्थर पर शोध कर रहे हैं और इसे यूनेस्को विरासत संसाधन के रूप में मान्यता प्राप्त करने के प्रयास कर रहे हैं. जैसलमेर में पाया जाने वाला अजीबो गरीब पीला पत्थर अपनी कला, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए विश्व प्रसिद्ध है. पत्थर पूरी दुनिया में केवल जैसलमेर में उपलब्ध है और इसका उपयोग सोनार किले और कई अन्य ऐतिहासिक स्मारकों में किया गया है. यह पीला पत्थर 160 मिलियन साल पुरानी समुद्री चट्टान से संबंधित है. फोरमर प्रिंसीपल आफ महाराजा कॉलेज व फोर्मर प्रोफेसर यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान के प्रसिद्ध ज्योलोजिस्ट डॉ एम.के.पण्डित की टीम द्वारा किये गए इस संबंध में शोध के यूनियन ऑफ ज्योलोजिकल साईंस की जनरल में इसे प्रमाणित मंजूरी मिलने के बाद यह शोध आने वाले दिनो में जीयोहेरीटेज जनरल में प्रकाशित हो गया है. साईंस जनरल के लेटेस्ट अंक में द्वारा इसे आगामी अंक में प्रकाशन के बाद अब इस यूनिस्को के ग्लोबल हेरीटेल रिर्सोसेज में शामिल करने की प्रकिया शुरु कर दी गई हैं. ग्लोबल हेरीटेज की श्रेणी में शामिल होने के बाद यह पत्थर भारत का दूसरा पत्थर होगा जिसे यह सम्मान हासिल होगा. इससे पहले वर्ष 2019 में मकराना के सफेद संगमर्मर के पत्थर को इन्ही वैज्ञानिकों की टीम के सहयोग से ग्लोबल हेरीटेज का दर्जा मिला था व ग्लोबल हेरीटेज रिर्सोसेज में शामिल किया गया था. 

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इसकी कलात्मकता पूरे देश विदेश में प्रसिद्ध:
जैसलमेर जिला कलेक्टर आशीष मोदी ने बातचीत में बताया कि पूरे विश्व में एकमात्र जैसलमेर में पाए जाने वाला पीला पत्थर व इसकी कलात्मकता पूरे देश विदेश में प्रसिद्ध हैं इस पत्थर की खूबसूरती व सचमुच बेमिसाल हैं तथा  इस पत्थर पर की जा रही कारविंग को देखकर जैसलमेर में आने वाले देश विदेश के सैलानी दीवाने हो जाते हैं व खासकर हार्ड पत्थर पर बनी हुई खूबसूरत मूर्ति कला को देखकर कायल हो जाते हैं. यहां पीले पत्थर से बना हुवा सोनार किला भी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. इसकी अद्भुत छट्टा दूर से देखने को बनती है. उन्होंने बताया कि यह हर्ष की बात हैं कि इस जैसलमेर के इस पीले पत्थर को विश्वस्तरीय आईडेन्टीफिकेशन मिलने के लिये कंसीडर किया जा रहा हैं, हमनें भी इसके नेशनल प्रमोशन के लिये प्रयास किये हैं जैसलमेर के उद्योग विभाग के जी.एम. ने इस विश्व स्तरीय पत्थर के प्रचार प्रसार व नेशनल प्रमोशन के लिये राज्य सरकार को एक पत्र लिखा हैं और विश्व स्तर की आईडेन्टीफिकेशन मिलने के बाद राज्य सरकार के स्तर पर भी इसको और प्रमोट करने के लिये क्या क्या कदम उठाए जाएंगे इस संबंध में भी विचार विमर्श कर रहे हैं. 

बॉर्डर पर घुसपैठ और मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर गृह मंत्रालय ने जारी किया अलर्ट

बॉर्डर पर घुसपैठ और मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर गृह मंत्रालय ने जारी किया अलर्ट

जैसलमेर: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जैसलमेर सहित पश्चिमी राजस्थान के बॉर्डर पर घुसपैठ, जासूसी और मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर चिंता जताते हुए जैसलमेर के सीमावर्ती गांवों में संचार, परिवहन और अन्य समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र व राज्य की सरकार को उसके समाधान के निर्देश दिए है. 

बीएसएफ एवं गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए:  
गृह मंत्रालय के सीमा प्रबंधन विभाग ने सामाजिक संगठन सीमाजन कल्याण समिति की जिला शाखा को पिछले दिनों भेजे गए मांग प्रतिवेदन पर कार्रवाई करते हुए उन्हें अवगत कराया गया है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा क्षेत्रों में प्रायोजित राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को लेकर सीमा सुरक्षा बल एवं गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए है. 

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डबल रोड के निर्माण में आ रही समस्या का समाधान के निर्देश: 
सीमाजन कल्याण समिति के जिला मंत्री शरद व्यास ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने समिति द्वारा भेजे गए मांग पत्र के आधार पर ही भारत माला परियोजना के तहत स्वीकृत जैसलमेर से म्याजलार तक सिंगल रोड़ के स्थान पर डबल रोड के निर्माण में आ रही डीएनपी की आपत्ति के संबंध में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को इस संबंध में अतिशीघ्र समस्या का समाधान के निर्देश दिए है ताकि सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़क का निर्माण शुरू हो सकें.

सीआईडी बीआई की बंद चौकियों को पुनः खोलने का आग्रह:
उन्होंने बताया कि पश्चिमी सीमा पर सीआईडी बीआई की बंद चौकियों को पुनः खोलने, सीमा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाने के लिए कृषि आधारित उद्योग व बिक्री केंद्र खुलवाने और पाकिस्तान से आए विस्थापितों को नागरिकता प्रदान करने के लिए भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को इस संबंध में समुचित कार्रवाई का आग्रह किया है. 
 

जैसलमेर: हाईटेंशन लाइन के करंट से मादा गोडावण की मौत, तीन साल में 6 मर चुके

जैसलमेर: हाईटेंशन लाइन के करंट से मादा गोडावण की मौत, तीन साल में 6 मर चुके

जैसलमेर: राज्य पक्षी गोडावण पर बिजली की तारों का खतरा लगातार मंडरा रहा है. देगराय ओरण में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से एक मादा गोडावण की मौत हो गई. विभाग को घटना की जानकारी मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और गोडावण के शव को अपने कब्जे में ले लिया. मौके पर कई वनयजीव प्रेमी पहुंचे इस घटना पर रोष जताया. 

गोडावण संरक्षण के प्रयासों को बड़ा झटका: 
गौरतलब है कि लगातार कम हो रही गोडावण की संख्या के बीच इस तरह की घटनाएं गोडावण संरक्षण के प्रयासों को बड़ा झटका है. जिस जगह यह घटना हुई है वह डीएनपी क्षेत्र नहीं है. इस जगह से करीब 10 किमी दूर रासला में क्लोजर बना हुआ है जहां कई बार गोडावण देखे जा चुके हैं. इस बीच अब खतरा और भी मंडराने लगा है. आसपास के इलाके में हाईटेंशन तारों का जंजाल है और वर्तमान में चारों तरफ हरियाली होने से गोडावण के यहां आने की संभावना बनी रहती है. तारों की चपेट में आने से गोडावण जैसे लुप्त प्राय पक्षी की मौत ने गोडावण संरक्षण के प्रयासों को बड़ा नुकसान पहुंचाया है. पिछले कई चार दशकों से गोडावण संरक्षण को लेकर कई योजनाएं चल रही है और इस बीच गोडावणों की अकाल मौत विशेषज्ञों को चिंतित कर देने वाली साबित हो रही है. 2017 से लेकर अब तक 6 गोडावण तारों की चपेट में आ चुके हैं. जहां एक तरफ लगातार गोडावण की संख्या कम हो रही है वहीं इस बीच इस तरह से गोडावण के काल का ग्रास बनना और भी परेशान कर देने वाला है. 

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जिम्मेदारों की लापरवाही से घटनाएं बढ़ती जा रही:
जानकारी के अनुसार तारों की चपेट में आने से गोडावण के मौत के मामले बढ़ने के बाद से यह चर्चा चल रही है कि या तो हाईटेंशन तारों को अंडरग्राउंड किया जाए या फिर बर्ड डायवर्टर लगाए जाए. लेकिन तीन चार सालों में जिम्मेदार किसी एक पर सहमत नहीं हो पाए हैं.  इस तरह की घटनाएं लगातार होती जा रही है. आखिरकार हाल ही में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि अंडरग्राउंड केबलिंग करना आसान नहीं होगा और साथ ही यह प्रोजेक्ट काफी महंगा साबित होगा. इतनी घटनाएं होने के बावजूद बर्ड डायवर्टर नहीं लगाए गए हैं और एक और गोडावण की मौत हो गई. जिम्मेदारों की लापरवाही से घटनाएं बढ़ती जा रही है. जानकारों के अनुसार समय रहते सभी हाईटेंशन लाइनों पर बर्ड डायवर्टर लगा दिए जाते तो इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था.