जयपुर VIDEO: भूजल दोहन की दोहरी मार ! विकास पर भारी शराब फैक्ट्री का जहरीला पानी, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: भूजल दोहन की दोहरी मार ! विकास पर भारी शराब फैक्ट्री का जहरीला पानी, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: अजीतगढ़ में शराब फैक्ट्री द्वारा अवैध जलदोहन और अनट्रीअेड पानी को गोचर भूमि में छोड़ने का मामला सामने आया है. अजीतगढ़ की जनता के हक का पानी शराब बनाने के काम आ रहा है, ऐसे में शराब फैक्ट्री को लेकर स्थानीय लोग आंदोलन पर उतर आए हैं. संभागीय आयुक्त को शिकायत भी भेजी है. जिस पानी से अजीतगढ़ की जनता की प्यास बुझती उस पानी से शराब बनाकर कंपनी जमकर नोट छाप रही है. अजीतगढ़ में एग्री बायोटेक कंपनी द्वारा शराब उत्पादन के लिए अवैध तरीके से भूजल दोहन से क्षेत्र का भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है. लोगों को अपने हक का पीने का पानी तक नहीं मिल रहा है. 

पेयजल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. खेती के लिए भी पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. यहीं नहीं फैट्री से निकलने वाले अपशिष्ट को गोचर भूमि में छोड़े जाने से इतनी बदबू फैली हुई है कि लोगों का जीना मुहाल हो गया है. दरअसल अजीतगढ़ की शराब निर्माता कंपनी एग्रीबायोटेक इंडस्ट्रीज लिमिटेड को केंद्रीय भूजल प्राधिकरण द्वारा 15 जुलाई 2005 से अगले 2 वर्ष के लिए तीन टयूबवेलों से 4 लाख लीटर प्रतिदिन जलदोहन करने की अनुमति प्रदान की गई थी. जो कि 11 जुलाई 2007 तक वैध थी. इस फैक्ट्री को इसके बाद किसी प्रकार की अनुमति नहीं दी गई है. अनुमति नही होने के बावजूद भी फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा मिलीभगत करके विगत 13 वर्षों में बिना अनुमति के अनेक ट्यूबवेल खुदवा कर अंधाधुंध जल दोहन किया जा रहा है. 

पड़ताल करने पर पता चला कि केंद्रीय भूजल बोर्ड नई दिल्ली के 29 नवंबर 2017 के पत्र में ये व्यवस्था दी गई कि फर्म को किसी प्रकार की भूजल दोहन की अनुमति प्रदान नहीं की गई है. पत्र में लिखा है कि फर्म को कोर्ट केस पेंडिंग होने की वजह से हम एनओसी रिन्यूवल नहीं कर सकते लेकिन फर्म को सलाह देते हैं कि जब तक कोर्ट केस का फैसला नहीं आता तब तक फर्म तीन ट्यूबेल से 4 लाख लीटर प्रतिदिन भूजल दोहन करने की जारी की गई पूर्ववर्ती शर्तों की अनुपालना करें. 

उधर मैसर्स एग्रीबायोटेक इंडस्ट्रीज लिमिटेड (शराब फैक्ट्री) के अवैध जल दोहन की शिकायत पर 9 जून 2016 को सीकर जिला कलेक्टर के निर्देश पर हुई कार्रवाई में प्रशासनिक टीम ने फैक्ट्री परिसर में 16 टयूबवेल अवैध तरीके से भूजल दोहन करते हुए पाए गए थे. जबकि वर्ष 2005 में फैक्ट्री स्थापित होने पर तीन टयूबवेलों से दो वर्ष तक के लिए जल दोहन करने की अनुमति दी गई थी. जिला कलेक्टर सीकर ने दिनांक 28 जून 2016 को फैक्ट्री प्रबंधन को तीन टयूबवेलों से तीन माह तक अस्थाई जलदोहन करने की अनुमति प्रदान की थी, लेकिन इसके बाद आज तक फैक्ट्री को किसी भी विभाग द्वारा जलदोहन की कोई अनुमति नही दी गई हैं. 

फैक्ट्री द्वारा अवैध जलदोहन करने की शिकायत पर जिला कलेक्टर सीकर के निर्देश पर मौके पर जांच करवाई करने पहुंची अधिकारियों की टीम ने फैक्ट्री परिसर में 13 टयूबवैल व इसके सटाकर स्थित प्लाट बी - 143 में तीन अवैध टयूबवेल पाए गए. कलेक्टर द्वारा फैक्ट्री के अवैध टयूबवेलों को नष्ट करने के आदेश दिए गए थे, लेकिन उक्त अधिकारियों की टीम ने फैक्ट्र प्रबंधन से मिलीभगत करके इनको नष्ट करने के बजाय सील करके मौका फर्द रिपोर्ट बनाकर लीपापोती कर दी. मिलीभगत के चलते वर्तमान में प्लाट बी - 143 में सीलबंद अवैध टयूबवेलों के सील के नीचे से पाइप काट कर अवैध जलदोहन चालू हैं. दूसरी ओर प्रतिदिन सैकड़ों पानी के टेंकर अवैध तरीके से मंगवा कर जलदोहन कर रहे हैं. इस मामले में संभागीय आयुक्त को भी शिकायत की गई है.

ऐसा भी नहीं है कि प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी न हो. स्थानीय लोगों द्वारा पूर्व में धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन दिए जा चुके है. अधिकारियों की टीम फेक्ट्री का सर्वे कर अवैध बोरिंग को सीज कर चुकी है, लेकिन ऊंचे रसूखात के चलते अधिकारियों की कार्रवाई व ग्रामीणों का विरोध हवा होता दिखाई दे रहा है. अब देखने वाली बात यह है कि घर-घर जल पहुंचाने का दावा करने वाली सरकार इस ओर कब ध्यान देती है और क्षेत्रवासियों को जलसंकट से मुक्ति दिलाती है.

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