VIDEO: कांग्रेस में रिजल्ट से पहले किचकिच, विधायक और चुनाव लड़े नेता भी रहे कम सक्रिय

Laxman Raghav Published Date 2019/05/16 09:28

बीकानेर: चुनाव परिणाम आने तक बीकानेर में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अपनी अपनी जीत के दावे कर रहे हैं. हालांकि यह सच है कि भाजपा में देवी सिंह भाटी ने खुले आम बगावत कर दी थी, लेकिन कांग्रेस में भी किचकिच कम नहीं थी. इस चुनाव में यह देखा गया कि अपनों ने खूब कार सेवा की बस फर्क था तो यह कि कांग्रेस में यहां कारसेवा भीतर रहकर ही की गई. आइए डालते हैं कांग्रेस की किचकिच पर एक नजर ....

गोविंद मेघवाल ने अलापे विरोध के स्वर:
बीकानेर कांग्रेस में इस बार टिकट एक नए चेहरे और एक पूर्व नौकरशाह को थमाई गई थी. टिकट मिलने के साथ ही बीकानेर में खटपट शुरू हो गई थी. सबसे पहले टिकट के दावेदार माने जा रहे गोविंद मेघवाल ने विरोध के स्वर अलापे और दिल्ली तक अपनी बात पहुंचा दी. खैर जैसे-तैसे अशोक गहलोत की कड़ी नसीहत ने चुनावी मंच पर इन नेताओं को एक साथ तो ला दिया, लेकिन कहते हैं ना कि जब मन की कड़वाहट इतनी आसानी से कहां जाती है. कहा तो यहां तक जा रहा है कि कांग्रेस प्रत्याशी मदन गोपाल मेघवाल भी इस खींचतान से परेशान थे, लेकिन चुनाव थे इसलिए चुपचाप थे. 

नेताओं ने बूथ मैनेजमेंट में भी बरती लापरवाही:
दरअसल अर्जुन मेघवाल का कुछ जगह विरोध था, लेकिन उसके बाद भी बीकानेर में कांग्रेस चुनाव में अपने पक्ष में टेंपो क्रिएट नहीं कर पाई. इसकी बड़ी वजह यह रही कि कांग्रेस का डर ग्राउंड से दूर नजर आया था. हालांकि बड़े नेताओं की चुनावी सभाओं में जरूर कांग्रेस के नेता एक साथ देखते थे, लेकिन जमीन पर ऐसा कुछ नहीं था. यहां तक कि शहर कांग्रेस के पदाधिकारी चुनाव से दूर दिखे. प्रत्याशी के प्रचार प्रसार का जिम्मा भी कांग्रेस के प्रवक्ताओं तक को नहीं दिया गया. कहा तो यहां तक जा रहा है कि कांग्रेस के विधानसभा में चुनाव लड़े नेताओं और विधायकों ने बूथ मैनेजमेंट में भी लापरवाही बरती. सुनते तो यह भी हैं कि मदन गोपाल मेघवाल जयपुर तक शिकायत भी भेज चुके हैं. हालांकि मीडिया से बातचीत में वह इससे इंकार करते है. दरअसल बीकानेर में कांग्रेस के भीतर कई कैंप हैं, यहां तक भी बातें हो रही है कि जिन जाट नेता का मदन गोपाल को सहारा था वे भी कोई बहुत ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आए. अब इसकी वजह क्या है यह तो नेताजी खुद या मदन गोपाल ही बता सकते हैं. 

एंटी इनकंबेंसी को नहीं भुना पाई कांग्रेस:
इतना कहा जा रहा है कि यदि चुनाव परिणामों में कांग्रेस के लिए 19-20 हुआ तो इस बार संगठन में भी व्यापक फेरबदल देखने को मिलेगा. हालांकि देहात कांग्रेस में पहले से ही फेरबदल तय  माना जा रहा है तो दूसरी तरफ शहर कांग्रेस में भी अब बीडी कल्ला की राय को तरजीह मिलने की बात चल रही है. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भाजपा प्रत्याशी के लगातार दो बार सांसद रहने की एंटी इनकंबेंसी को कांग्रेस पूरी तरह नहीं भुना पाई है. 

... बीकानेर से लक्ष्मण राघव की रिपोर्ट 

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