3500 करोड़ की परियोजना फिर भी पानी- पानी त्राहि त्राहि

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/04 04:13

चूरू: जिले में पीने के पानी की प्रदेश के सबसे बड़ी परियोजना अपणी योजना दो चरणों मे लागू होने के बाद भी पीने के पानी के लिए जिले में हा हा कार मचा  हुआ है. इस योजना पर 3500 करोड़ रुपये खर्च हो गए है मगर पेयजल की सुविधा ऊंट के मुंह मे जीरा साबित हो रही है. सादुलपुर, तारानगर, चूरू ओर सरदारशहर में पीने के पानी के लिए प्रदर्शन हो रहे हैं.  

पीने के पानी की व्यवस्था
इस मामले में सरदारशहर खण्ड के अधिशाषी अभियंता गोविंद जांगिड़ ने बताया कि पीने के पानी की वैकलपिक व्यवस्था टैंकरों द्वारा पानी पहुंचाकर की जा रही है. और अवैध कनेक्शन हटाने का काम भी किया जा रहा है. 50 डिग्री पारा होने पर पानी की आवश्यकता दुगुनी हो जाती है. 

हिमालय का मीठा पानी पहुंचाने वाले प्रदेश
सुजानगढ़, रतनगढ़ व बीदासर के लोगों तक हिमालय का मीठा पानी पहुंचाने वाले प्रदेश के भगीरथ सो गए. इसका खमियाजा ये है कि 971 करोड़ रुपए की आपणी योजना का दूसरा चरण धरातल पर रेंग-रेंग कर आगे बढ़ रहा है. अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और कार्य करने वाली कंपनी की मनमानी प्रोजेक्ट की रफ्तार को कछुआ चाल बना दिया है. 

2013 में किया था पेयजल योजना का कार्य
जानकारी के अनुसार सरकार ने योजना के द्वितीय चरण के तहत रतनगढ़-सुजानगढ़ वृहद पेयजल परियोजना 2013 में स्वीकृत कर कार्य शुरू किया था. 2016 में कार्य पूरा कर लोगों को मीठा पानी उपलब्ध कराना था लेकिन ऐसा नहीं हो सका. वर्तमान में योजना की हालत ये है कि रतनगढ-सुजानगढ़ के कुछ क्षेत्रों में योजना का कार्य अभी भी बाकी पड़ा है. हालात ये हैं कि कहीं टंकियों से पाइप लाइनों को नहीं जोड़ा गया, कहीं बिजली से कनेक्शन नहीं हो पाए हैं. जबकि अधिकारी कार्य पूरा होने का दावा कर रहे हैं. 

चूरू से संजय प्रजापत की रिपोर्ट

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