एक साल से जिला अस्पताल को नहीं मिला 34 लाख रुपए का बजट

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/12 10:10

सिरोही। सिरोही का जिला अस्पताल जहां की दो मुख्य आईसीयू व बर्न यूनिट पर एक साल से ताला लगा है। कारण, क्यों कि एआरटी सेंटर की मरम्मत के लिए करीब 34 लाख का बजट अभी तक नहीं मिला। ऐसे में सामान्य मरीजों को तो जनरल व सर्जिकल वार्ड में शिफ्ट कर रहे हैं जबकि गंभीर मरीजों को सीधे ही रैफर किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार एक साल पूर्व अस्पताल के एआरटी सेंटर की फर्श धंसने से इसकी छत पर बने आईसीयू व बर्न यूनिट को पीडब्ल्यूडी की और से असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। दोनों ही यूनिट इसके ऊपर थी इसलिए इसे भी बंद करने के आदेश जारी कर दिए थे।

एआरटी सेंटर की मरम्मत के लिए एनआरएचएम के इंजीनियरों की टीम ने 34 लाख 25 हजार रुपए एस्टीमेट बनाकर अस्पताल प्रशासन को सौंपा था और अस्पताल प्रशासन ने इसे राज्य सरकार को भेजा। जुलाई 2018 से अस्पताल प्रशासन लगातार राज्य सरकार से बजट मांग रहा है लेकिन अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं मिली है। ऐसे में दोनों की मुख्य यूनिट को बंद पड़ी है। वहीं आईसीयू वाले मरीजों को जनरल वार्ड में और बर्न केस वाले मरीजों को सर्जिकल वार्ड में भर्ती किया जा रहा है।

हालात यह है कि यदि गंभीर मरीज को अस्पताल लाया जाता है तो उसे सीधे ही रैफर करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में जिले में हुई अतिवृष्टि की वजह से 30 दिसंबर 2017 को एआरटी सेंटर की फर्श अचानक धंस गई थी। इस पर पीडब्ल्यूडी की टीम ने सेंटर का निरीक्षण किया और आईसीयू व बर्न यूनिट को असुरक्षित घोषित किया था, जिसके बाद यह दोनों ही यूनिट बंद है।

2011 में एआरटी सेंटर बना था। 2017 में इसका फर्श धंस गया, यानि 6 साल में ही यह भवन नाकारा साबित कर दिया गया। जबकि, एआरटी सेंटर के ऊपर आईसीयू व बर्न यूनिट का निर्माण 2013 में किया गया था और जनवरी 2015 में तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने दोनों यूनिट का लोकार्पण किया था। लेकिन दो साल में यह दोनों मुख्य यूनिट भी बंद हो गई।

इसलिए जरूरी है एआरटी सेंटर, आईसीयू व बर्न यूनिट
एआरटी सेंटर: यहां एड्स के मरीजों का इलाज और काउंसलिंग होती है। मरीजों की गोपनीयता भंग न हो इसलिए इस सेंटर को बनाया गया।
परेशानी: अब इस सेंटर को केवल एक कक्ष में शिफ्ट किया है, वह भी सामान्य वार्ड के साथ ही। ऐसे में मरीजों की न तो गोपनीयता है और नही उनके लिए यहां सुविधा।

आईसीयू: गंभीर मरीजों को यहां भर्ती किया जाता है। इसमें कॉर्डियक मॉनिटर, डी फेब्रीलेटर, एयरकंडीशनर, वेंटिलेटर और ईसीजी जैसी सुविधाएं होती है।

परेशानी: मरीजों को सामान्य वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। जहां इनके लिए कोई आईसीयू जैसी व्यवस्था नहीं। ज्यादा हालात गंभीर होतो मरीज रैफर।

बर्न यूनिट: आग से जलने वाले मरीजों का इलाज इस यूनिट में होता है। मरीज को कोई इंफेक्शन न हो इसके लिए यह यूनिट पूरी तरह से अलग होती है।

परेशानी: ऐसे मरीजों को सर्जिकल वार्ड में भर्ती कर उनका इलाज किया जा रहा है। ऐसे में उनमें संक्रमण का खतरा भी है और चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल रही।
सिरोही से कमलेश प्रजापत की रिपोर्ट

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in

कांग्रेस-बीजेपी के भरोसे\'मंद\' - 25 !

सैम पित्रोदा के बयान पर कांग्रेस की किरकिरी
सैम पित्रोदा के एयर स्ट्राइक पर विवादित बयान को लेकर सियासत
लोकसभा चुनाव का सियासी गणित
धन संबधित परेशानी है तो जानिए कुछ असरकारी टोटके| Good Luck Tips
BJP ने 182 लोकसभा उम्मीदवारों की पहली सूची की जारी
BJP थोड़ी देर में जारी करेगी उम्मीदवारों की पहली सूची
देश के 3 प्रमुख मंदिरों की होली