खेलों में कमी को पूरा करने के लिए चिकित्सक ने उठाया बेड़ा

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/08 01:31

नागौर। एक विशाल देश होने और 125 करोड़ की जनसंख्या के बावजूद खेलों के मामले में भारत आज भी पिछड़ा हुआ है। केवल क्रिकेट और कुछ गिने चुने अंतरराष्ट्रीय खेलों को छोड़ दें तो भारत में आज भी खेलों के नाम पर केवल खानापूर्ति ही होती है यही वजह है कि ओलिम्पिक जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को पदक नहीं मिल पाते। इसी कमी को पूरा करने के लिए एक चिकित्सक ने इसका बेड़ा उठाया है । 

डीडवाना की पहचान प्रदेश में खेल नगरी के नाम से भी है क्योंकि बास्केटबॉल, फुटबॉल और क्रिकेट सहित कई खेलों में यहां से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकले हैं और यही वजह है कि डीडवाना में खेलों के प्रति लोगों में लगाव भी है। लेकिन बदलते वक्त और बढ़ते कम्पीटिशन में आज हालात बदल गए हैं। खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन और कोचिंग नहीं मिल पाने की वजह से उनको उचित मुकाम नहीं मिलता और इसी कमी को पुरा करने की ठानी है डॉ सोहन चौधरी ने जिन्होंने अपने स्तर पर ही एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया और लग गए हैं बच्चों का भविष्य संवारने में लगें है।

डॉ चौधरी के इस प्रयास में उनके दोस्तों ने भी पूरा साथ दिया तो सबसे पहले चाइनीज मार्शल आर्ट, जुड़ो और कराटे जैसे खेलों की कोचिंग डीडवाना में शुरू की गई और छोटे छोटे बच्चों से इसको शुरुआत की गई। 6 -7 साल की उम्र के बच्चों से लेकर 11-12 साल तक के बच्चे यहाँ मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग ले रहे हैं। बहुत ही कम समय में बच्चों को ऐसी ट्रेनिंग दी गई कि इसका नतीजा भी मेहनत के अनुरूप ही रहा। जयपुर में आयोजित जिला स्तरीय कराटे प्रतियोगिता में यहां से भाग लेने वाला कोई खिलाड़ी खाली हाथ नहीं आया और पहले ही प्रयास में यहां की टीम रनर अप रही।

खिलाड़ियों को मिली सफलता के बाद खिलाड़ियों के परिजन भी इस बात को लेकर खुश हैं कि डीडवाना जैसी छोटी जगह पर भी उनके बच्चों को इस तरह से ट्रेनिंग दी जा रही है कि पहला प्रयास ही स्वर्णिम रहा। लेकिन डॉ चौधरी का कहना है कि केवल मार्शल आर्ट ही नहीं बल्कि शूटिंग, तीर अंदाजी और बॉक्सिंग के लिए भी यहां तैयारी करवाई जाएगी और मेरा सपना है कि डीडवाना की धरती से भारत के लिए ओलिम्पिक खिलाड़ी तैयार हो सकें।

डॉ सोहन चौधरी का खेल प्रतिभाओं को तराशने का यह प्रयास काबिले तारीफ़ है ,जिसका नतीजा भी मिल रहा है। अगर इसी प्रकार् से देश की खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए लोग आगे आएं तो सायद ओलिम्पिक में हमें 2-4 मैडल से संतुष्टि नहीं करनी पड़े।
नरपत ज़ोया
संवाददाता
1St इंडिया 
नागौर
 

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